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यात्रियों को अक्षरधाम, मयूर विहार, बॉटनिकल गार्डन, सिटी सेंटर और ग्रेटर नोएडा के परी चौक जैसे बड़े पॉइंट्स से बसें मिल सकेंगी। इन जगहों को इसलिए चुना गया है क्योंकि यहां बड़ी संख्या में लोग मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करते हैं।

नोएडा और दिल्ली-एनसीआर के लोगों के लिए एक बड़ी और राहतभरी खबर सामने आई है। 1 जून 2026 से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट यानी जेवर एयरपोर्ट के लिए हाइड्रोजन बस सेवा शुरू होने जा रही है। यह सेवा सिर्फ सफर को आसान नहीं बनाएगी बल्कि पर्यावरण को भी काफी फायदा पहुंचाएगी। खास बात यह है कि इन बसों से धुआं नहीं निकलेगा और प्रदूषण भी लगभग शून्य रहेगा। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण यानी YEIDA इस नई सेवा को शुरू करने जा रहा है। शुरुआती चरण में एनटीपीसी की ओर से 5 अत्याधुनिक हाइड्रोजन बसें चलाई जाएंगी। भारत में हाइड्रोजन मोबिलिटी अभी शुरुआती दौर में है इसलिए इसे एक बड़ा और आधुनिक कदम माना जा रहा है।
यह नई बस सेवा दिल्ली, नोएडा और ग्रेटर नोएडा के कई अहम इलाकों को सीधे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जोड़ेगी। यात्रियों को अक्षरधाम, मयूर विहार, बॉटनिकल गार्डन, सिटी सेंटर और ग्रेटर नोएडा के परी चौक जैसे बड़े पॉइंट्स से बसें मिल सकेंगी। इन जगहों को इसलिए चुना गया है क्योंकि यहां बड़ी संख्या में लोग मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करते हैं। इससे एयरपोर्ट पहुंचना पहले के मुकाबले काफी आसान हो सकता है। खासकर उन यात्रियों को राहत मिलेगी जिन्हें टैक्सी या निजी वाहन पर ज्यादा खर्च करना पड़ता था।
शुरुआत में इस सेवा को छह महीने के परीक्षण के तौर पर शुरू किया जाएगा। इस दौरान बसों के संचालन, यात्रियों की संख्या और तकनीकी प्रदर्शन पर नजर रखी जाएगी। अगर यह प्रयोग सफल रहता है तो आगे और ज्यादा हाइड्रोजन बसें भी चलाई जा सकती हैं। इन बसों में करीब 45 यात्रियों के बैठने की क्षमता होगी। यात्रियों को आरामदायक और आधुनिक सफर देने के लिए इनमें कई नई सुविधाएं भी रहने की उम्मीद है।
हाइड्रोजन बसों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इनमें से धुआं नहीं निकलता। यह बसें सिर्फ पानी की भाप छोड़ती हैं जिससे पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचता। बढ़ते प्रदूषण के बीच इसे क्लीन और ग्रीन ट्रांसपोर्ट की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इन बसों की रेंज भी काफी ज्यादा होती है। एक बार हाइड्रोजन भरने के बाद यह करीब 600 किलोमीटर तक चल सकती हैं। यही वजह है कि लंबी दूरी और एयरपोर्ट रूट के लिए इन्हें बेहतर माना जा रहा है। इसके लिए खास हाइड्रोजन कॉरिडोर और नए रिफ्यूलिंग स्टेशन भी तैयार किए जा रहे हैं ताकि बसों का संचालन बिना किसी परेशानी के हो सके।
इस बस सेवा का संचालन उत्तर प्रदेश परिवहन निगम यानी यूपी रोडवेज की ओर से किया जाएगा। वहीं बसें और ईंधन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी एनटीपीसी की होगी। जानकारी के मुताबिक, बस संचालन के लिए एनटीपीसी को प्रति किलोमीटर 58 रुपये का भुगतान किया जाएगा। यह प्रोजेक्ट भविष्य में भारत की क्लीन मोबिलिटी योजना का अहम हिस्सा बन सकता है।
नोएडा एयरपोर्ट को देश के सबसे बड़े और आधुनिक एयरपोर्ट्स में गिना जा रहा है। ऐसे में एयरपोर्ट तक पहुंचने के लिए बेहतर और पर्यावरण के अनुकूल सार्वजनिक परिवहन की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। हाइड्रोजन बस सेवा शुरू होने से दिल्ली, नोएडा और ग्रेटर नोएडा के यात्रियों को तेज, आसान और कम प्रदूषण वाला सफर मिल सकेगा। साथ ही यह कदम भविष्य में ग्रीन ट्रांसपोर्ट सिस्टम को बढ़ावा देने में भी अहम भूमिका निभा सकता है।
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