दिल्ली-एनसीआर की बढ़ती आबादी और हवाई यात्राओं के दबाव के बीच जेवर एयरपोर्ट उम्मीदों का सबसे बड़ा केंद्र बनकर सामने आया है। गौतमबुद्ध नगर में तैयार यह अत्याधुनिक एयरपोर्ट महज एक परिवहन सुविधा नहीं बल्कि विकास, निवेश और आधुनिक कनेक्टिविटी का नया प्रतीक बनता दिख रहा है।

Jewar Airport : दिल्ली-एनसीआर की बढ़ती आबादी और हवाई यात्राओं के दबाव के बीच जेवर एयरपोर्ट उम्मीदों का सबसे बड़ा केंद्र बनकर सामने आया है। गौतमबुद्ध नगर में तैयार यह अत्याधुनिक एयरपोर्ट महज एक परिवहन सुविधा नहीं बल्कि विकास, निवेश और आधुनिक कनेक्टिविटी का नया प्रतीक बनता दिख रहा है। उद्घाटन से पहले ही जेवर एयरपोर्ट को लेकर प्रशासनिक सक्रियता बढ़ गई है और सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व स्तर पर मजबूत किया जा रहा है। यह संकेत है कि जेवर एयरपोर्ट आने वाले समय में पूरे उत्तर भारत की आर्थिक दिशा बदलने में अहम भूमिका निभा सकता है।
जेवर एयरपोर्ट को हकीकत में बदलने के पीछे जिन प्रमुख चेहरों का नाम सामने आता है, उनमें क्रिस्टोफ श्नेलमान की भूमिका खास मानी जा रही है। एविएशन सेक्टर का लंबा अनुभव रखने वाले श्नेलमान को वर्ष 2020 में इस परियोजना की कमान सौंपी गई थी। इससे पहले वे Flughafen Zurich AG से जुड़े रहे, और यही समूह इस परियोजना के विकास और संचालन से भी संबंधित है। जेवर एयरपोर्ट का निर्माण यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड ने किया है, जो ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल की सहायक कंपनी है। यह साझेदारी बताती है कि जेवर एयरपोर्ट को केवल क्षेत्रीय सुविधा के रूप में नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मानकों वाले आधुनिक एयरो हब के रूप में विकसित किया गया है। क्रिस्टोफ श्नेलमान भारतीय एविएशन बाजार से अनजान नहीं रहे हैं। बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जुड़े अनुभव ने उन्हें भारतीय जरूरतों, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और बड़े ढांचागत प्रोजेक्ट्स की चुनौतियों को समझने में मदद दी। यही कारण रहा कि जेवर एयरपोर्ट जैसी विशाल परियोजना में उनके अनुभव का लाभ लिया गया। जमीन अधिग्रहण, महामारी के दौरान आई रुकावटें और समयबद्ध निर्माण जैसी अनेक चुनौतियों के बावजूद परियोजना को आगे बढ़ाना आसान नहीं था, लेकिन अब जेवर एयरपोर्ट संचालन के लिए तैयार खड़ा है।
दिल्ली-एनसीआर के यात्रियों के लिए जेवर एयरपोर्ट सबसे बड़ा विकल्प बनकर उभर रहा है। अभी तक बड़ी संख्या में यात्रियों को इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन जेवर एयरपोर्ट शुरू होने के बाद नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना प्राधिकरण क्षेत्र और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों को काफी राहत मिलेगी। इससे दिल्ली एयरपोर्ट पर दबाव कम होगा और क्षेत्रीय यात्री आवागमन ज्यादा संतुलित हो सकेगा। खासतौर पर उन लोगों के लिए जेवर एयरपोर्ट बेहद उपयोगी साबित होगा जिन्हें अब हवाई यात्रा के लिए दिल्ली तक लंबा सफर तय नहीं करना पड़ेगा। जेवर एयरपोर्ट के पहले चरण पर करीब 11,200 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। यह परियोजना पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर विकसित की गई है, जिससे यह साफ है कि सरकार और निजी क्षेत्र दोनों इसे दीर्घकालिक रणनीतिक निवेश के रूप में देख रहे हैं। जेवर एयरपोर्ट के जरिए सिर्फ हवाई यात्रा को सुविधा नहीं मिलेगी, बल्कि इसके आसपास औद्योगिक निवेश, वेयरहाउसिंग, होटल, ट्रांसपोर्ट, रियल एस्टेट और सर्विस सेक्टर में भी तेज़ी आने की संभावना है।
यात्रियों के लिए सबसे अहम सवाल यही है कि जेवर एयरपोर्ट से उड़ानें कौन-कौन सी कंपनियां संचालित करेंगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इंडिगो, अकासा एयर और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने यहां से सेवाएं शुरू करने को लेकर सहमति जताई है। इसके अलावा अन्य घरेलू और अंतरराष्ट्रीय एयरलाइनों तथा कार्गो ऑपरेटरों के साथ भी बातचीत जारी है। शुरुआती चरण में जेवर एयरपोर्ट से देश के 60 से 65 प्रमुख शहरों के लिए उड़ानें संचालित होने की संभावना बताई गई है। ऐसे में यह एयरपोर्ट जल्द ही यात्रियों के लिए एक बड़े हवाई नेटवर्क का हिस्सा बन सकता है। फ्लाइट ऑपरेशन शुरू करने से पहले सबसे अहम नियामकीय मंजूरियों में से एक एयरड्रोम लाइसेंस होती है, और जेवर एयरपोर्ट को यह लाइसेंस नागरिक उड्डयन महानिदेशालय से मिल चुका है। इसके साथ ही सुरक्षा संबंधी मंजूरी भी मिल गई है, जिससे घरेलू यात्रियों और घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय कार्गो गतिविधियों का रास्ता साफ हुआ है। यह संकेत है कि जेवर एयरपोर्ट अब केवल उद्घाटन की औपचारिकता नहीं, बल्कि वास्तविक ऑपरेशन की ओर बढ़ चुका है। इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिहाज से भी जेवर एयरपोर्ट को अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ तैयार किया गया है। यहां 3900 मीटर लंबा रनवे बनाया गया है, जिस पर बड़े विमानों की लैंडिंग संभव होगी। इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम और उन्नत लाइटिंग व्यवस्था जैसी तकनीकी सुविधाएं इसे दिन-रात और अलग-अलग मौसम परिस्थितियों में सुरक्षित संचालन के योग्य बनाती हैं। यही वजह है कि जेवर एयरपोर्ट को उत्तर भारत के सबसे आधुनिक एयरपोर्ट्स में गिना जा रहा है।
जेवर एयरपोर्ट की सबसे बड़ी खासियत यह भी है कि इसे केवल यात्री उड़ानों तक सीमित नहीं रखा गया है। यहां मल्टी-मोडल कार्गो और लॉजिस्टिक्स जोन की व्यवस्था की गई है, जिसकी शुरुआती क्षमता सालाना 2.5 लाख मीट्रिक टन से अधिक कार्गो संभालने की है। भविष्य में इसे 18 लाख मीट्रिक टन तक बढ़ाया जा सकता है। साथ ही 40 एकड़ क्षेत्र में एमआरओ सुविधा भी विकसित की गई है, जहां विमानों की मरम्मत और तकनीकी देखभाल की जा सकेगी। इस तरह जेवर एयरपोर्ट उत्तर भारत के एविएशन इकोसिस्टम को नई औद्योगिक ताकत दे सकता है। एक और दिलचस्प पहलू यह है कि जेवर एयरपोर्ट के डिजाइन में भारतीय सांस्कृतिक तत्वों को भी जगह दी गई है। इसकी वास्तु शैली में घाटों और हवेलियों जैसी पारंपरिक झलक को आधुनिक स्वरूप में शामिल किया गया है। इसका मतलब यह है कि जेवर एयरपोर्ट सिर्फ तकनीक और सुविधा का प्रतीक नहीं, बल्कि पहचान और प्रस्तुति का भी नया केंद्र बनने जा रहा है।
फिलहाल जेवर एयरपोर्ट तक पहुंचने का सबसे व्यावहारिक और तेज़ तरीका सड़क मार्ग ही माना जा रहा है। दिल्ली से आने वाले यात्रियों के लिए नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे और उसके बाद यमुना एक्सप्रेसवे सबसे सीधा रास्ता है। ट्रैफिक के आधार पर दिल्ली से जेवर एयरपोर्ट पहुंचने में लगभग 60 से 90 मिनट या उससे अधिक समय लग सकता है। वहीं नोएडा से यात्रा करने वालों के लिए यह दूरी अपेक्षाकृत कम होगी और वे लगभग 45 से 60 मिनट में जेवर एयरपोर्ट पहुंच सकते हैं। ग्रेटर नोएडा से यह सफर और भी आसान बताया जा रहा है, जहां से यमुना एक्सप्रेसवे के जरिए 30 से 45 मिनट में एयरपोर्ट तक पहुंचा जा सकता है। भविष्य में मेट्रो कनेक्टिविटी जुड़ने के बाद जेवर एयरपोर्ट की पहुंच और मजबूत होगी। Jewar Airport