जेवर की बेटी अंतरा कुमारी ने खेती में ऐसा अनोखा प्रयोग किया, जिसने गांव में चर्चा छेड़ दी। 2500 वर्गमीटर में आखिर उन्होंने ऐसा क्या तैयार किया कि खेती का पूरा अंदाज ही बदल गया ? सरकारी मदद ने इस प्रयोग को कैसे रफ्तार दी और पॉलीहाउस में ऐसा क्या खास है ?

Jewar News : खेती को केवल परंपरा के भरोसे करने के बजाय आधुनिक तकनीक से जोड़ने का जज्बा हो तो खेत में बदलाव की नई कहानी लिखी जा सकती है। जेवर क्षेत्र के दनकौर विकासखंड के सरकपुर गांव की महिला कृषक अंतरा कुमारी ने इसी सोच को जमीन पर उतारने का प्रयास किया है। सरकारी योजना के सहयोग से उन्होंने 2,500 वर्गमीटर क्षेत्र में पॉलीहाउस स्थापित कर संरक्षित खेती शुरू की है। पॉलीहाउस में विभिन्न प्रकार की सब्जियों की खेती की जा रही है।अंतरा कुमारी की कहानी सिर्फ एक महिला किसान के आधुनिक खेती अपनाने की कहानी नहीं है, बल्कि यह बताती है कि सरकारी योजनाओं का लाभ जब किसान की मेहनत और नई सोच से जुड़ता है तो खेती में नए अवसर पैदा हो सकते हैं। Jewar News
खेती में मौसम की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रही है। खुले खेत में बारिश, तापमान, तेज गर्मी और अन्य मौसमी परिस्थितियों का सीधा असर फसल पर पड़ सकता है। ऐसे में संरक्षित खेती किसानों को नियंत्रित और व्यवस्थित तरीके से उत्पादन करने का विकल्प देती है।सरकपुर की अंतरा कुमारी ने भी इसी दिशा में कदम बढ़ाया। उन्होंने अपनी कृषि भूमि पर पॉलीहाउस स्थापित कराया और इसके भीतर अलग-अलग सब्जियों की खेती शुरू की। आधुनिक तकनीक को अपनाने का यह फैसला उनके लिए खेती के पारंपरिक तरीके से आगे बढ़ने की शुरुआत बना। Jewar News
अंतरा कुमारी ने 2,500 वर्गमीटर क्षेत्रफल में पॉलीहाउस तैयार कराया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार परियोजना की कुल लागत करीब 40 लाख रुपये है। इसमें लगभग 20 लाख रुपये कृषक अंश है, जबकि करीब 20 लाख रुपये का अनुदान उद्यान विभाग के माध्यम सेदिया जा रहा है। यानी परियोजना लागत का लगभग 50 प्रतिशत सरकारी सहयोग से पूरा हुआ।सरकारी सहायता ने अंतरा के लिए आधुनिक कृषि तकनीक को अपनाने का रास्ता आसान किया। इसके बाद उन्होंने पॉलीहाउस में विभिन्न सब्जियों की संरक्षित खेती शुरू की। Jewar News
आज सरकपुर गांव में अंतरा कुमारी का पॉलीहाउस आधुनिक खेती की ओर बढ़ते ग्रामीण क्षेत्र की तस्वीर पेश कर रहा है। इसके भीतर विभिन्न प्रकार की सब्जियों की खेती की जा रही है।संरक्षित खेती का उद्देश्य फसल को प्रतिकूल मौसम के सीधे प्रभाव से बचाते हुए उत्पादन को अधिक व्यवस्थित तरीके से करना है। अंतरा ने इसी तकनीक को अपनी खेती से जोड़कर एक नया प्रयोग शुरू किया है। Jewar News
अंतरा कुमारी की पहल का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि उन्होंने एक महिला कृषक के रूप में आधुनिक तकनीक को अपनाने का निर्णय लिया। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं लंबे समय से कृषि गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही हैं, लेकिन आधुनिक कृषि उद्यमिता में उनकी भागीदारी बढ़ना खेती के बदलते स्वरूप की ओर संकेत करता है।अंतरा की कहानी यह संदेश देती है कि खेती केवल पारंपरिक फसलों और पुराने तरीकों तक सीमित नहीं है। सरकारी योजनाओं की जानकारी, तकनीक का इस्तेमाल और मेहनत के साथ किसान खेती को नए व्यवसायिक अवसर में बदलने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। Jewar News
जेवर क्षेत्र की पहचान तेजी से बदल रही है। जेवर एयरपोर्ट के कारण इस पूरे क्षेत्र में आर्थिक और व्यावसायिक गतिविधियों की चर्चा लगातार बढ़ी है। ऐसे समय में दनकौर के सरकपुर गांव की अंतरा कुमारी का आधुनिक तकनीक आधारित कृषि मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था के दूसरे पहलू को सामने रखता है।एक तरफ क्षेत्र में औद्योगिक और बुनियादी ढांचे से जुड़े बदलाव हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ गांवों के किसान भी खेती के नए तरीकों को अपना रहे हैं। अंतरा कुमारी का पॉलीहाउस इसी बदलते जेवर क्षेत्र की एक छोटी लेकिन महत्वपूर्ण तस्वीर है। Jewar News
अंतरा कुमारी की कहानी में सबसे महत्वपूर्ण बात उनका नई तकनीक को अपनाने का साहस है। 2,500 वर्गमीटर में तैयार पॉलीहाउस उनके लिए सिर्फ खेती की संरचना नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है।सरकारी योजना से मिले सहयोग और अपनी मेहनत के सहारे अंतरा ने संरक्षित खेती की राह चुनी है। अब उनके खेत में अलग-अलग सब्जियों की खेती हो रही है और आधुनिक कृषि तकनीक के साथ आगे बढ़ने की कोशिश जारी है।सरकपुर की अंतरा कुमारी की कहानी बताती है कि किसान जब सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर तकनीक से जुड़ता है, तो खेत में सिर्फ फसल नहीं बदलतीखेती को देखने का नजरिया भी बदल सकता है। Jewar News
विज्ञापन