जेवर एयरपोर्ट के आसपास तेजी से बढ़ती जमीन की मांग अब ठगों के लिए कमाई का नया जरिया बनती जा रही है। यमुना सिटी में आवासीय भूखंड दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी का बड़ा मामला सामने आया है।

Jewar News : जेवर एयरपोर्ट के आसपास तेजी से बढ़ती जमीन की मांग अब ठगों के लिए कमाई का नया जरिया बनती जा रही है। यमुना सिटी में आवासीय भूखंड दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी का बड़ा मामला सामने आया है। इस मामले में देहरादून निवासी एक व्यक्ति ने खुद के साथ लाखों रुपये की धोखाधड़ी और करीब 400 अन्य लोगों से भारी रकम वसूलने का आरोप लगाया है। कोर्ट के आदेश पर फेज-1 थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोप है कि इस पूरे खेल में लोगों को जेवर एयरपोर्ट और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में जमीन दिलाने का सपना दिखाकर जाल में फंसाया गया। पीड़ित का कहना है कि जेवर एयरपोर्ट परियोजना के बाद यमुना एक्सप्रेसवे और उसके आसपास जमीन खरीदने को लेकर लोगों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ी है। इसी उत्साह का फायदा उठाकर कुछ लोगों ने खुद को अधिकृत कंपनी प्रतिनिधि बताकर निवेशकों से रकम ऐंठनी शुरू कर दी। शुरुआती जांच और शिकायत के आधार पर यह मामला अब बड़े फर्जीवाड़े के तौर पर देखा जा रहा है।
शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि वह नोएडा की एक निजी कंपनी में नौकरी करते हैं। वर्ष 2024 में सेक्टर-2 स्थित एक कंपनी के प्रचार कैंप के जरिए उनसे संपर्क किया गया। वहां मौजूद लोगों ने दावा किया कि उनकी कंपनी यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र में विकसित आवासीय भूखंड उपलब्ध करा रही है। चूंकि उस समय जेवर एयरपोर्ट के कारण इस पूरे इलाके की चर्चा तेजी से बढ़ रही थी, इसलिए उन्हें यह प्रस्ताव भरोसेमंद लगा। इसके बाद शिकायतकर्ता को कंपनी कार्यालय बुलाया गया, जहां कुछ लोगों ने खुद को कंपनी से जुड़ा बताते हुए कई नक्शे, दस्तावेज और भूखंड से जुड़ी योजनाएं दिखाईं। आरोप है कि इन लोगों ने यह विश्वास दिलाया कि जमीन प्राधिकरण से जुड़ी स्वीकृत परियोजना का हिस्सा है और जल्द ही वहां विकसित प्लॉट सौंप दिए जाएंगे। इसी भरोसे में शिकायतकर्ता से पहले टोकन राशि ली गई और फिर धीरे-धीरे लाखों रुपये जमा करा लिए गए।
पीड़ित के अनुसार, आरोपियों ने उन्हें जो दस्तावेज और नक्शे दिखाए, वे पहली नजर में पूरी तरह वैध लगे। यही वजह रही कि उन्होंने रकम देने में देर नहीं की। बताया गया कि जेवर एयरपोर्ट के प्रभाव वाले इलाके में यह जमीन भविष्य में बहुत महंगी हो जाएगी और अभी निवेश करने पर बड़ा फायदा मिल सकता है। इसी लालच और भरोसे के बीच उनसे कई किश्तों में बड़ी रकम ली गई। मामला तब गहराया जब आरोपियों ने उन्हें जमीन का एक टुकड़ा दिखाया और अपने एक सहयोगी के जरिए उसका बैनामा भी करा दिया। लेकिन जब शिकायतकर्ता ने विकसित प्लॉट की मांग की, तो उन्हें लगातार टालमटोल का सामना करना पड़ा। बाद में जब जमीन की वास्तविक स्थिति की जांच कराई गई, तो पता चला कि दिखाई गई जमीन वैसी नहीं थी जैसी बताई गई थी। इससे पूरे सौदे पर संदेह गहरा गया।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि जब उन्होंने जमीन की प्रकृति और कागजात की पड़ताल कराई, तो पता चला कि मामला संदिग्ध है। इसके बाद उन्होंने आरोपियों से अपनी रकम वापस मांगी। आरोप है कि इसी दौरान उनके साथ अभद्रता की गई और धमकी भी दी गई। इस पूरे घटनाक्रम ने साफ कर दिया कि जेवर एयरपोर्ट और यमुना सिटी के नाम पर लोगों को सुनियोजित तरीके से फंसाया जा रहा था। पीड़ित ने यह भी दावा किया है कि वह अकेले शिकार नहीं हुए। उनके मुताबिक, कई अन्य लोगों से भी इसी तरह प्लॉट दिलाने का भरोसा देकर रकम वसूली गई। आरोप है कि यह खेल छोटे स्तर का नहीं, बल्कि बड़े नेटवर्क के जरिए चलाया गया, जिसमें सैकड़ों लोगों को निशाना बनाया गया।
शिकायत में कहा गया है कि इस गिरोह ने सिर्फ एक-दो लोगों को नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में निवेशकों को फंसाया। आरोप है कि करीब 400 लोगों से भूखंड दिलाने के नाम पर लगभग 40 करोड़ रुपये वसूले गए। कुछ अन्य पीड़ितों के नाम भी सामने आए हैं, जिनसे अलग-अलग रकम लेने का आरोप लगाया गया है। जब पीड़ित कंपनी के दफ्तर पहुंचे, तो वहां कोई नहीं मिला। इस तरह के मामलों से यह साफ होता है कि जेवर एयरपोर्ट के आसपास तेजी से बढ़ते रियल एस्टेट आकर्षण का फायदा उठाकर ठगी का जाल फैलाया जा रहा है। जमीन खरीदने वाले लोग ऊंचे रिटर्न और भविष्य की कीमतों के लालच में बिना पूरी जांच-पड़ताल किए रकम लगा दे रहे हैं, और यही लापरवाही ठगों के लिए मौका बन रही है।
स्थानीय स्तर पर लंबे समय से यह देखा जा रहा है कि जेवर एयरपोर्ट के बाद आसपास के इलाकों में जमीन की मांग तेजी से बढ़ी है। इसके साथ ही प्लॉटिंग, निवेश और रियल एस्टेट के नाम पर धोखाधड़ी की घटनाएं भी बढ़ी हैं। फर्जी वेबसाइट, सोशल मीडिया विज्ञापन, नकली ब्रोशर और बनावटी कागजात के जरिए लोगों को सस्ती जमीन और बड़े मुनाफे का सपना दिखाया जा रहा है। कई मामलों में ग्राम समाज की जमीन, विवादित भूखंड या ऐसे भू-भाग भी बेचे जाने की कोशिश की जा रही है, जिन पर कानूनी अड़चनें हैं। आम निवेशक को यह समझ नहीं आता कि जो जमीन दिखाई जा रही है, उसकी वास्तविक स्थिति क्या है और वह किस प्राधिकरण के रिकॉर्ड में दर्ज है। इसी भ्रम का फायदा उठाकर ठग बड़ी रकम बटोर रहे हैं।
जमीन से जुड़े ऐसे मामलों पर लगाम लगाने के लिए यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने भी हाल के समय में कई कदम उठाए हैं। रिकॉर्ड दुरुस्त करने, जमीन के स्वामित्व को स्पष्ट करने और सरकारी दस्तावेजों में नाम दर्ज कराने जैसी प्रक्रिया तेज की गई है। इसका मकसद यह है कि जेवर एयरपोर्ट के असर वाले क्षेत्र में जमीन को लेकर होने वाले फर्जी सौदों पर रोक लगाई जा सके। प्राधिकरण की कोशिश है कि सरकारी रिकॉर्ड मजबूत हो, ताकि किसी जमीन को बैंक में गिरवी रखने, दोबारा बेचने या फर्जी तरीके से सौदा करने जैसी गतिविधियों पर रोक लग सके। हालांकि जमीन के दामों में तेज उछाल और निवेशकों की बढ़ती रुचि के कारण ठग लगातार नए तरीके अपनाने की कोशिश कर रहे हैं।
यह पहला मौका नहीं है जब जेवर एयरपोर्ट या यमुना सिटी के नाम पर जमीन ठगी की शिकायत सामने आई हो। इससे पहले भी ऐसे कई मामले दर्ज हो चुके हैं, जिनमें लोगों को विकसित प्लॉट, रेजिडेंशियल स्कीम या भविष्य के निवेश का लालच देकर करोड़ों रुपये की ठगी की गई। कुछ मामलों में पुलिस कार्रवाई कर चुकी है और कई आरोपियों की गिरफ्तारी भी हुई है। Jewar News