महाराष्ट्र: नागपुर में मथानी टोल पर करोड़ों गांजा बरामद

पुलिस ने टोल बूथ से कुछ दूरी पर आर्यन रेस्टोरेंट ढाबे के पास एक 12 पहियों वाला ट्रक (नंबर WB 23 B 7992) को संदिग्ध अवस्था में खड़े होते देखा। पुलिस ने तत्काल घेराबंदी करते हुए ट्रक को अपने कब्जे में लिया और चालक से पूछताछ शुरू की।

Nagpur Rural Police
खुफिया सूचना पर पुलिस को मिली सफलता (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar24 Feb 2026 02:48 PM
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Nagpur Crime News: नागपुर रूरल पुलिस और एनडीपीएस (NDPS) टीम ने मादक पदार्थ तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए मथानी टोल प्लाजा के पास से 505 किलोग्राम से अधिक गांजा बरामद किया है। बाजार में इस जब्त गांजे की अनुमानित कीमत करीब 2 करोड़ 72 लाख रुपये बताई जा रही है। पुलिस ने इस संबंध में एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।

खुफिया सूचना पर की गई कार्रवाई

पुलिस सूत्रों के अनुसार, 24 फरवरी की सुबह लगभग 5 बजे एनडीपीएस टीम को खुफिया सूचना मिली थी कि ओडिशा के संबलपुर से मुंबई भेजी जा रही एक बड़ी खेप गांजा की नागपुर के रास्ते से गुजरने वाली है। सूचना के आधार पर नागपुर रूरल पुलिस और एनडीपीएस टीम ने मौदा पुलिस स्टेशन क्षेत्र में मथानी टोल प्लाजा के पास फंसाना बिछाया।

ट्रक में छिपाया गया था गांजा

पुलिस ने टोल बूथ से कुछ दूरी पर आर्यन रेस्टोरेंट ढाबे के पास एक 12 पहियों वाला ट्रक (नंबर WB 23 B 7992) को संदिग्ध अवस्था में खड़े होते देखा। पुलिस ने तत्काल घेराबंदी करते हुए ट्रक को अपने कब्जे में लिया और चालक से पूछताछ शुरू की।

चालक का झूठ पकड़ा गया

पकड़े गए चालक की पहचान संजय यादव के रूप में हुई है। प्रारंभिक पूछताछ में उसने दावा किया कि वह ओडिशा के संबलपुर से मुंबई जा रहा है और ट्रक में लोहा (Iron) लदा हुआ है। हालांकि, पुलिस को उसके जवाब पर संदेह हुआ और ट्रक की सघन तलाशी शुरू कर दी गई। तलाशी के दौरान पुलिस को बड़ी सफलता मिली और ट्रक में रखी 20 बोरियों से करीब 505 किलो गांजा बरामद हुआ। पुलिस ने मौके पर ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया और मादक पदार्थ जब्त कर लिया।

अंतरराज्यीय गिरोह का शक

पुलिस उप-निरीक्षक शिवाजी तिपुरने ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि गांजा ओडिशा के संबलपुर से लोड किया गया था और इसे मुंबई पहुंचाया जाना था। अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि मुंबई में इतनी बड़ी मात्रा में यह खेप किसे सौंपी जानी थी। पुलिस को शक है कि इस तस्करी में एक बड़ा अंतरराज्यीय नेटवर्क सक्रिय है, जिसमें कई अन्य लोगों की भूमिका हो सकती है। Nagpur Crime News

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ब्यूटीशियन का सहेली ने भाई से करवाया रेप, फिर धर्म परिवर्तन का बनाया दवाब

भोपाल से एक गंभीर आपराधिक मामला सामने आया है, जिसमें एक ब्यूटीशियन ने अपने साथ नशीला पदार्थ देकर दुष्कर्म किए जाने और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया है। पुलिस ने शिकायत दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

dushkarm
धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने का आरोप
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar24 Feb 2026 02:29 PM
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Religion Change : मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से एक गंभीर आपराधिक मामला सामने आया है, जिसमें एक ब्यूटीशियन ने अपने साथ नशीला पदार्थ देकर दुष्कर्म किए जाने और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया है। पुलिस ने शिकायत दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। पीड़िता, जो मूल रूप से छत्तीसगढ़ की रहने वाली बताई जा रही है, ने शिकायत में कहा कि वह भोपाल में रहकर काम कर रही थी। इसी दौरान उसकी पहचान एक युवती अमरीन से हुई, जिसके साथ वह रूम पार्टनर के तौर पर रहने लगी। आरोप है कि अमरीन उसे पार्टी और पब में ले जाती थी तथा वहां अन्य लोगों से मेलजोल बढ़ाने के लिए दबाव बनाती थी। 

धर्म परिवर्तन का दबाव

शिकायत के अनुसार, एक अवसर पर उसे पेय पदार्थ में नशीला तत्व मिलाकर दिया गया, जिसके बाद वह अचेत हो गई। पीड़िता का आरोप है कि इसी दौरान अमरीन के भाई समेत अन्य लोगों ने उसके साथ दुष्कर्म किया। मामले में बिलाल सहित कुछ अन्य व्यक्तियों के नाम भी सामने आए हैं। पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया है कि घटना के बाद उस पर एक विशेष धर्म अपनाने के लिए मानसिक दबाव बनाया गया। उसने कहा कि यदि वह बात नहीं मानेगी तो उसे नुकसान पहुंचाने की धमकी दी जाती थी।

पुलिस कार्रवाई

भोपाल पुलिस ने पीड़िता की शिकायत के आधार पर दुष्कर्म, आपराधिक साजिश, नशीला पदार्थ देने और जबरन धर्म परिवर्तन के दबाव से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। एक आरोपी को हिरासत में लिए जाने की सूचना है, जबकि अन्य की तलाश जारी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह मामला फिलहाल जांच के अधीन है। आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण न्यायालय की प्रक्रिया के बाद ही होगा।


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जानें क्या ब्रिटेन के शाही परिवार पर भी लगता है टैक्स?

शाही सदस्यों की आय का एक और बड़ा स्रोत 'डची' हैं—डची ऑफ लैंकेस्टर (मोनार्क के लिए) और डची ऑफ कॉर्नवाल (प्रिंस ऑफ वेल्स के लिए)। इन ऐतिहासिक संपदाओं से होने वाली कमाई पर कोई कॉर्पोरेशन टैक्स नहीं लगता।

Royal Family Tax
टैक्स कानून का पूरा सच (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar24 Feb 2026 12:04 PM
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Royal Family Tax: ब्रिटिश रॉयल फैमिली (शाही परिवार) पर टैक्स लगता है या नहीं, यह अक्सर चर्चा का विषय बना रहता है। आम नागरिकों के मुकाबले रॉयल फैमिली को नियंत्रित करने वाला कानूनी ढांचा काफी अलग है। दरअसल, तकनीकी तौर पर ब्रिटिश शासक (मोनार्क) को कुछ टैक्स देने के लिए कानूनी तौर पर मजबूर नहीं किया जा सकता, लेकिन पिछले कुछ दशकों से परिवार ने स्वेच्छा से टैक्स देने का रास्ता अपनाया है।

क्या है कानूनी बाध्यता?

यूनाइटेड किंगडम के संवैधानिक सिद्धांतों के तहत, मोनार्क को इनकम टैक्स, कैपिटल गेन टैक्स या इनहेरिटेंस टैक्स देने के लिए कानूनी तौर पर बाध्य नहीं किया जा सकता। इसकी वजह यह है कि संसद द्वारा पारित कोई भी कानून 'क्राउन' (शाही ताज) को तब तक स्वतः लागू नहीं होता, जब तक कि उसमें साफ तौर पर ऐसा उल्लेख न किया गया हो।

1993 से बदला रवैया

हालांकि, साल 1992 में क्वीन एलिजाबेथ II ने यह घोषणा की थी कि वह अपनी निजी आय (पर्सनल इनकम) पर अपनी मर्जी से इनकम टैक्स देंगी। यह फैसला 1993 से लागू हुआ और वर्तमान समय में किंग चार्ल्स III के कार्यकाल में भी यह व्यवस्था जारी है। इसी तरह, प्रिंस ऑफ वेल्स (प्रिंस विलियम) भी अपनी निजी आय और डची से होने वाली कमाई पर टैक्स देते हैं।

सॉवरेन ग्रांट पर कोई टैक्स नहीं

शाही खर्चों का एक बड़ा हिस्सा 'सॉवरेन ग्रांट' से आता है। यह यूके ट्रेजरी (सरकारी खजाने) से मिलने वाला पैसा होता है, जिसका इस्तेमाल आधिकारिक कामों, स्टाफ की सैलरी, यात्राओं और बकिंघम पैलेस जैसी प्रॉपर्टीज की मरम्मत में होता है। इस पर कोई टैक्स नहीं लगता क्योंकि इसे शासक की निजी आय नहीं माना जाता, यह एक प्रकार की सार्वजनिक फंडिंग है।

डची से होने वाली कमाई

वरिष्ठ शाही सदस्यों की आय का एक और बड़ा स्रोत 'डची' हैं—डची ऑफ लैंकेस्टर (मोनार्क के लिए) और डची ऑफ कॉर्नवाल (प्रिंस ऑफ वेल्स के लिए)। इन ऐतिहासिक संपदाओं से होने वाली कमाई पर कोई कॉर्पोरेशन टैक्स नहीं लगता। फिर भी, किंग चार्ल्स III और प्रिंस विलियम दोनों ही इनसे मिलने वाली अतिरिक्त आय (सरप्लस इनकम) पर स्वेच्छा से इनकम टैक्स चुकाते हैं।

अन्य शाही सदस्यों पर नियम

रॉयल फैमिली के अन्य सदस्य, जो कि बिजनेस, इन्वेस्टमेंट या नौकरी से निजी आय कमाते हैं, वे पूरी तरह से यूके के टैक्स कानूनों के दायरे में आते हैं। उन्हें किसी भी आम यूके निवासी की तरह ही इनकम टैक्स और कैपिटल गेन टैक्स देना पड़ता है और इस मामले में उन्हें कोई विशेष छूट प्राप्त नहीं है। Royal Family Tax

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