PM मोदी के हाथों होगा जेवर एयरपोर्ट का उद्घाटन, जल्द शुरू होंगी सेवाएं
संसद में केंद्र सरकार ने संकेत दिए हैं कि जेवर एयरपोर्ट पर यात्री उड़ान सेवाएं एयरोड्रम लाइसेंस मिलने के लगभग 45 दिन के भीतर शुरू की जा सकती हैं। इससे साफ है कि अब जेवर एयरपोर्ट से व्यावसायिक उड़ानों का सपना जमीन पर उतरने के बेहद करीब पहुंच चुका है।

Jewar Airport : उत्तर प्रदेश के बहुप्रतीक्षित जेवर एयरपोर्ट को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। संसद में केंद्र सरकार ने संकेत दिए हैं कि जेवर एयरपोर्ट पर यात्री उड़ान सेवाएं एयरोड्रम लाइसेंस मिलने के लगभग 45 दिन के भीतर शुरू की जा सकती हैं। इससे साफ है कि अब जेवर एयरपोर्ट से व्यावसायिक उड़ानों का सपना जमीन पर उतरने के बेहद करीब पहुंच चुका है। नागर विमानन मंत्री किंजरापु राम मोहन नायडू ने राज्यसभा में कहा कि आमतौर पर किसी भी एयरपोर्ट को एयरोड्रम लाइसेंस मिलने के बाद उड़ान संचालन शुरू होने में करीब डेढ़ से दो महीने का समय लगता है। इसी अवधि में एयरलाइंस, ग्राउंड हैंडलिंग एजेंसियां और अन्य संबंधित संस्थाएं अपनी परिचालन तैयारियों को अंतिम रूप देती हैं। ऐसे में जेवर एयरपोर्ट से भी लगभग 45 दिनों के भीतर यात्री सेवाएं शुरू होने की उम्मीद जताई गई है।
प्रधानमंत्री मोदी के हाथों होगा लोकार्पण
सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि उड़ानों की शुरुआत से पहले जेवर एयरपोर्ट का औपचारिक लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों कराया जाएगा। इसके लिए बड़े स्तर पर एक भव्य कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी है। माना जा रहा है कि यह आयोजन न सिर्फ उत्तर प्रदेश, बल्कि देश के एविएशन सेक्टर के लिए भी एक अहम क्षण होगा। राज्यसभा में यह जानकारी उस समय सामने आई जब सांसद सुरेंद्र सिंह नागर ने सवाल उठाया कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को एयरोड्रम लाइसेंस मिल चुका है, तो यहां से पहली यात्री उड़ान आखिर कब शुरू होगी। इस पर जवाब देते हुए नागर विमानन मंत्री ने कहा कि लाइसेंस मिलने के बाद एयरलाइंस को अपना शेड्यूल तय करने, टिकट बिक्री शुरू करने और संचालन संबंधी योजनाएं लागू करने के लिए कुछ समय चाहिए होता है।
एयरलाइंस करेंगी शेड्यूल और टिकटिंग की तैयारी
मंत्री के मुताबिक, एयरोड्रम लाइसेंस मिलने के बाद एयरलाइंस अपनी व्यावसायिक रणनीति के तहत रूट तय करती हैं, उड़ानों का टाइम-टेबल बनाती हैं और टिकट बिक्री की प्रक्रिया शुरू करती हैं। यही वजह है कि जेवर एयरपोर्ट पर भी लाइसेंस के तुरंत बाद उड़ानें शुरू नहीं होंगी, बल्कि तय प्रक्रियाओं के बाद चरणबद्ध तरीके से संचालन आगे बढ़ेगा। इस पूरी प्रक्रिया में एयरलाइन कंपनियों, सुरक्षा एजेंसियों, एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट, ग्राउंड स्टाफ और तकनीकी व्यवस्थाओं का समन्वय बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ानों की शुरुआत का रास्ता लगभग साफ माना जा रहा है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए गेमचेंजर बनेगा जेवर एयरपोर्ट
जेवर एयरपोर्ट को पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों के लिए बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के रूप में देखा जा रहा है। इसके शुरू होने से न सिर्फ हवाई कनेक्टिविटी मजबूत होगी, बल्कि निवेश, रोजगार, लॉजिस्टिक्स, पर्यटन और औद्योगिक विकास को भी नई रफ्तार मिलेगी। खासतौर पर यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र और ग्रेटर नोएडा-जेवर बेल्ट में इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है।
सरकार और प्रशासनिक स्तर पर भी यह संदेश दिया जा रहा है कि जेवर एयरपोर्ट सिर्फ एक एयरपोर्ट नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की आर्थिक तस्वीर बदलने वाली परियोजना है। Jewar Airport
Jewar Airport : उत्तर प्रदेश के बहुप्रतीक्षित जेवर एयरपोर्ट को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। संसद में केंद्र सरकार ने संकेत दिए हैं कि जेवर एयरपोर्ट पर यात्री उड़ान सेवाएं एयरोड्रम लाइसेंस मिलने के लगभग 45 दिन के भीतर शुरू की जा सकती हैं। इससे साफ है कि अब जेवर एयरपोर्ट से व्यावसायिक उड़ानों का सपना जमीन पर उतरने के बेहद करीब पहुंच चुका है। नागर विमानन मंत्री किंजरापु राम मोहन नायडू ने राज्यसभा में कहा कि आमतौर पर किसी भी एयरपोर्ट को एयरोड्रम लाइसेंस मिलने के बाद उड़ान संचालन शुरू होने में करीब डेढ़ से दो महीने का समय लगता है। इसी अवधि में एयरलाइंस, ग्राउंड हैंडलिंग एजेंसियां और अन्य संबंधित संस्थाएं अपनी परिचालन तैयारियों को अंतिम रूप देती हैं। ऐसे में जेवर एयरपोर्ट से भी लगभग 45 दिनों के भीतर यात्री सेवाएं शुरू होने की उम्मीद जताई गई है।
प्रधानमंत्री मोदी के हाथों होगा लोकार्पण
सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि उड़ानों की शुरुआत से पहले जेवर एयरपोर्ट का औपचारिक लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों कराया जाएगा। इसके लिए बड़े स्तर पर एक भव्य कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी है। माना जा रहा है कि यह आयोजन न सिर्फ उत्तर प्रदेश, बल्कि देश के एविएशन सेक्टर के लिए भी एक अहम क्षण होगा। राज्यसभा में यह जानकारी उस समय सामने आई जब सांसद सुरेंद्र सिंह नागर ने सवाल उठाया कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को एयरोड्रम लाइसेंस मिल चुका है, तो यहां से पहली यात्री उड़ान आखिर कब शुरू होगी। इस पर जवाब देते हुए नागर विमानन मंत्री ने कहा कि लाइसेंस मिलने के बाद एयरलाइंस को अपना शेड्यूल तय करने, टिकट बिक्री शुरू करने और संचालन संबंधी योजनाएं लागू करने के लिए कुछ समय चाहिए होता है।
एयरलाइंस करेंगी शेड्यूल और टिकटिंग की तैयारी
मंत्री के मुताबिक, एयरोड्रम लाइसेंस मिलने के बाद एयरलाइंस अपनी व्यावसायिक रणनीति के तहत रूट तय करती हैं, उड़ानों का टाइम-टेबल बनाती हैं और टिकट बिक्री की प्रक्रिया शुरू करती हैं। यही वजह है कि जेवर एयरपोर्ट पर भी लाइसेंस के तुरंत बाद उड़ानें शुरू नहीं होंगी, बल्कि तय प्रक्रियाओं के बाद चरणबद्ध तरीके से संचालन आगे बढ़ेगा। इस पूरी प्रक्रिया में एयरलाइन कंपनियों, सुरक्षा एजेंसियों, एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट, ग्राउंड स्टाफ और तकनीकी व्यवस्थाओं का समन्वय बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ानों की शुरुआत का रास्ता लगभग साफ माना जा रहा है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए गेमचेंजर बनेगा जेवर एयरपोर्ट
जेवर एयरपोर्ट को पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों के लिए बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के रूप में देखा जा रहा है। इसके शुरू होने से न सिर्फ हवाई कनेक्टिविटी मजबूत होगी, बल्कि निवेश, रोजगार, लॉजिस्टिक्स, पर्यटन और औद्योगिक विकास को भी नई रफ्तार मिलेगी। खासतौर पर यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र और ग्रेटर नोएडा-जेवर बेल्ट में इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है।
सरकार और प्रशासनिक स्तर पर भी यह संदेश दिया जा रहा है कि जेवर एयरपोर्ट सिर्फ एक एयरपोर्ट नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की आर्थिक तस्वीर बदलने वाली परियोजना है। Jewar Airport












