जेवर के नवादा गांव में बड़ा फैसला, अब शादी-ब्याह में नहीं बजेगा डीजे

ग्रेटर नोएडा के जेवर क्षेत्र से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने सामाजिक सरोकारों और पारंपरिक मूल्यों पर नई चर्चा छेड़ दी है। जेवर के नवादा गांव में ग्रामीणों ने सामूहिक सहमति से एक अहम निर्णय लेते हुए शादी-विवाह और अन्य खुशी के आयोजनों में डीजे पर पूरी तरह रोक लगाने का ऐलान कर दिया है।

जेवर के नवादा गांव में डीजे पर रोक
जेवर के नवादा गांव में डीजे पर रोक
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar23 Mar 2026 11:42 AM
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Jewar News : ग्रेटर नोएडा के जेवर क्षेत्र से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने सामाजिक सरोकारों और पारंपरिक मूल्यों पर नई चर्चा छेड़ दी है। जेवर के नवादा गांव में ग्रामीणों ने सामूहिक सहमति से एक अहम निर्णय लेते हुए शादी-विवाह और अन्य खुशी के आयोजनों में डीजे पर पूरी तरह रोक लगाने का ऐलान कर दिया है। गांव की पंचायत में लिया गया यह फैसला अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। करीब पांच हजार की आबादी वाले जेवर के नवादा गांव में आयोजित पंचायत में ग्रामीणों ने साफ कहा कि अब गांव की सीमा के भीतर किसी भी वैवाहिक कार्यक्रम में तेज आवाज में डीजे नहीं बजाया जाएगा। पंचायत का यह भी स्पष्ट संदेश रहा कि यदि कोई परिवार इस सामूहिक निर्णय की अनदेखी करता है, तो उसके खिलाफ सामाजिक स्तर पर कड़ा रुख अपनाया जाएगा।

जेवर में पंचायत का बड़ा संदेश

रविवार को जेवर इलाके के नवादा गांव में आयोजित पंचायत में गांव के बुजुर्ग, जिम्मेदार नागरिक, सामाजिक प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। बैठक के दौरान शादी-ब्याह में बढ़ते शोर-शराबे, ध्वनि प्रदूषण और उससे होने वाली परेशानियों पर विस्तार से चर्चा हुई। इसके बाद सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि गांव में आगे से डीजे संस्कृति को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा। ग्रामीणों ने यह भी तय किया कि शादी जैसे पारिवारिक और सामाजिक अवसरों को शालीनता, मर्यादा और पारंपरिक ढंग से संपन्न कराया जाएगा। पंचायत में मौजूद लोगों ने माना कि खुशी के मौके पर उत्सव होना चाहिए, लेकिन ऐसा कोई आयोजन नहीं होना चाहिए जिससे बुजुर्गों, बच्चों, मरीजों और अन्य ग्रामीणों को परेशानी उठानी पड़े।

नियम तोड़ा तो गांव में होगा सामाजिक बहिष्कार

पंचायत के निर्णय में केवल अपील नहीं, बल्कि सख्त सामाजिक संदेश भी शामिल किया गया। ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया कि यदि कोई परिवार गांव के इस सामूहिक फैसले के खिलाफ जाकर शादी में डीजे बजाता है, तो उसके कार्यक्रम का सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा। इतना ही नहीं, गांव के लोग ऐसे आयोजन में शामिल भी नहीं होंगे। जेवर के नवादा गांव में इस फैसले को जिस तरह व्यापक समर्थन मिला, उसने ग्रामीण एकजुटता की मजबूत तस्वीर पेश की। पंचायत में शामिल लोगों ने कहा कि गांव का हित व्यक्तिगत पसंद से ऊपर है और सामूहिक अनुशासन से ही बेहतर सामाजिक वातावरण बनाया जा सकता है।

पंचायत में रखी गई ठोस दलीलें

पंचायत में पूर्व प्रधानाचार्य नरपत सिंह नागर ने तेज आवाज में बजने वाले डीजे से होने वाले नुकसान पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अत्यधिक ध्वनि केवल असुविधा ही नहीं पैदा करती, बल्कि यह कई स्वास्थ्य समस्याओं की वजह भी बन सकती है। विशेष रूप से बुजुर्गों, छोटे बच्चों और बीमार लोगों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने ग्रामीणों को समझाया कि लगातार बढ़ता ध्वनि प्रदूषण मानसिक तनाव, सिरदर्द, बेचैनी और हृदय संबंधी समस्याओं को बढ़ा सकता है। इसी कारण जेवर के नवादा गांव ने समय रहते एक सजग और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण फैसला लिया है। पंचायत में केवल डीजे पर रोक की बात नहीं हुई, बल्कि गांव में अन्य सामाजिक बुराइयों और अनावश्यक दिखावे को खत्म करने पर भी जोर दिया गया। ग्रामीणों ने संकल्प लिया कि जेवर क्षेत्र के इस गांव में शांति, अनुशासन और सामाजिक संतुलन बनाए रखने की दिशा में मिलकर काम किया जाएगा। गांव के लोगों का मानना है कि यदि समाज स्वयं जागरूक होकर कुछ अनुशासन तय करे, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर माहौल तैयार किया जा सकता है। Jewar News

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राजनाथ के विजन से योगी सरकार के अमल तक, ऐसे तैयार हुआ जेवर एयरपोर्ट

गौतमबुद्ध नगर जिले के लिए 28 मार्च 2026 एक बेहद अहम और ऐतिहासिक दिन बनने जा रहा है। इसी दिन देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बहुप्रतीक्षित जेवर एयरपोर्ट यानी नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन करेंगे।

जेवर का सपना साकार
जेवर का सपना साकार
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar23 Mar 2026 10:24 AM
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Jewar Airport : गौतमबुद्ध नगर के लिए 28 मार्च 2026 एक बेहद अहम और ऐतिहासिक दिन बनने जा रहा है। इसी दिन देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बहुप्रतीक्षित जेवर एयरपोर्ट यानी नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन करेंगे। इसके साथ ही केवल एक नए एयरपोर्ट की शुरुआत नहीं होगी, बल्कि करीब 25 साल पुरानी उस महत्वाकांक्षी सोच को भी साकार रूप मिलेगा, जिसका सपना जेवर और आसपास के लोगों ने लंबे समय से देखा था। वर्षों तक अड़चनों, इंतजार और बदलावों से गुजरने के बाद अब यह परियोजना जमीन पर तैयार खड़ी है। माना जा रहा है कि जेवर एयरपोर्ट का शुभारंभ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए विकास की नई धुरी साबित होगा। इससे क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी, बड़े निवेश, उद्योगों के विस्तार, व्यापारिक गतिविधियों में तेजी और लाखों लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर मिल सकते हैं।

राजनाथ सिंह को क्यों मिलता है पहला क्रेडिट

जेवर एयरपोर्ट की कहानी आज की नहीं है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का शुरुआती खाका वर्ष 2001 में तैयार हुआ था, जब उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। यही वजह है कि जेवर एयरपोर्ट की बुनियादी अवधारणा का पहला श्रेय राजनाथ सिंह को दिया जाता है। उस समय यह माना गया था कि दिल्ली से सटे पश्चिमी यूपी के लिए एक बड़े अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट की जरूरत आने वाले समय में निर्णायक साबित होगी। हालांकि प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद भी जेवर एयरपोर्ट की राह आसान नहीं रही। राजनीतिक बदलाव, नीतिगत अड़चनें और केंद्र स्तर पर मंजूरी से जुड़े मसले लंबे समय तक इस परियोजना की गति रोकते रहे।

यूपीए दौर में अटका रहा जेवर एयरपोर्ट

एक दौर ऐसा भी आया, जब जेवर एयरपोर्ट की महत्वाकांक्षी परियोजना राजनीतिक इच्छाशक्ति से ज्यादा सरकारी नियमों और मंजूरियों की जटिलताओं में फंसकर रह गई। केंद्र स्तर पर दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से दूरी को प्रमुख आधार बनाया गया और यही तर्क दिया गया कि 150 किलोमीटर के दायरे में किसी नए अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट को अनुमति देना व्यावहारिक नहीं होगा। इस तकनीकी और नीतिगत आपत्ति ने जेवर एयरपोर्ट की रफ्तार को लंबे समय तक थामे रखा। नतीजा यह हुआ कि जिस परियोजना को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विकास की बड़ी उम्मीद माना जा रहा था, वह वर्षों तक फाइलों और बैठकों के बीच उलझी रही। जेवर और आसपास के लोगों के लिए यह दौर निराशा से भरा रहा, क्योंकि उनका सपना बार-बार मंजूरी की दहलीज पर जाकर अटक जाता था।

अखिलेश सरकार में बदला गया था रुख

राजनीतिक सत्ता बदलने के साथ जेवर एयरपोर्ट का भूगोल भी बदलने की कोशिश हुई। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के कार्यकाल में इस एयरपोर्ट परियोजना को जेवर से हटाकर दूसरी जगह ले जाने की चर्चा सामने आई। उस समय आगरा को विकल्प के तौर पर आगे बढ़ाया गया, क्योंकि वह दिल्ली एयरपोर्ट से अधिक दूरी पर था। इससे जेवर एयरपोर्ट का मूल प्रस्ताव पीछे चला गया और क्षेत्रीय स्तर पर निराशा भी बढ़ी। यानी जिस परियोजना को जेवर की जमीन पर आकार लेना था, उसे दूसरे शहर की ओर मोड़ने की कोशिश ने इसकी रफ्तार को और धीमा कर दिया।

योगी सरकार में मिली सबसे तेज रफ्तार

वर्ष 2014 के बाद बदले राजनीतिक माहौल और फिर उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के साथ जेवर एयरपोर्ट को नई गति मिली। बाद में योगी आदित्यनाथ सरकार ने इस परियोजना को सिर्फ घोषणा तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे जमीन पर उतारने के लिए तेज फैसले लिए। भूमि अधिग्रहण, प्रशासनिक स्वीकृतियां, निर्माण कार्य और निवेशकों का भरोसा हर स्तर पर जेवर एयरपोर्ट को प्राथमिकता दी गई।

इसी का नतीजा है कि आज जेवर एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्धियों में गिना जा रहा है। स्थानीय लोगों ने भी इस परियोजना का सहयोग किया और जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण ढंग से पूरी हुई।

25 साल का इंतजार अब खत्म होने जा रहा है

जेवर एयरपोर्ट का उद्घाटन सिर्फ एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक लंबी यात्रा का पड़ाव है। करीब ढाई दशक पहले जो सपना कागज पर शुरू हुआ था, वह अब हकीकत बनकर सामने है। पिछले पांच वर्षों में इस परियोजना के लिए 2500 हेक्टेयर से अधिक भूमि का अधिग्रहण किया गया, जो अपने आप में बड़ा रिकॉर्ड माना जा रहा है। इस परियोजना की अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वरिष्ठ प्रशासनिक स्तर पर लगातार इसकी निगरानी होती रही। अलग-अलग चरणों में अधिकारियों ने साइट का निरीक्षण किया और अधिग्रहण से लेकर निर्माण तक की प्रगति की समीक्षा की। अब 28 मार्च 2026 को जेवर एयरपोर्ट औपचारिक रूप से देश को समर्पित कर दिया जाएगा।

जेवर एयरपोर्ट से बदलेगी पश्चिमी यूपी की तस्वीर

जेवर एयरपोर्ट का असर केवल गौतमबुद्ध नगर तक सीमित नहीं रहने वाला। यह परियोजना पश्चिमी उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए गेमचेंजर मानी जा रही है। गौतमबुद्ध नगर, अलीगढ़, बुलंदशहर, गाजियाबाद, हापुड़, मेरठ समेत आसपास के कई जिलों को इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है। हरियाणा के सीमावर्ती इलाकों पर भी इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। जेवर एयरपोर्ट के कारण इस पूरे क्षेत्र में औद्योगिक निवेश, लॉजिस्टिक्स हब, वेयरहाउसिंग, होटल इंडस्ट्री, रियल एस्टेट, ट्रांसपोर्ट और सर्विस सेक्टर में तेजी आने की उम्मीद है। गौतमबुद्ध नगर में तेजी से बढ़ते निवेश के पीछे भी जेवर एयरपोर्ट को सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है।

रोजगार का बड़ा केंद्र बनेगा जेवर एयरपोर्ट

इस परियोजना से रोजगार के बड़े अवसर पैदा होने की उम्मीद जताई जा रही है। एयरपोर्ट से जुड़े प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष क्षेत्रों में लाखों लोगों को काम मिल सकता है। एविएशन, ग्राउंड स्टाफ, सुरक्षा, कार्गो, आतिथ्य, टैक्सी, खानपान, सप्लाई चेन और स्थानीय व्यवसाय हर सेक्टर में जेवर एयरपोर्ट नई संभावनाओं का दरवाजा खोलेगा। यही कारण है कि जेवर एयरपोर्ट को केवल यात्रा सुविधा के रूप में नहीं, बल्कि रोजगार और क्षेत्रीय आर्थिक बदलाव के बड़े इंजन के तौर पर देखा जा रहा है।

पहली लैंडिंग ने ही दे दिया था बड़े भविष्य का संकेत

जेवर एयरपोर्ट ने अपने निर्माण चरण में ही एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज कर ली थी। 9 दिसंबर 2024 को यहां पहली बार एक कमर्शियल विमान की सफल लैंडिंग हुई थी। एयरपोर्ट के 3900 मीटर लंबे और 60 मीटर चौड़े रनवे पर इंडिगो एयरलाइंस के एयरबस A-320 विमान ने उतरकर इसकी तकनीकी तैयारियों को साबित किया था। उड़ान के दौरान विमान ने आईएलएस समेत कई नेविगेशन और ऑपरेशनल सिस्टम की जांच की थी। इसके बाद एयर ट्रैफिक कंट्रोल के समन्वय से सफल लैंडिंग कराई गई। रनवे पर उतरते ही विमान को वाटर कैनन सलामी दी गई। इस दृश्य ने जेवर एयरपोर्ट को लेकर लोगों के उत्साह को और बढ़ा दिया था। Jewar Airport

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यमुना सिटी में घर-जमीन के बढ़े दाम, 1 अप्रैल से लागू होंगे नए रेट

यमुना सिटी में घर, दुकान, दफ्तर या औद्योगिक भूखंड खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए बड़ा अपडेट है। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) ने शहर की विभिन्न श्रेणियों की संपत्तियों की आवंटन दरों में बढ़ोतरी कर दी है।

यमुना सिटी में रेट बढ़े
यमुना सिटी में रेट बढ़े
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userअभिजीत यादव
calendar21 Mar 2026 10:16 AM
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Yamuna City News : यमुना सिटी में घर, दुकान, दफ्तर या औद्योगिक भूखंड खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए बड़ा अपडेट है। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) ने शहर की विभिन्न श्रेणियों की संपत्तियों की आवंटन दरों में बढ़ोतरी कर दी है। इस फैसले के बाद यमुना सिटी में प्रॉपर्टी खरीदना और महंगा हो जाएगा। नई दरें 1 अप्रैल से प्रभावी होंगी। दरअसल, जेवर स्थित जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के तेजी से विकसित होते ढांचे और उसके आसपास आकार ले रहीं बड़ी परियोजनाओं ने यमुना सिटी की जमीन को पहले ही निवेशकों की पहली पसंद बना दिया है। अब यीडा की नई दरों ने यह संकेत दे दिया है कि आने वाले समय में इस क्षेत्र की रियल एस्टेट वैल्यू और ऊपर जा सकती है।

जेवर एयरपोर्ट बना जमीन की कीमतों में तेजी का बड़ा कारण

यमुना सिटी में प्रॉपर्टी रेट्स की इस नई बढ़ोतरी के पीछे जेवर एयरपोर्ट सबसे अहम वजह माना जा रहा है। एयरपोर्ट के साथ-साथ फिल्म सिटी, फिनटेक सिटी, एआई सिटी, जापानी, कोरियन और सिंगापुर आधारित औद्योगिक व शहरी परियोजनाओं ने इस क्षेत्र को तेजी से बदलती निवेश पट्टी में बदल दिया है। यही कारण है कि यहां जमीन की मांग लगातार बढ़ रही है और उसके साथ कीमतें भी ऊपर जा रही हैं।

यीडा इससे पहले भी वित्तीय वर्ष 2025-26 में जमीन की कीमतों में 10 प्रतिशत से 62 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर चुका था। अब वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए भी आवंटन दरों में 3.58 फीसदी तक वृद्धि की गई है। बोर्ड बैठक में राया हेरिटेज सिटी की संशोधित डीपीआर को शासन को भेजने का प्रस्ताव भी मंजूर किया गया है।

तीन साल में करीब 40 फीसदी तक चढ़े दाम

यमुना सिटी में पिछले तीन वर्षों के दौरान संपत्तियों की कीमतों में उल्लेखनीय उछाल दर्ज किया गया है। आवासीय और वाणिज्यिक संपत्तियों की दरें अब बढ़कर 36 हजार रुपये से 87 हजार रुपये प्रति वर्गमीटर तक पहुंच गई हैं। ग्रुप हाउसिंग श्रेणी में तो सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिली है, जहां करीब 68 फीसदी तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो जेवर एयरपोर्ट के आसपास भविष्य को देखते हुए प्लॉट, फ्लैट या व्यावसायिक संपत्ति खरीदना चाहते हैं। अब यमुना सिटी में अपना आशियाना बनाना पहले से ज्यादा खर्चीला हो गया है।

मिक्स्ड लैंड यूज श्रेणी में भी बढ़ी दरें

यीडा ने मिक्स्ड लैंड यूज की कई श्रेणियों में भी दरें बढ़ा दी हैं। औद्योगिक, संस्थागत और रिक्रिएशनल उपयोग वाली जमीनों में 75 प्रतिशत तक, आवासीय श्रेणी में 12 प्रतिशत, वाणिज्यिक में 8 प्रतिशत और संस्थागत उपयोग में 5 प्रतिशत तक वृद्धि की गई है। इसी तरह आवासीय टाउनशिप की आवंटन दर 39,258 रुपये से बढ़ाकर 40,670 रुपये प्रति वर्गमीटर कर दी गई है। वहीं कॉरपोरेट ऑफिस के लिए दर 52,500 रुपये से बढ़कर 54,380 रुपये प्रति वर्गमीटर हो गई है। साफ है कि जेवर एयरपोर्ट के प्रभाव क्षेत्र में अब सिर्फ रहने की जमीन ही नहीं, कारोबार से जुड़ी संपत्तियां भी महंगी होती जा रही हैं।

ट्रांसपोर्ट लैंड यूज की दरें तय करने के लिए बनेगी समिति

यीडा बोर्ड बैठक में ट्रांसपोर्ट लैंड यूज और मल्टीपल लैंड यूज की दरों को लेकर भी अहम फैसला लिया गया। इन श्रेणियों की दरें तय करने के लिए अलग-अलग समितियां गठित की गई हैं। ये समितियां सर्वे कर अपनी रिपोर्ट तैयार करेंगी, जिसके आधार पर अगली बोर्ड बैठक में अंतिम निर्णय लिया जाएगा। यह बैठक अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार की अध्यक्षता में हुई। इसमें एसीईओ शैलेंद्र भाटिया, एसीईओ राजेश कुमार, एसीईओ मनीष मीणा, ओएसडी शैलेंद्र सिंह और महाप्रबंधक परियोजना विभाग राजेंद्र भाटी समेत कई अधिकारी मौजूद रहे।

जेवर एयरपोर्ट पर इस बार पांच गुना ज्यादा पूंजीगत अंशदान

यीडा ने अपने बजट में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को खास प्राथमिकता दी है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में एयरपोर्ट के लिए 502 करोड़ रुपये का पूंजीगत अंशदान दिया जाएगा, जबकि बीते वर्ष यह रकम 103 करोड़ रुपये थी। यानी इस बार एयरपोर्ट परियोजना के लिए प्राधिकरण पांच गुना ज्यादा राशि खर्च करेगा। इस अतिरिक्त निवेश से एयरपोर्ट के लिए जमीन खरीद, विस्थापन और संबंधित निर्माण कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है। इसके अलावा निर्माण गतिविधियों पर भी पहले के मुकाबले करीब ढाई गुना अधिक खर्च किया जाएगा।

11,829 करोड़ के बजट से बदलेगी यमुना सिटी की तस्वीर

यीडा ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 11,829 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी है। यह उसके इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा बजट है। एक समय ऐसा भी था जब प्राधिकरण की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि उसके भविष्य पर सवाल उठ रहे थे, लेकिन अब वही यीडा रिकॉर्ड बजट के साथ बड़े विकास एजेंडे पर आगे बढ़ रहा है। इस वित्तीय वर्ष में कुल 11,811 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का अनुमान है। इनमें सबसे ज्यादा 8,000 करोड़ रुपये भूमि अधिग्रहण और खरीद पर खर्च होंगे। इसके अलावा 2,000 करोड़ रुपये विकास कार्यों पर, 502 करोड़ रुपये नोएडा एयरपोर्ट पर और 300 करोड़ रुपये कनेक्टिविटी पर खर्च किए जाएंगे।

यीडा क्षेत्र में बनेगा ट्रैफिक पार्क

यीडा क्षेत्र में सड़क सुरक्षा जागरूकता बढ़ाने के लिए एक आधुनिक ट्रैफिक पार्क भी विकसित किया जाएगा। इसका निर्माण मैसर्स होंडा फाउंडेशन के सहयोग से सीएसआर फंड के माध्यम से किया जाएगा। इसके लिए यीडा निशुल्क भूमि उपलब्ध कराएगा, हालांकि जमीन का स्वामित्व प्राधिकरण के पास ही रहेगा। इस ट्रैफिक पार्क में कृत्रिम सड़कें, ट्रैफिक सिग्नल, जेब्रा क्रॉसिंग और चौराहे तैयार किए जाएंगे, ताकि लोगों को वास्तविक यातायात परिस्थितियों जैसा अनुभव मिल सके। यहां नए चालकों, युवाओं और आम नागरिकों को सुरक्षित ड्राइविंग, सड़क अनुशासन और ट्रैफिक नियमों की ट्रेनिंग दी जाएगी। साथ ही मॉक ड्रिल और जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।

किस मद में कितना खर्च होगा

भूमि अधिग्रहण : 8000 करोड़ रुपये

विकास कार्य : 2000 करोड़ रुपये

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट : 502 करोड़ रुपये

कनेक्टिविटी परियोजनाएं : 300 करोड़ रुपये

क्या बोले यीडा के एसीईओ

यीडा के एसीईओ शैलेंद्र भाटिया के मुताबिक, यह प्राधिकरण के इतिहास का सबसे बड़ा बजट है। इसमें भूमि अधिग्रहण पर सबसे ज्यादा जोर दिया गया है, ताकि शहर की परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा सके और औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार हो। Yamuna City News

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