जेवर एयरपोर्ट को मिलेगा सुपरफास्ट कनेक्शन, दिल्ली से दूरी होगी कम
इसी सिलसिले में मंगलवार को नेशनल हाईस्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) की टीम यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) पहुंची, जहां एयरपोर्ट क्षेत्र के इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टेशन एलाइनमेंट और परियोजना की व्यवहारिकता पर विस्तृत मंथन किया गया।

Jewar Airport : जेवर एयरपोर्ट को देश के हाईस्पीड रेल नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में बड़ी प्रगति होती दिख रही है। दिल्ली से वाराणसी तक प्रस्तावित हाईस्पीड ट्रेन कॉरिडोर में जेवर एयरपोर्ट को शामिल करने की कवायद तेज हो गई है। इसी सिलसिले में मंगलवार को नेशनल हाईस्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) की टीम यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) पहुंची, जहां एयरपोर्ट क्षेत्र के इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टेशन एलाइनमेंट और परियोजना की व्यवहारिकता पर विस्तृत मंथन किया गया। यह पहल इसलिए भी बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि जेवर एयरपोर्ट को केवल एक हवाई अड्डे के रूप में नहीं, बल्कि मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी वाले बड़े ट्रांसपोर्ट हब के रूप में विकसित किया जा रहा है।
गौतमबुद्ध नगर में बन सकते हैं दो हाईस्पीड स्टेशन
प्राधिकरण स्तर पर हुई चर्चा के अनुसार, दिल्ली-वाराणसी हाईस्पीड ट्रेन परियोजना के तहत गौतमबुद्ध नगर में दो स्टेशन प्रस्तावित हैं। पहला स्टेशन नोएडा के सेक्टर-148 में विकसित किए जाने की योजना है, जबकि दूसरा स्टेशन सीधे जेवर एयरपोर्ट के ग्राउंड ट्रांसपोर्टेशन सेंटर (GTC) में भूमिगत बनाया जाएगा। यह प्रस्ताव जेवर एयरपोर्ट की रणनीतिक महत्ता को और मजबूत करता है। बीते फरवरी में केंद्रीय बजट में इस रूट को लेकर सहमति मिलने के बाद अब इसे तकनीकी और संरचनात्मक स्तर पर आगे बढ़ाया जा रहा है।
एलाइनमेंट और एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुई विस्तार से चर्चा
मंगलवार को NHSRCL के वरिष्ठ अधिकारियों ने YEIDA के अधिकारियों के साथ बैठक में परियोजना के एलाइनमेंट पर गहन चर्चा की। इस दौरान एयरपोर्ट परिसर और आसपास विकसित किए जा रहे बुनियादी ढांचे की जानकारी साझा की गई, ताकि हाईस्पीड ट्रेन का प्रस्तावित स्टेशन भविष्य की किसी अन्य परियोजना में बाधा न बने। अधिकारियों का फोकस इस बात पर रहा कि जेवर एयरपोर्ट में बनने वाले भूमिगत स्टेशन को डीपीआर का हिस्सा इस तरह बनाया जाए, जिससे यात्रियों को निर्बाध और आधुनिक कनेक्टिविटी मिल सके।
जेवर एयरपोर्ट को मिलेगा बड़ा कनेक्टिविटी बूस्ट
जेवर में बन रहा जेवर एयरपोर्ट पहले से ही सड़क, रेल और मेट्रो आधारित कई बड़ी योजनाओं के केंद्र में है। एयरपोर्ट को मेट्रो, नमो भारत, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, यमुना एक्सप्रेसवे, यमुना-गंगा एक्सप्रेसवे, एनएच-34, एनएच-91 और ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेसवे जैसे प्रमुख मार्गों से जोड़ने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है। कई कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स पर काम आगे बढ़ चुका है, जबकि कुछ के रूट और स्टेशन पहले ही तय किए जा चुके हैं। ऐसे में हाईस्पीड ट्रेन का प्रस्ताव जेवर एयरपोर्ट को उत्तर भारत के सबसे बेहतर तरीके से कनेक्टेड एयरपोर्ट्स में शामिल कर सकता है। परियोजना से जुड़े दावों के मुताबिक, हाईस्पीड ट्रेन शुरू होने के बाद दिल्ली के सराय काले खां से जेवर एयरपोर्ट तक करीब 70 किलोमीटर की दूरी सिर्फ 21 मिनट में पूरी की जा सकेगी। यह समय NCR के यात्रियों के लिए यात्रा अनुभव को पूरी तरह बदल सकता है। बताया जा रहा है कि हाईस्पीड रेल ट्रैक नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के मध्य हिस्से पर एलिवेटेड स्ट्रक्चर में विकसित किया जाएगा। इसके बाद यह कॉरिडोर यमुना एक्सप्रेसवे के रास्ते आगे बढ़ते हुए नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के GTC तक पहुंचेगा।
देश का अनोखा एयरपोर्ट मॉडल बन सकता है जेवर
यदि यह योजना तय समयसीमा में आगे बढ़ती है, तो जेवर एयरपोर्ट हाईस्पीड ट्रेन से सीधे जुड़ने वाला देश के चुनिंदा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट्स में शुमार हो सकता है। इससे यात्रियों को एयर, रेल और रोड—तीनों माध्यमों से एकीकृत आवागमन की सुविधा मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे जेवर एयरपोर्ट की उपयोगिता, यात्री संख्या और निवेश आकर्षण तीनों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है। यही वजह है कि इस परियोजना को केवल परिवहन विस्तार नहीं, बल्कि NCR के भविष्य के इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल के रूप में भी देखा जा रहा है। Jewar Airport
Jewar Airport : जेवर एयरपोर्ट को देश के हाईस्पीड रेल नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में बड़ी प्रगति होती दिख रही है। दिल्ली से वाराणसी तक प्रस्तावित हाईस्पीड ट्रेन कॉरिडोर में जेवर एयरपोर्ट को शामिल करने की कवायद तेज हो गई है। इसी सिलसिले में मंगलवार को नेशनल हाईस्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) की टीम यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) पहुंची, जहां एयरपोर्ट क्षेत्र के इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टेशन एलाइनमेंट और परियोजना की व्यवहारिकता पर विस्तृत मंथन किया गया। यह पहल इसलिए भी बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि जेवर एयरपोर्ट को केवल एक हवाई अड्डे के रूप में नहीं, बल्कि मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी वाले बड़े ट्रांसपोर्ट हब के रूप में विकसित किया जा रहा है।
गौतमबुद्ध नगर में बन सकते हैं दो हाईस्पीड स्टेशन
प्राधिकरण स्तर पर हुई चर्चा के अनुसार, दिल्ली-वाराणसी हाईस्पीड ट्रेन परियोजना के तहत गौतमबुद्ध नगर में दो स्टेशन प्रस्तावित हैं। पहला स्टेशन नोएडा के सेक्टर-148 में विकसित किए जाने की योजना है, जबकि दूसरा स्टेशन सीधे जेवर एयरपोर्ट के ग्राउंड ट्रांसपोर्टेशन सेंटर (GTC) में भूमिगत बनाया जाएगा। यह प्रस्ताव जेवर एयरपोर्ट की रणनीतिक महत्ता को और मजबूत करता है। बीते फरवरी में केंद्रीय बजट में इस रूट को लेकर सहमति मिलने के बाद अब इसे तकनीकी और संरचनात्मक स्तर पर आगे बढ़ाया जा रहा है।
एलाइनमेंट और एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुई विस्तार से चर्चा
मंगलवार को NHSRCL के वरिष्ठ अधिकारियों ने YEIDA के अधिकारियों के साथ बैठक में परियोजना के एलाइनमेंट पर गहन चर्चा की। इस दौरान एयरपोर्ट परिसर और आसपास विकसित किए जा रहे बुनियादी ढांचे की जानकारी साझा की गई, ताकि हाईस्पीड ट्रेन का प्रस्तावित स्टेशन भविष्य की किसी अन्य परियोजना में बाधा न बने। अधिकारियों का फोकस इस बात पर रहा कि जेवर एयरपोर्ट में बनने वाले भूमिगत स्टेशन को डीपीआर का हिस्सा इस तरह बनाया जाए, जिससे यात्रियों को निर्बाध और आधुनिक कनेक्टिविटी मिल सके।
जेवर एयरपोर्ट को मिलेगा बड़ा कनेक्टिविटी बूस्ट
जेवर में बन रहा जेवर एयरपोर्ट पहले से ही सड़क, रेल और मेट्रो आधारित कई बड़ी योजनाओं के केंद्र में है। एयरपोर्ट को मेट्रो, नमो भारत, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, यमुना एक्सप्रेसवे, यमुना-गंगा एक्सप्रेसवे, एनएच-34, एनएच-91 और ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेसवे जैसे प्रमुख मार्गों से जोड़ने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है। कई कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स पर काम आगे बढ़ चुका है, जबकि कुछ के रूट और स्टेशन पहले ही तय किए जा चुके हैं। ऐसे में हाईस्पीड ट्रेन का प्रस्ताव जेवर एयरपोर्ट को उत्तर भारत के सबसे बेहतर तरीके से कनेक्टेड एयरपोर्ट्स में शामिल कर सकता है। परियोजना से जुड़े दावों के मुताबिक, हाईस्पीड ट्रेन शुरू होने के बाद दिल्ली के सराय काले खां से जेवर एयरपोर्ट तक करीब 70 किलोमीटर की दूरी सिर्फ 21 मिनट में पूरी की जा सकेगी। यह समय NCR के यात्रियों के लिए यात्रा अनुभव को पूरी तरह बदल सकता है। बताया जा रहा है कि हाईस्पीड रेल ट्रैक नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के मध्य हिस्से पर एलिवेटेड स्ट्रक्चर में विकसित किया जाएगा। इसके बाद यह कॉरिडोर यमुना एक्सप्रेसवे के रास्ते आगे बढ़ते हुए नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के GTC तक पहुंचेगा।
देश का अनोखा एयरपोर्ट मॉडल बन सकता है जेवर
यदि यह योजना तय समयसीमा में आगे बढ़ती है, तो जेवर एयरपोर्ट हाईस्पीड ट्रेन से सीधे जुड़ने वाला देश के चुनिंदा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट्स में शुमार हो सकता है। इससे यात्रियों को एयर, रेल और रोड—तीनों माध्यमों से एकीकृत आवागमन की सुविधा मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे जेवर एयरपोर्ट की उपयोगिता, यात्री संख्या और निवेश आकर्षण तीनों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है। यही वजह है कि इस परियोजना को केवल परिवहन विस्तार नहीं, बल्कि NCR के भविष्य के इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल के रूप में भी देखा जा रहा है। Jewar Airport












