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उत्तर प्रदेश के जेवर में विकसित हो रहा जेवर एयरपोर्ट सिर्फ एक नया हवाई अड्डा नहीं, बल्कि आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और भारतीय सांस्कृतिक पहचान का अनोखा मेल बनकर सामने आ रहा है। दावा किया जा रहा है कि जेवर एयरपोर्ट देश के सबसे अत्याधुनिक एयरपोर्ट्स में शामिल होगा।

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Jewar Airport : उत्तर प्रदेश के जेवर में विकसित हो रहा जेवर एयरपोर्ट सिर्फ एक नया हवाई अड्डा नहीं, बल्कि आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और भारतीय सांस्कृतिक पहचान का अनोखा मेल बनकर सामने आ रहा है। दावा किया जा रहा है कि जेवर एयरपोर्ट देश के सबसे अत्याधुनिक एयरपोर्ट्स में शामिल होगा। यहां पहुंचने वाले यात्रियों को शुरुआत से ही ऐसा अनुभव मिलेगा, जिसमें तकनीक के साथ-साथ भारतीय परंपरा की झलक भी साफ दिखाई देगी। जेवर एयरपोर्ट के टर्मिनल परिसर को इस तरह तैयार किया गया है कि प्रवेश करते ही यात्रियों को वाराणसी और हरिद्वार के घाटों जैसी संरचना का एहसास हो। वहीं, भीतर का वातावरण भारतीय हवेली शैली से प्रेरित रखा गया है, ताकि एयरपोर्ट का अनुभव केवल यात्रा तक सीमित न रहकर सांस्कृतिक रूप से भी यादगार बने।
शुरुआत में जेवर एयरपोर्ट से देश के कई प्रमुख शहरों के लिए उड़ान सेवाएं शुरू किए जाने की तैयारी है। इनमें चंडीगढ़, हैदराबाद, बेंगलुरु, चेन्नई, मुंबई, लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर, अहमदाबाद और जयपुर जैसे शहर शामिल बताए जा रहे हैं। इससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर और आसपास के इलाकों के यात्रियों को बड़ा विकल्प मिलेगा। उम्मीद है कि जेवर एयरपोर्ट चालू होने के बाद क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूती मिलेगी और यात्रियों का दबाव अन्य एयरपोर्ट्स से भी कुछ हद तक कम होगा। प्रारंभिक चरण में जेवर एयरपोर्ट को हर साल करीब 50 लाख यात्रियों की आवाजाही संभालने के हिसाब से तैयार किया गया है। हालांकि, इसकी डिजाइनिंग भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर की गई है। बताया गया है कि एक रनवे के सहारे भी जेवर एयरपोर्ट को करीब 1.2 करोड़ यात्रियों की क्षमता तक विकसित किया जा सकता है। योजना के मुताबिक, जब यात्री क्षमता लगभग 80 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी, तब दूसरे रनवे और नए टर्मिनल के निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इस लिहाज से जेवर एयरपोर्ट को दीर्घकालिक विस्तार की सोच के साथ विकसित किया जा रहा है।
जेवर एयरपोर्ट की सबसे बड़ी विशेषताओं में उसका पर्यावरणीय दृष्टिकोण शामिल है। इसे शुरुआत से ही नेट-जीरो कार्बन एमिशन के लक्ष्य के साथ विकसित किया जा रहा है। यानी यह एयरपोर्ट केवल यात्री सुविधाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि टिकाऊ और हरित विकास के मॉडल के रूप में भी अपनी पहचान बनाएगा। इसके अलावा जेवर एयरपोर्ट में डिजी यात्रा और बायोमेट्रिक सिस्टम जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल यात्रियों के सफर को तेज, आसान और ज्यादा सुविधाजनक बनाने के लिए किया जाएगा। यही कारण है कि जेवर एयरपोर्ट को भविष्य के स्मार्ट एयरपोर्ट की श्रेणी में देखा जा रहा है।
जेवर एयरपोर्ट की वास्तुशिल्पीय बनावट उसे साधारण एयरपोर्ट्स से अलग पहचान देती है। इसके प्रवेश क्षेत्र को इस तरह विकसित किया गया है कि वहां पहुंचते ही वाराणसी और हरिद्वार के घाटों जैसी सीढ़ीनुमा संरचना का अहसास हो। यह डिजाइन केवल सौंदर्य तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत की गहरी छाप भी छोड़ती है। टर्मिनल के भीतर बनाया गया केंद्रीय प्रांगण पारंपरिक हवेली शैली से प्रेरित है, जो पूरे परिसर को खुलापन, गरिमा और भारतीय स्थापत्य का स्पर्श देता है। प्राकृतिक रोशनी और हवा के सहज प्रवाह को ध्यान में रखकर तैयार किया गया यह हिस्सा यात्रियों को सुकून भरा अनुभव देगा।
जेवर एयरपोर्ट की एक और खास बात यह है कि यहां बैठने की व्यवस्था में बांस से बने फर्नीचर का इस्तेमाल किया गया है। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण का संदेश जाता है, बल्कि एयरपोर्ट की थीम में भारतीयता और सस्टेनेबल डिजाइन का सुंदर मेल भी नजर आता है। वहीं, टर्मिनल की सफेद पारभासी छत और फर्श पर की गई विशेष प्रकाश व्यवस्था पूरे इंटीरियर को बहती नदी जैसा दृश्य प्रभाव देती है। यानी जेवर एयरपोर्ट सिर्फ यात्रा का केंद्र नहीं होगा, बल्कि ऐसा स्पेस बनेगा जहां आधुनिकता, परंपरा और दृश्य सौंदर्य एक साथ महसूस होंगे।
प्रस्तावित उद्घाटन कार्यक्रम से पहले जेवर एयरपोर्ट की तैयारियां तेज हो गई हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को जेवर एयरपोर्ट पहुंचकर कई घंटों तक व्यवस्थाओं की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ कार्यक्रम की रूपरेखा, सुरक्षा प्रबंधन, जनसभा की व्यवस्था और अन्य जरूरी पहलुओं पर चर्चा की। समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को जेवर एयरपोर्ट पर प्रस्तावित कार्यक्रम, सुरक्षा घेरा, संभावित भीड़ और बैठने की व्यवस्थाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने सभी तैयारियां तय समय के भीतर पूरा करने के निर्देश भी दिए।
28 मार्च को प्रस्तावित कार्यक्रम को देखते हुए जेवर एयरपोर्ट परिसर में बड़े स्तर पर व्यवस्थाएं की जा रही हैं। आम लोगों के प्रवेश के लिए अलग-अलग रास्ते तय किए गए हैं, जबकि वीवीआईपी और वीआईपी मेहमानों के लिए अलग मार्ग बनाया जाएगा। ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे से विशेष आवागमन की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। इसके अलावा जेवर एयरपोर्ट के आसपास पार्किंग की व्यवस्था की जा रही है। कार्यक्रम के दौरान शीर्ष अतिथियों की आवाजाही को ध्यान में रखते हुए कई हैलीपैड बनाए जाने की योजना है। इससे साफ है कि जेवर एयरपोर्ट का उद्घाटन कार्यक्रम प्रशासनिक और सुरक्षा दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जेवर एयरपोर्ट पश्चिमी उत्तर प्रदेश और यमुना एक्सप्रेस-वे क्षेत्र की आर्थिक तस्वीर बदलने में अहम भूमिका निभा सकता है। इससे न केवल यात्रा सुविधाएं बढ़ेंगी, बल्कि रोजगार, निवेश, लॉजिस्टिक्स, होटल, परिवहन और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों को भी गति मिलेगी। ऐसे में जेवर एयरपोर्ट को केवल एक एयर ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट के तौर पर नहीं, बल्कि क्षेत्रीय विकास के बड़े केंद्र के रूप में देखा जा रहा है। भारतीय संस्कृति की झलक, आधुनिक तकनीक, पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्धता और भविष्य की जरूरतों के हिसाब से तैयार की जा रही संरचना इसे खास बनाती है। Jewar Airport
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