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गौतमबुद्ध नगर जिले के लिए 28 मार्च 2026 एक बेहद अहम और ऐतिहासिक दिन बनने जा रहा है। इसी दिन देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बहुप्रतीक्षित जेवर एयरपोर्ट यानी नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन करेंगे।

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Jewar Airport : गौतमबुद्ध नगर के लिए 28 मार्च 2026 एक बेहद अहम और ऐतिहासिक दिन बनने जा रहा है। इसी दिन देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बहुप्रतीक्षित जेवर एयरपोर्ट यानी नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन करेंगे। इसके साथ ही केवल एक नए एयरपोर्ट की शुरुआत नहीं होगी, बल्कि करीब 25 साल पुरानी उस महत्वाकांक्षी सोच को भी साकार रूप मिलेगा, जिसका सपना जेवर और आसपास के लोगों ने लंबे समय से देखा था। वर्षों तक अड़चनों, इंतजार और बदलावों से गुजरने के बाद अब यह परियोजना जमीन पर तैयार खड़ी है। माना जा रहा है कि जेवर एयरपोर्ट का शुभारंभ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए विकास की नई धुरी साबित होगा। इससे क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी, बड़े निवेश, उद्योगों के विस्तार, व्यापारिक गतिविधियों में तेजी और लाखों लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर मिल सकते हैं।
जेवर एयरपोर्ट की कहानी आज की नहीं है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का शुरुआती खाका वर्ष 2001 में तैयार हुआ था, जब उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। यही वजह है कि जेवर एयरपोर्ट की बुनियादी अवधारणा का पहला श्रेय राजनाथ सिंह को दिया जाता है। उस समय यह माना गया था कि दिल्ली से सटे पश्चिमी यूपी के लिए एक बड़े अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट की जरूरत आने वाले समय में निर्णायक साबित होगी। हालांकि प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद भी जेवर एयरपोर्ट की राह आसान नहीं रही। राजनीतिक बदलाव, नीतिगत अड़चनें और केंद्र स्तर पर मंजूरी से जुड़े मसले लंबे समय तक इस परियोजना की गति रोकते रहे।
एक दौर ऐसा भी आया, जब जेवर एयरपोर्ट की महत्वाकांक्षी परियोजना राजनीतिक इच्छाशक्ति से ज्यादा सरकारी नियमों और मंजूरियों की जटिलताओं में फंसकर रह गई। केंद्र स्तर पर दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से दूरी को प्रमुख आधार बनाया गया और यही तर्क दिया गया कि 150 किलोमीटर के दायरे में किसी नए अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट को अनुमति देना व्यावहारिक नहीं होगा। इस तकनीकी और नीतिगत आपत्ति ने जेवर एयरपोर्ट की रफ्तार को लंबे समय तक थामे रखा। नतीजा यह हुआ कि जिस परियोजना को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विकास की बड़ी उम्मीद माना जा रहा था, वह वर्षों तक फाइलों और बैठकों के बीच उलझी रही। जेवर और आसपास के लोगों के लिए यह दौर निराशा से भरा रहा, क्योंकि उनका सपना बार-बार मंजूरी की दहलीज पर जाकर अटक जाता था।
राजनीतिक सत्ता बदलने के साथ जेवर एयरपोर्ट का भूगोल भी बदलने की कोशिश हुई। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के कार्यकाल में इस एयरपोर्ट परियोजना को जेवर से हटाकर दूसरी जगह ले जाने की चर्चा सामने आई। उस समय आगरा को विकल्प के तौर पर आगे बढ़ाया गया, क्योंकि वह दिल्ली एयरपोर्ट से अधिक दूरी पर था। इससे जेवर एयरपोर्ट का मूल प्रस्ताव पीछे चला गया और क्षेत्रीय स्तर पर निराशा भी बढ़ी। यानी जिस परियोजना को जेवर की जमीन पर आकार लेना था, उसे दूसरे शहर की ओर मोड़ने की कोशिश ने इसकी रफ्तार को और धीमा कर दिया।
वर्ष 2014 के बाद बदले राजनीतिक माहौल और फिर उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के साथ जेवर एयरपोर्ट को नई गति मिली। बाद में योगी आदित्यनाथ सरकार ने इस परियोजना को सिर्फ घोषणा तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे जमीन पर उतारने के लिए तेज फैसले लिए। भूमि अधिग्रहण, प्रशासनिक स्वीकृतियां, निर्माण कार्य और निवेशकों का भरोसा हर स्तर पर जेवर एयरपोर्ट को प्राथमिकता दी गई।
इसी का नतीजा है कि आज जेवर एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्धियों में गिना जा रहा है। स्थानीय लोगों ने भी इस परियोजना का सहयोग किया और जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण ढंग से पूरी हुई।
जेवर एयरपोर्ट का उद्घाटन सिर्फ एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक लंबी यात्रा का पड़ाव है। करीब ढाई दशक पहले जो सपना कागज पर शुरू हुआ था, वह अब हकीकत बनकर सामने है। पिछले पांच वर्षों में इस परियोजना के लिए 2500 हेक्टेयर से अधिक भूमि का अधिग्रहण किया गया, जो अपने आप में बड़ा रिकॉर्ड माना जा रहा है। इस परियोजना की अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वरिष्ठ प्रशासनिक स्तर पर लगातार इसकी निगरानी होती रही। अलग-अलग चरणों में अधिकारियों ने साइट का निरीक्षण किया और अधिग्रहण से लेकर निर्माण तक की प्रगति की समीक्षा की। अब 28 मार्च 2026 को जेवर एयरपोर्ट औपचारिक रूप से देश को समर्पित कर दिया जाएगा।
जेवर एयरपोर्ट का असर केवल गौतमबुद्ध नगर तक सीमित नहीं रहने वाला। यह परियोजना पश्चिमी उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए गेमचेंजर मानी जा रही है। गौतमबुद्ध नगर, अलीगढ़, बुलंदशहर, गाजियाबाद, हापुड़, मेरठ समेत आसपास के कई जिलों को इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है। हरियाणा के सीमावर्ती इलाकों पर भी इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। जेवर एयरपोर्ट के कारण इस पूरे क्षेत्र में औद्योगिक निवेश, लॉजिस्टिक्स हब, वेयरहाउसिंग, होटल इंडस्ट्री, रियल एस्टेट, ट्रांसपोर्ट और सर्विस सेक्टर में तेजी आने की उम्मीद है। गौतमबुद्ध नगर में तेजी से बढ़ते निवेश के पीछे भी जेवर एयरपोर्ट को सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है।
इस परियोजना से रोजगार के बड़े अवसर पैदा होने की उम्मीद जताई जा रही है। एयरपोर्ट से जुड़े प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष क्षेत्रों में लाखों लोगों को काम मिल सकता है। एविएशन, ग्राउंड स्टाफ, सुरक्षा, कार्गो, आतिथ्य, टैक्सी, खानपान, सप्लाई चेन और स्थानीय व्यवसाय हर सेक्टर में जेवर एयरपोर्ट नई संभावनाओं का दरवाजा खोलेगा। यही कारण है कि जेवर एयरपोर्ट को केवल यात्रा सुविधा के रूप में नहीं, बल्कि रोजगार और क्षेत्रीय आर्थिक बदलाव के बड़े इंजन के तौर पर देखा जा रहा है।
जेवर एयरपोर्ट ने अपने निर्माण चरण में ही एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज कर ली थी। 9 दिसंबर 2024 को यहां पहली बार एक कमर्शियल विमान की सफल लैंडिंग हुई थी। एयरपोर्ट के 3900 मीटर लंबे और 60 मीटर चौड़े रनवे पर इंडिगो एयरलाइंस के एयरबस A-320 विमान ने उतरकर इसकी तकनीकी तैयारियों को साबित किया था। उड़ान के दौरान विमान ने आईएलएस समेत कई नेविगेशन और ऑपरेशनल सिस्टम की जांच की थी। इसके बाद एयर ट्रैफिक कंट्रोल के समन्वय से सफल लैंडिंग कराई गई। रनवे पर उतरते ही विमान को वाटर कैनन सलामी दी गई। इस दृश्य ने जेवर एयरपोर्ट को लेकर लोगों के उत्साह को और बढ़ा दिया था। Jewar Airport
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