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Cargo Flights: सामान्य यात्री विमान में सीटें होती हैं और लोग यात्रा करते हैं जबकि कार्गो विमान के अंदर सीटों की जगह बड़े कंटेनर और माल रखने की व्यवस्था होती है। इन विमानों का पूरा डिजाइन भारी सामान को सुरक्षित और तेजी से ढोने के लिए बनाया जाता है।

Jewar Airport: जेवर एयरपोर्ट ने एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली है। बुधवार (17 जून) सुबह करीब साढ़े छह बजे घरेलू कार्गो सेवा की औपचारिक शुरुआत हो गई। चेन्नई से ई-कॉमर्स सामान लेकर पहली कार्गो फ्लाइट नोएडा पहुंची। विमान को फायर टेंडरों ने वॉटर कैनन सैल्यूट देकर स्वागत किया।
यह सिर्फ एक विमान की उड़ान नहीं है बल्कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था, कारोबार और कृषि क्षेत्र के लिए एक नए दौर की शुरुआत मानी जा रही है। यात्री विमानों की तरह कार्गो विमान लोगों को नहीं बल्कि सामान को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने का काम करते हैं। अब तक यूपी के कई उद्योगों और किसानों को अपना माल दिल्ली या अन्य बड़े एयरपोर्ट तक पहुंचाना पड़ता था लेकिन अब यह सुविधा सीधे नोएडा एयरपोर्ट से मिलने लगेगी।
कार्गो एयरपोर्ट ऐसा हवाई अड्डा होता है जहां यात्रियों की बजाय मुख्य रूप से माल (Cargo) की ढुलाई की जाती है। यहां से सामान को एक शहर, राज्य या देश से दूसरे स्थान तक हवाई मार्ग के जरिए पहुंचाया जाता है। कार्गो एयरपोर्ट पर बड़े-बड़े गोदाम (वेयरहाउस), कोल्ड स्टोरेज, कंटेनर हैंडलिंग सिस्टम और माल की लोडिंग-अनलोडिंग की विशेष सुविधाएं होती हैं। यहां इलेक्ट्रॉनिक्स सामान, मोबाइल फोन, दवाइयां, ऑटो पार्ट्स, कपड़े, मशीनरी, ई-कॉमर्स पार्सल, फल, सब्जियां और फूल जैसे उत्पाद भेजे जाते हैं। कई हवाईअड्डे सिर्फ कार्गो एयरपोर्ट के तौर पर काम करते हैं जबकि कई यात्री और कार्गो दोनों तरह की सेवाएं उपलब्ध कराते हैं।
सामान्य यात्री विमान में सीटें होती हैं और लोग यात्रा करते हैं जबकि कार्गो विमान के अंदर सीटों की जगह बड़े कंटेनर और माल रखने की व्यवस्था होती है। इन विमानों का पूरा डिजाइन भारी सामान को सुरक्षित और तेजी से ढोने के लिए बनाया जाता है। आज के समय में ऑनलाइन शॉपिंग, निर्यात और वैश्विक व्यापार तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में कार्गो एयरपोर्ट किसी भी देश या क्षेत्र की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण बन जाते हैं। इनके जरिए सामान कम समय में दूर-दराज के बाजारों तक पहुंच जाता है जिससे व्यापार बढ़ता है और किसानों व उद्योगों को बेहतर बाजार मिलते हैं।
जब कार्गो एयरपोर्ट की बात होती है तो दुनिया में सबसे पहले नाम आता है Hong Kong International Airport का। कई वर्षों से यह दुनिया के सबसे व्यस्त कार्गो एयरपोर्ट्स में शामिल रहा है और यहां हर साल लाखों टन माल की आवाजाही होती है। इसके अलावा Memphis International Airport और Shanghai Pudong International Airport भी दुनिया के प्रमुख एयर कार्गो केंद्रों में गिने जाते हैं। इन एयरपोर्ट्स की सफलता का सबसे बड़ा कारण उनका विशाल लॉजिस्टिक्स नेटवर्क, आधुनिक वेयरहाउस और वैश्विक व्यापारिक कनेक्टिविटी है। यही मॉडल अब नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट यानी जेवर एयरपोर्ट में भी देखने को मिल रहा है। हालांकि जेवर एयरपोर्ट अभी अपनी शुरुआत के दौर में है लेकिन इसकी योजना भविष्य को ध्यान में रखकर बनाई गई है। एयरपोर्ट परिसर में बड़े पैमाने पर कार्गो इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम, आधुनिक वेयरहाउस और एक्सप्रेस फ्रेट सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
जेवर एयरपोर्ट को केवल बड़े कार्गो हब के रूप में ही नहीं बल्कि एक आधुनिक और तकनीक आधारित लॉजिस्टिक्स केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। एयरपोर्ट की कार्गो सुविधाओं का विकास एयर इंडिया एसएटीएस (AISATS) द्वारा किया गया है। शुरुआती चरण में यहां हर साल करीब दो लाख मीट्रिक टन माल संभालने की क्षमता तैयार की गई है जिसे भविष्य में बढ़ाकर 15 लाख मीट्रिक टन तक ले जाने की योजना है। इस कार्गो हब की सबसे बड़ी खासियत इसका डिजिटल सिस्टम होगा। यहां अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप आधुनिक ई-फ्रेट प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जाएगा। जेवर एयरपोर्ट के कार्गो टर्मिनल में लगभग 22 हजार वर्ग मीटर का आधुनिक वेयरहाउस क्षेत्र विकसित किया गया है। इसके अलावा दो समर्पित फ्रेट बे भी बनाए गए हैं जहां माल की लोडिंग और अनलोडिंग का काम तेजी से किया जा सकेगा।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश पहले से ही देश के सबसे बड़े औद्योगिक क्षेत्रों में गिना जाता है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल पार्ट्स, मेडिकल उपकरण और कई अन्य उत्पाद तैयार होते हैं। मेरठ खेल सामग्री के लिए प्रसिद्ध है, अलीगढ़ हार्डवेयर उद्योग का बड़ा केंद्र है जबकि आगरा का फुटवियर उद्योग पूरी दुनिया में जाना जाता है। अब तक इन उद्योगों को अपना माल भेजने के लिए दिल्ली एयरपोर्ट या अन्य केंद्रों पर निर्भर रहना पड़ता था। जेवर एयरपोर्ट से कार्गो सेवा शुरू होने के बाद कंपनियों का समय और खर्च दोनों कम होंगे। इसका सीधा असर उत्पादन और निर्यात पर पड़ेगा।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश को देश का कृषि पावरहाउस कहा जाता है। यहां आलू, हरी सब्जियां, फल, फूल, डेयरी उत्पाद और कई तरह की फसलें बड़े पैमाने पर पैदा होती हैं। लेकिन समय पर बाजार तक नहीं पहुंच पाने के कारण किसानों को कई बार नुकसान उठाना पड़ता है। जेवर एयरपोर्ट के जरिए अब ताजा कृषि उत्पाद कुछ घंटों में देश के बड़े शहरों और भविष्य में विदेशों तक पहुंचाए जा सकेंगे। इससे किसानों को बेहतर बाजार और बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ जाएगी। खासकर फूलों और जल्दी खराब होने वाले उत्पादों के लिए यह सुविधा बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
आज ऑनलाइन खरीदारी का दौर है और ग्राहक तेजी से डिलीवरी चाहते हैं। अमेजन, फ्लिपकार्ट, मिंत्रा और अन्य बड़ी कंपनियों के लिए कार्गो नेटवर्क बेहद महत्वपूर्ण होता है। जेवर एयरपोर्ट की कार्गो क्षमता इसे ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए एक प्रमुख वितरण केंद्र बना सकती है।
दिल्ली का इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा देश का सबसे व्यस्त एयरपोर्ट है। यात्रियों के साथ-साथ बड़ी मात्रा में कार्गो भी वहीं से संचालित होता है। जेवर एयरपोर्ट के पूरी तरह शुरू होने के बाद कार्गो का बड़ा हिस्सा यहां शिफ्ट हो सकता है। इससे दिल्ली एयरपोर्ट पर दबाव कम होगा और दोनों एयरपोर्ट मिलकर उत्तर भारत के सबसे बड़े एयर कार्गो नेटवर्क का निर्माण करेंगे।
इस सवाल का जवाब इसकी लोकेशन में छिपा है। जेवर एयरपोर्ट देश के सबसे बड़े उपभोक्ता बाजार दिल्ली-एनसीआर के करीब स्थित है। इसके आसपास नोएडा, ग्रेटर नोएडा, मेरठ, गाजियाबाद, अलीगढ़, आगरा और बुलंदशहर जैसे औद्योगिक और कृषि क्षेत्र मौजूद हैं। अगर कार्गो क्षमता विस्तार की योजनाएं तय समय पर पूरी होती हैं तो आने वाले वर्षों में जेवर एयरपोर्ट भारत के सबसे महत्वपूर्ण एयर कार्गो हब में अपनी जगह बना सकता है और उत्तर भारत के व्यापार को नई ऊंचाई दे सकता है।
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