उत्तर प्रदेश के जेवर में आकार ले रहा जेवर एयरपोर्ट सिर्फ एक नया हवाई अड्डा नहीं, बल्कि उत्तर भारत की बदलती कनेक्टिविटी का बड़ा प्रतीक बनता दिख रहा है। इसकी सबसे खास बात यह है कि इसे पारंपरिक एयरपोर्ट मॉडल से अलग सोच के साथ विकसित किया जा रहा है।

Jewar Airport : उत्तर प्रदेश के जेवर में आकार ले रहा जेवर एयरपोर्ट सिर्फ एक नया हवाई अड्डा नहीं, बल्कि उत्तर भारत की बदलती कनेक्टिविटी का बड़ा प्रतीक बनता दिख रहा है। इसकी सबसे खास बात यह है कि इसे पारंपरिक एयरपोर्ट मॉडल से अलग सोच के साथ विकसित किया जा रहा है। जहां आमतौर पर किसी एयरपोर्ट की पहुंच एक-दो मुख्य मार्गों तक सीमित रहती है, वहीं जेवर एयरपोर्ट को चार बड़े एक्सप्रेसवे और एक नेशनल हाईवे से सीधे जोड़ने की तैयारी इसे बेहद खास बना रही है। यही कारण है कि जेवर एयरपोर्ट को महज एक एविएशन प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि सड़क, रेल और शहरी परिवहन के संगम के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले वर्षों में मेट्रो, आरआरटीएस, नमो भारत, रेल कॉरिडोर और हाईस्पीड ट्रेन जैसी सुविधाएं भी इससे जुड़ती हैं, तो जेवर एयरपोर्ट दिल्ली-एनसीआर, पश्चिमी यूपी, उत्तराखंड और आसपास के राज्यों के लिए सबसे आधुनिक, तेज और सुविधाजनक यात्रा केंद्र बन सकता है।
फिलहाल जेवर एयरपोर्ट की सबसे मजबूत और मुख्य सड़क कनेक्टिविटी यमुना एक्सप्रेसवे से स्थापित हो चुकी है। इससे दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, मथुरा और आगरा की दिशा से आने वाले यात्रियों को सीधा लाभ मिल रहा है। यमुना एक्सप्रेसवे से जुड़ाव ने जेवर एयरपोर्ट की उपयोगिता को पहले ही काफी बढ़ा दिया है, लेकिन आगे बनने वाले नए लिंक इसे और अधिक प्रभावशाली बनाएंगे। जेवर एयरपोर्ट को और मजबूत सड़क नेटवर्क देने के लिए यमुना एक्सप्रेसवे को ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (केजीपी) से जोड़ने का काम तेज गति से चल रहा है। जगनपुर अफजलपुर गांव के पास यह लिंक विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना के तहत कुल आठ लूप बनाए जाएंगे, जिनकी कुल लंबाई करीब 6.6 किलोमीटर होगी। इसका निर्माण एनएचएआई के जिम्मे है। यह संपर्क तैयार होने के बाद गाजियाबाद, हापुड़ और मेरठ जैसे शहरों से आने वाले लोगों को बड़ा फायदा होगा। अभी इन इलाकों के यात्रियों को यमुना एक्सप्रेसवे तक पहुंचने के लिए लंबा रास्ता तय करना पड़ता है, लेकिन नई व्यवस्था के बाद वे ज्यादा सीधे और कम समय में जेवर एयरपोर्ट तक पहुंच सकेंगे। नई कनेक्टिविटी का असर केवल एनसीआर तक सीमित नहीं रहेगा। मथुरा और आगरा की ओर से आने वाले यात्रियों को भी राहत मिलेगी। फिलहाल कई वाहनों को पेरिफेरल एक्सप्रेसवे तक पहुंचने के लिए अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है, लेकिन लिंक बनने के बाद लगभग 20 किलोमीटर तक का चक्कर बच सकता है। इसका सीधा फायदा यह होगा कि जेवर एयरपोर्ट तक पहुंचने में समय कम लगेगा और ईंधन की भी बचत होगी।
जेवर एयरपोर्ट को राष्ट्रीय स्तर की सड़क कनेक्टिविटी देने के लिए इसे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जोड़ने का भी काम जारी है। भारतमाला परियोजना के तहत करीब 31 किलोमीटर लंबे छह लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का निर्माण हो रहा है। जेवर क्षेत्र का लगभग 7.3 किलोमीटर हिस्सा बनकर तैयार हो चुका है, जबकि हरियाणा की ओर का बड़ा भाग तेजी से निर्माणाधीन है।
इस संपर्क के बाद जेवर एयरपोर्ट केवल उत्तर प्रदेश का नहीं रहेगा, बल्कि हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली-मुंबई कॉरिडोर से जुड़े यात्रियों और कारोबारी गतिविधियों के लिए भी एक बड़ा केंद्र बन जाएगा। इससे यात्री परिवहन के साथ-साथ औद्योगिक और लॉजिस्टिक नेटवर्क को भी मजबूती मिलेगी।
जेवर एयरपोर्ट को माल ढुलाई के बड़े केंद्र के रूप में भी विकसित करने की दिशा में काम हो रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए यमुना एक्सप्रेसवे से एयर कार्गो टर्मिनल को जोड़ने वाली 8.25 किलोमीटर लंबी सड़क बनाई जा रही है। 30 मीटर चौड़ी इस सड़क का कैरिजवे 18 मीटर का रखा गया है। इससे कार्गो मूवमेंट तेज होगा और भविष्य में जेवर एयरपोर्ट देश के बड़े लॉजिस्टिक केंद्रों में शामिल हो सकता है।
जेवर एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी को और विस्तार देने के लिए इसे गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने की योजना भी तैयार की गई है। इसके लिए लगभग 74.3 किलोमीटर लंबे लिंक एक्सप्रेसवे का प्रस्ताव है। यह मार्ग बन जाने के बाद मेरठ, बुलंदशहर, मुरादाबाद समेत करीब 22 जिलों के लोगों को जेवर एयरपोर्ट तक सीधा सड़क संपर्क मिल सकेगा। इतना ही नहीं, उत्तराखंड से आने वाले यात्रियों के लिए भी यह एयरपोर्ट ज्यादा सुलभ हो जाएगा।
ग्रेटर नोएडा वेस्ट से सिरसा तक पहले से बनी सड़क को आगे यमुना क्षेत्र तक बढ़ाने की योजना पर भी काम चल रहा है। प्रस्तावित विस्तार के बाद यह सड़क जेवर एयरपोर्ट और कार्गो टर्मिनल के सामने से गुजरते हुए खुर्जा-पलवल एक्सप्रेसवे से जुड़ सकती है। इसके लिए बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण का प्रस्ताव भेजा जा चुका है। यह संपर्क बनने पर हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और एनसीआर के बीच यातायात का नया गलियारा तैयार होगा।
जेवर एयरपोर्ट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे केवल सड़क नेटवर्क तक सीमित नहीं रखा जा रहा। योजना है कि इसे दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा रेलमार्ग से भी जोड़ा जाए। इसके लिए चोला से रुंधी तक नई रेल लाइन बिछाने की तैयारी है। इसके अलावा गाजियाबाद आरआरटीएस से ग्रेटर नोएडा वेस्ट, परी चौक होते हुए जेवर एयरपोर्ट तक नमो भारत और मेट्रो सेवा प्रस्तावित है। अंतरराष्ट्रीय फिल्म सिटी से जेवर एयरपोर्ट तक लाइट रेल ट्रांजिट की भी योजना बनाई गई है। वहीं दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट से बेहतर संपर्क के लिए एयरोसिटी से कालिंदी कुंज तक मेट्रो विस्तार की दिशा में भी काम प्रस्तावित है। इन सभी योजनाओं का सीधा मतलब है कि आने वाले समय में जेवर एयरपोर्ट सड़क, रेल और शहरी परिवहन के लिहाज से एकीकृत मॉडल पेश करेगा। Jewar Airport