जेवर के नवादा गांव में बड़ा फैसला, अब शादी-ब्याह में नहीं बजेगा डीजे

ग्रेटर नोएडा के जेवर क्षेत्र से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने सामाजिक सरोकारों और पारंपरिक मूल्यों पर नई चर्चा छेड़ दी है। जेवर के नवादा गांव में ग्रामीणों ने सामूहिक सहमति से एक अहम निर्णय लेते हुए शादी-विवाह और अन्य खुशी के आयोजनों में डीजे पर पूरी तरह रोक लगाने का ऐलान कर दिया है।

जेवर के नवादा गांव में डीजे पर रोक
जेवर के नवादा गांव में डीजे पर रोक
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar23 Mar 2026 11:42 AM
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Jewar News : ग्रेटर नोएडा के जेवर क्षेत्र से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने सामाजिक सरोकारों और पारंपरिक मूल्यों पर नई चर्चा छेड़ दी है। जेवर के नवादा गांव में ग्रामीणों ने सामूहिक सहमति से एक अहम निर्णय लेते हुए शादी-विवाह और अन्य खुशी के आयोजनों में डीजे पर पूरी तरह रोक लगाने का ऐलान कर दिया है। गांव की पंचायत में लिया गया यह फैसला अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। करीब पांच हजार की आबादी वाले जेवर के नवादा गांव में आयोजित पंचायत में ग्रामीणों ने साफ कहा कि अब गांव की सीमा के भीतर किसी भी वैवाहिक कार्यक्रम में तेज आवाज में डीजे नहीं बजाया जाएगा। पंचायत का यह भी स्पष्ट संदेश रहा कि यदि कोई परिवार इस सामूहिक निर्णय की अनदेखी करता है, तो उसके खिलाफ सामाजिक स्तर पर कड़ा रुख अपनाया जाएगा।

जेवर में पंचायत का बड़ा संदेश

रविवार को जेवर इलाके के नवादा गांव में आयोजित पंचायत में गांव के बुजुर्ग, जिम्मेदार नागरिक, सामाजिक प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। बैठक के दौरान शादी-ब्याह में बढ़ते शोर-शराबे, ध्वनि प्रदूषण और उससे होने वाली परेशानियों पर विस्तार से चर्चा हुई। इसके बाद सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि गांव में आगे से डीजे संस्कृति को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा। ग्रामीणों ने यह भी तय किया कि शादी जैसे पारिवारिक और सामाजिक अवसरों को शालीनता, मर्यादा और पारंपरिक ढंग से संपन्न कराया जाएगा। पंचायत में मौजूद लोगों ने माना कि खुशी के मौके पर उत्सव होना चाहिए, लेकिन ऐसा कोई आयोजन नहीं होना चाहिए जिससे बुजुर्गों, बच्चों, मरीजों और अन्य ग्रामीणों को परेशानी उठानी पड़े।

नियम तोड़ा तो गांव में होगा सामाजिक बहिष्कार

पंचायत के निर्णय में केवल अपील नहीं, बल्कि सख्त सामाजिक संदेश भी शामिल किया गया। ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया कि यदि कोई परिवार गांव के इस सामूहिक फैसले के खिलाफ जाकर शादी में डीजे बजाता है, तो उसके कार्यक्रम का सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा। इतना ही नहीं, गांव के लोग ऐसे आयोजन में शामिल भी नहीं होंगे। जेवर के नवादा गांव में इस फैसले को जिस तरह व्यापक समर्थन मिला, उसने ग्रामीण एकजुटता की मजबूत तस्वीर पेश की। पंचायत में शामिल लोगों ने कहा कि गांव का हित व्यक्तिगत पसंद से ऊपर है और सामूहिक अनुशासन से ही बेहतर सामाजिक वातावरण बनाया जा सकता है।

पंचायत में रखी गई ठोस दलीलें

पंचायत में पूर्व प्रधानाचार्य नरपत सिंह नागर ने तेज आवाज में बजने वाले डीजे से होने वाले नुकसान पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अत्यधिक ध्वनि केवल असुविधा ही नहीं पैदा करती, बल्कि यह कई स्वास्थ्य समस्याओं की वजह भी बन सकती है। विशेष रूप से बुजुर्गों, छोटे बच्चों और बीमार लोगों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने ग्रामीणों को समझाया कि लगातार बढ़ता ध्वनि प्रदूषण मानसिक तनाव, सिरदर्द, बेचैनी और हृदय संबंधी समस्याओं को बढ़ा सकता है। इसी कारण जेवर के नवादा गांव ने समय रहते एक सजग और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण फैसला लिया है। पंचायत में केवल डीजे पर रोक की बात नहीं हुई, बल्कि गांव में अन्य सामाजिक बुराइयों और अनावश्यक दिखावे को खत्म करने पर भी जोर दिया गया। ग्रामीणों ने संकल्प लिया कि जेवर क्षेत्र के इस गांव में शांति, अनुशासन और सामाजिक संतुलन बनाए रखने की दिशा में मिलकर काम किया जाएगा। गांव के लोगों का मानना है कि यदि समाज स्वयं जागरूक होकर कुछ अनुशासन तय करे, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर माहौल तैयार किया जा सकता है। Jewar News

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जेवर एयरपोर्ट में दिखेगी भारतीय परंपरा की छाप, आधुनिक डिजाइन से बनेगा खास

उत्तर प्रदेश के जेवर में विकसित हो रहा जेवर एयरपोर्ट सिर्फ एक नया हवाई अड्डा नहीं, बल्कि आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और भारतीय सांस्कृतिक पहचान का अनोखा मेल बनकर सामने आ रहा है। दावा किया जा रहा है कि जेवर एयरपोर्ट देश के सबसे अत्याधुनिक एयरपोर्ट्स में शामिल होगा।

जेवर एयरपोर्ट की नई पहचान
जेवर एयरपोर्ट की नई पहचान
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userअभिजीत यादव
calendar23 Mar 2026 10:42 AM
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Jewar Airport : उत्तर प्रदेश के जेवर में विकसित हो रहा जेवर एयरपोर्ट सिर्फ एक नया हवाई अड्डा नहीं, बल्कि आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और भारतीय सांस्कृतिक पहचान का अनोखा मेल बनकर सामने आ रहा है। दावा किया जा रहा है कि जेवर एयरपोर्ट देश के सबसे अत्याधुनिक एयरपोर्ट्स में शामिल होगा। यहां पहुंचने वाले यात्रियों को शुरुआत से ही ऐसा अनुभव मिलेगा, जिसमें तकनीक के साथ-साथ भारतीय परंपरा की झलक भी साफ दिखाई देगी। जेवर एयरपोर्ट के टर्मिनल परिसर को इस तरह तैयार किया गया है कि प्रवेश करते ही यात्रियों को वाराणसी और हरिद्वार के घाटों जैसी संरचना का एहसास हो। वहीं, भीतर का वातावरण भारतीय हवेली शैली से प्रेरित रखा गया है, ताकि एयरपोर्ट का अनुभव केवल यात्रा तक सीमित न रहकर सांस्कृतिक रूप से भी यादगार बने।

शुरुआती चरण में कई बड़े शहरों से जुड़ेगा जेवर एयरपोर्ट

शुरुआत में जेवर एयरपोर्ट से देश के कई प्रमुख शहरों के लिए उड़ान सेवाएं शुरू किए जाने की तैयारी है। इनमें चंडीगढ़, हैदराबाद, बेंगलुरु, चेन्नई, मुंबई, लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर, अहमदाबाद और जयपुर जैसे शहर शामिल बताए जा रहे हैं। इससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर और आसपास के इलाकों के यात्रियों को बड़ा विकल्प मिलेगा। उम्मीद है कि जेवर एयरपोर्ट चालू होने के बाद क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूती मिलेगी और यात्रियों का दबाव अन्य एयरपोर्ट्स से भी कुछ हद तक कम होगा। प्रारंभिक चरण में जेवर एयरपोर्ट को हर साल करीब 50 लाख यात्रियों की आवाजाही संभालने के हिसाब से तैयार किया गया है। हालांकि, इसकी डिजाइनिंग भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर की गई है। बताया गया है कि एक रनवे के सहारे भी जेवर एयरपोर्ट को करीब 1.2 करोड़ यात्रियों की क्षमता तक विकसित किया जा सकता है। योजना के मुताबिक, जब यात्री क्षमता लगभग 80 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी, तब दूसरे रनवे और नए टर्मिनल के निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इस लिहाज से जेवर एयरपोर्ट को दीर्घकालिक विस्तार की सोच के साथ विकसित किया जा रहा है।

क्यों खास है जेवर एयरपोर्ट

जेवर एयरपोर्ट की सबसे बड़ी विशेषताओं में उसका पर्यावरणीय दृष्टिकोण शामिल है। इसे शुरुआत से ही नेट-जीरो कार्बन एमिशन के लक्ष्य के साथ विकसित किया जा रहा है। यानी यह एयरपोर्ट केवल यात्री सुविधाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि टिकाऊ और हरित विकास के मॉडल के रूप में भी अपनी पहचान बनाएगा। इसके अलावा जेवर एयरपोर्ट में डिजी यात्रा और बायोमेट्रिक सिस्टम जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल यात्रियों के सफर को तेज, आसान और ज्यादा सुविधाजनक बनाने के लिए किया जाएगा। यही कारण है कि जेवर एयरपोर्ट को भविष्य के स्मार्ट एयरपोर्ट की श्रेणी में देखा जा रहा है।

जेवर एयरपोर्ट की डिजाइन में दिखेगी भारतीय आत्मा

जेवर एयरपोर्ट की वास्तुशिल्पीय बनावट उसे साधारण एयरपोर्ट्स से अलग पहचान देती है। इसके प्रवेश क्षेत्र को इस तरह विकसित किया गया है कि वहां पहुंचते ही वाराणसी और हरिद्वार के घाटों जैसी सीढ़ीनुमा संरचना का अहसास हो। यह डिजाइन केवल सौंदर्य तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत की गहरी छाप भी छोड़ती है। टर्मिनल के भीतर बनाया गया केंद्रीय प्रांगण पारंपरिक हवेली शैली से प्रेरित है, जो पूरे परिसर को खुलापन, गरिमा और भारतीय स्थापत्य का स्पर्श देता है। प्राकृतिक रोशनी और हवा के सहज प्रवाह को ध्यान में रखकर तैयार किया गया यह हिस्सा यात्रियों को सुकून भरा अनुभव देगा।

जेवर एयरपोर्ट की एक और खास बात यह है कि यहां बैठने की व्यवस्था में बांस से बने फर्नीचर का इस्तेमाल किया गया है। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण का संदेश जाता है, बल्कि एयरपोर्ट की थीम में भारतीयता और सस्टेनेबल डिजाइन का सुंदर मेल भी नजर आता है। वहीं, टर्मिनल की सफेद पारभासी छत और फर्श पर की गई विशेष प्रकाश व्यवस्था पूरे इंटीरियर को बहती नदी जैसा दृश्य प्रभाव देती है। यानी जेवर एयरपोर्ट सिर्फ यात्रा का केंद्र नहीं होगा, बल्कि ऐसा स्पेस बनेगा जहां आधुनिकता, परंपरा और दृश्य सौंदर्य एक साथ महसूस होंगे।

तैयारियों का जायजा लेने पहुंचे मुख्यमंत्री

प्रस्तावित उद्घाटन कार्यक्रम से पहले जेवर एयरपोर्ट की तैयारियां तेज हो गई हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को जेवर एयरपोर्ट पहुंचकर कई घंटों तक व्यवस्थाओं की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ कार्यक्रम की रूपरेखा, सुरक्षा प्रबंधन, जनसभा की व्यवस्था और अन्य जरूरी पहलुओं पर चर्चा की। समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को जेवर एयरपोर्ट पर प्रस्तावित कार्यक्रम, सुरक्षा घेरा, संभावित भीड़ और बैठने की व्यवस्थाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने सभी तैयारियां तय समय के भीतर पूरा करने के निर्देश भी दिए।

उद्घाटन कार्यक्रम के लिए विशेष इंतजाम

28 मार्च को प्रस्तावित कार्यक्रम को देखते हुए जेवर एयरपोर्ट परिसर में बड़े स्तर पर व्यवस्थाएं की जा रही हैं। आम लोगों के प्रवेश के लिए अलग-अलग रास्ते तय किए गए हैं, जबकि वीवीआईपी और वीआईपी मेहमानों के लिए अलग मार्ग बनाया जाएगा। ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे से विशेष आवागमन की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। इसके अलावा जेवर एयरपोर्ट के आसपास पार्किंग की व्यवस्था की जा रही है। कार्यक्रम के दौरान शीर्ष अतिथियों की आवाजाही को ध्यान में रखते हुए कई हैलीपैड बनाए जाने की योजना है। इससे साफ है कि जेवर एयरपोर्ट का उद्घाटन कार्यक्रम प्रशासनिक और सुरक्षा दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

क्षेत्र के विकास का नया इंजन बनेगा जेवर एयरपोर्ट

विशेषज्ञों का मानना है कि जेवर एयरपोर्ट पश्चिमी उत्तर प्रदेश और यमुना एक्सप्रेस-वे क्षेत्र की आर्थिक तस्वीर बदलने में अहम भूमिका निभा सकता है। इससे न केवल यात्रा सुविधाएं बढ़ेंगी, बल्कि रोजगार, निवेश, लॉजिस्टिक्स, होटल, परिवहन और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों को भी गति मिलेगी। ऐसे में जेवर एयरपोर्ट को केवल एक एयर ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट के तौर पर नहीं, बल्कि क्षेत्रीय विकास के बड़े केंद्र के रूप में देखा जा रहा है। भारतीय संस्कृति की झलक, आधुनिक तकनीक, पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्धता और भविष्य की जरूरतों के हिसाब से तैयार की जा रही संरचना इसे खास बनाती है। Jewar Airport

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जेवर का सपना साकार
जेवर का सपना साकार
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userअभिजीत यादव
calendar23 Mar 2026 10:24 AM
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Jewar Airport : गौतमबुद्ध नगर के लिए 28 मार्च 2026 एक बेहद अहम और ऐतिहासिक दिन बनने जा रहा है। इसी दिन देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बहुप्रतीक्षित जेवर एयरपोर्ट यानी नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन करेंगे। इसके साथ ही केवल एक नए एयरपोर्ट की शुरुआत नहीं होगी, बल्कि करीब 25 साल पुरानी उस महत्वाकांक्षी सोच को भी साकार रूप मिलेगा, जिसका सपना जेवर और आसपास के लोगों ने लंबे समय से देखा था। वर्षों तक अड़चनों, इंतजार और बदलावों से गुजरने के बाद अब यह परियोजना जमीन पर तैयार खड़ी है। माना जा रहा है कि जेवर एयरपोर्ट का शुभारंभ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए विकास की नई धुरी साबित होगा। इससे क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी, बड़े निवेश, उद्योगों के विस्तार, व्यापारिक गतिविधियों में तेजी और लाखों लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर मिल सकते हैं।

राजनाथ सिंह को क्यों मिलता है पहला क्रेडिट

जेवर एयरपोर्ट की कहानी आज की नहीं है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का शुरुआती खाका वर्ष 2001 में तैयार हुआ था, जब उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। यही वजह है कि जेवर एयरपोर्ट की बुनियादी अवधारणा का पहला श्रेय राजनाथ सिंह को दिया जाता है। उस समय यह माना गया था कि दिल्ली से सटे पश्चिमी यूपी के लिए एक बड़े अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट की जरूरत आने वाले समय में निर्णायक साबित होगी। हालांकि प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद भी जेवर एयरपोर्ट की राह आसान नहीं रही। राजनीतिक बदलाव, नीतिगत अड़चनें और केंद्र स्तर पर मंजूरी से जुड़े मसले लंबे समय तक इस परियोजना की गति रोकते रहे।

यूपीए दौर में अटका रहा जेवर एयरपोर्ट

एक दौर ऐसा भी आया, जब जेवर एयरपोर्ट की महत्वाकांक्षी परियोजना राजनीतिक इच्छाशक्ति से ज्यादा सरकारी नियमों और मंजूरियों की जटिलताओं में फंसकर रह गई। केंद्र स्तर पर दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से दूरी को प्रमुख आधार बनाया गया और यही तर्क दिया गया कि 150 किलोमीटर के दायरे में किसी नए अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट को अनुमति देना व्यावहारिक नहीं होगा। इस तकनीकी और नीतिगत आपत्ति ने जेवर एयरपोर्ट की रफ्तार को लंबे समय तक थामे रखा। नतीजा यह हुआ कि जिस परियोजना को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विकास की बड़ी उम्मीद माना जा रहा था, वह वर्षों तक फाइलों और बैठकों के बीच उलझी रही। जेवर और आसपास के लोगों के लिए यह दौर निराशा से भरा रहा, क्योंकि उनका सपना बार-बार मंजूरी की दहलीज पर जाकर अटक जाता था।

अखिलेश सरकार में बदला गया था रुख

राजनीतिक सत्ता बदलने के साथ जेवर एयरपोर्ट का भूगोल भी बदलने की कोशिश हुई। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के कार्यकाल में इस एयरपोर्ट परियोजना को जेवर से हटाकर दूसरी जगह ले जाने की चर्चा सामने आई। उस समय आगरा को विकल्प के तौर पर आगे बढ़ाया गया, क्योंकि वह दिल्ली एयरपोर्ट से अधिक दूरी पर था। इससे जेवर एयरपोर्ट का मूल प्रस्ताव पीछे चला गया और क्षेत्रीय स्तर पर निराशा भी बढ़ी। यानी जिस परियोजना को जेवर की जमीन पर आकार लेना था, उसे दूसरे शहर की ओर मोड़ने की कोशिश ने इसकी रफ्तार को और धीमा कर दिया।

योगी सरकार में मिली सबसे तेज रफ्तार

वर्ष 2014 के बाद बदले राजनीतिक माहौल और फिर उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के साथ जेवर एयरपोर्ट को नई गति मिली। बाद में योगी आदित्यनाथ सरकार ने इस परियोजना को सिर्फ घोषणा तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे जमीन पर उतारने के लिए तेज फैसले लिए। भूमि अधिग्रहण, प्रशासनिक स्वीकृतियां, निर्माण कार्य और निवेशकों का भरोसा हर स्तर पर जेवर एयरपोर्ट को प्राथमिकता दी गई।

इसी का नतीजा है कि आज जेवर एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्धियों में गिना जा रहा है। स्थानीय लोगों ने भी इस परियोजना का सहयोग किया और जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण ढंग से पूरी हुई।

25 साल का इंतजार अब खत्म होने जा रहा है

जेवर एयरपोर्ट का उद्घाटन सिर्फ एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक लंबी यात्रा का पड़ाव है। करीब ढाई दशक पहले जो सपना कागज पर शुरू हुआ था, वह अब हकीकत बनकर सामने है। पिछले पांच वर्षों में इस परियोजना के लिए 2500 हेक्टेयर से अधिक भूमि का अधिग्रहण किया गया, जो अपने आप में बड़ा रिकॉर्ड माना जा रहा है। इस परियोजना की अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वरिष्ठ प्रशासनिक स्तर पर लगातार इसकी निगरानी होती रही। अलग-अलग चरणों में अधिकारियों ने साइट का निरीक्षण किया और अधिग्रहण से लेकर निर्माण तक की प्रगति की समीक्षा की। अब 28 मार्च 2026 को जेवर एयरपोर्ट औपचारिक रूप से देश को समर्पित कर दिया जाएगा।

जेवर एयरपोर्ट से बदलेगी पश्चिमी यूपी की तस्वीर

जेवर एयरपोर्ट का असर केवल गौतमबुद्ध नगर तक सीमित नहीं रहने वाला। यह परियोजना पश्चिमी उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए गेमचेंजर मानी जा रही है। गौतमबुद्ध नगर, अलीगढ़, बुलंदशहर, गाजियाबाद, हापुड़, मेरठ समेत आसपास के कई जिलों को इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है। हरियाणा के सीमावर्ती इलाकों पर भी इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। जेवर एयरपोर्ट के कारण इस पूरे क्षेत्र में औद्योगिक निवेश, लॉजिस्टिक्स हब, वेयरहाउसिंग, होटल इंडस्ट्री, रियल एस्टेट, ट्रांसपोर्ट और सर्विस सेक्टर में तेजी आने की उम्मीद है। गौतमबुद्ध नगर में तेजी से बढ़ते निवेश के पीछे भी जेवर एयरपोर्ट को सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है।

रोजगार का बड़ा केंद्र बनेगा जेवर एयरपोर्ट

इस परियोजना से रोजगार के बड़े अवसर पैदा होने की उम्मीद जताई जा रही है। एयरपोर्ट से जुड़े प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष क्षेत्रों में लाखों लोगों को काम मिल सकता है। एविएशन, ग्राउंड स्टाफ, सुरक्षा, कार्गो, आतिथ्य, टैक्सी, खानपान, सप्लाई चेन और स्थानीय व्यवसाय हर सेक्टर में जेवर एयरपोर्ट नई संभावनाओं का दरवाजा खोलेगा। यही कारण है कि जेवर एयरपोर्ट को केवल यात्रा सुविधा के रूप में नहीं, बल्कि रोजगार और क्षेत्रीय आर्थिक बदलाव के बड़े इंजन के तौर पर देखा जा रहा है।

पहली लैंडिंग ने ही दे दिया था बड़े भविष्य का संकेत

जेवर एयरपोर्ट ने अपने निर्माण चरण में ही एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज कर ली थी। 9 दिसंबर 2024 को यहां पहली बार एक कमर्शियल विमान की सफल लैंडिंग हुई थी। एयरपोर्ट के 3900 मीटर लंबे और 60 मीटर चौड़े रनवे पर इंडिगो एयरलाइंस के एयरबस A-320 विमान ने उतरकर इसकी तकनीकी तैयारियों को साबित किया था। उड़ान के दौरान विमान ने आईएलएस समेत कई नेविगेशन और ऑपरेशनल सिस्टम की जांच की थी। इसके बाद एयर ट्रैफिक कंट्रोल के समन्वय से सफल लैंडिंग कराई गई। रनवे पर उतरते ही विमान को वाटर कैनन सलामी दी गई। इस दृश्य ने जेवर एयरपोर्ट को लेकर लोगों के उत्साह को और बढ़ा दिया था। Jewar Airport

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