यमुना एक्सप्रेसवे पर होने वाले सड़क हादसों में घायल लोगों की जिंदगी बचाने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण तथा उम्मीद जगाने वाली पहल सामने आई है।

Jewar News : यमुना एक्सप्रेसवे पर होने वाले सड़क हादसों में घायल लोगों की जिंदगी बचाने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण तथा उम्मीद जगाने वाली पहल सामने आई है। सड़क सुरक्षा के लिए लंबे समय से अभियान चला रहे ‘हेलमेट मैन ऑफ इंडिया’ राघवेंद्र कुमार ने यमुना एक्सप्रेसवे पर ‘संजीवनी बूटी मिशन’ शुरू करने की योजना सामने रखी है। इस योजना के तहत दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को गोल्डन ऑवर के भीतर हेलीकॉप्टर एयर एंबुलेंस के जरिए अस्पताल पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। प्रस्ताव के मुताबिक यह पायलट प्रोजेक्ट वर्ष 2027 में तीन हेलीकॉप्टर एयर एंबुलेंस के साथ यमुना एक्सप्रेसवे पर शुरू किया जा सकता है। योजना की सबसे बड़ी खासियत यह बताई गई है कि घायल व्यक्ति के लिए एयर एंबुलेंस सेवा की फीस महज एक रुपये रखने का मॉडल प्रस्तावित किया गया है। हालांकि यह योजना अभी प्रस्ताव/पायलट प्रोजेक्ट के स्तर पर है तथा इसके वास्तविक क्रियान्वयन के लिए संबंधित सरकारी एवं अन्य संस्थाओं की स्वीकृतियां तथा व्यवस्थाएं जरूरी होंगी। Jewar News
यमुना एक्सप्रेसवे का बड़ा हिस्सा जेवर क्षेत्र तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश से होकर गुजरता है। एक्सप्रेसवे पर तेज रफ्तार वाहनों की आवाजाही के कारण दुर्घटना की स्थिति में घायल व्यक्ति को घटनास्थल से अस्पताल तक पहुंचाने में लगने वाला समय कई बार बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। ऐसे में यदि दुर्घटना के कुछ ही समय बाद मेडिकल टीम मौके पर पहुंच सके तथा जरूरत पड़ने पर घायल को हेलीकॉप्टर के माध्यम से सीधे उपयुक्त अस्पताल तक पहुंचाया जा सके, तो गंभीर मरीजों के लिए यह व्यवस्था जीवन तथा मृत्यु के बीच अंतर पैदा कर सकती है। यही कारण है कि ‘संजीवनी बूटी मिशन’ की संभावित शुरुआत जेवर तथा यमुना एक्सप्रेसवे के लाखों यात्रियों के लिए बड़ी जनहितकारी खबर मानी जा रही है। Jewar News
राघवेंद्र कुमार ने इस योजना को H3 फॉर्मूला के रूप में प्रस्तुत किया है। इसका अर्थ है Helicopter – Highway – Hospital अर्थात दुर्घटना के बाद घायल व्यक्ति को हाईवे से जल्द से जल्द हेलीकॉप्टर के माध्यम से उपयुक्त अस्पताल तक पहुंचाने की व्यवस्था विकसित करना। रिपोर्टों के अनुसार इस मिशन का ब्लूप्रिंट हेलमेट के ऊपर तैयार कर अधिकारियों के सामने प्रस्तुत किया गया। इस पहल के लिए एयर इंडिया के अधिकारियों के साथ भी चर्चा किए जाने की जानकारी सामने आई है। Jewar News
राघवेंद्र कुमार के अनुसार एक हेलीकॉप्टर का एक वर्ष का लीज खर्च लगभग 7 करोड़ रुपये बताया गया है, जिसमें उड़ान, ईंधन तथा स्टाफ आदि का खर्च शामिल होने की बात कही गई है। इस हिसाब से तीन हेलीकॉप्टरों के लिए अनुमानित वार्षिक खर्च करीब 21 करोड़ रुपये बैठता है। इस व्यवस्था को आर्थिक रूप से चलाने के लिए एक्सप्रेसवे से गुजरने वाले प्रत्येक वाहन से महज एक रुपये की सेवा राशि लेने का प्रस्ताव भी सामने रखा गया है। दावा है कि इससे लगभग 3 करोड़ रुपये प्रतिमाह तथा करीब 36 करोड़ रुपये सालाना जुटाए जा सकते हैं। प्रस्तावित मॉडल में बची राशि का इस्तेमाल एक्सप्रेसवे पर कार एंबुलेंस तथा अस्पतालों की आपातकालीन सुविधाओं को मजबूत करने में करने की बात कही गई है। Jewar News
यमुना एक्सप्रेसवे पर दुर्घटनाओं की स्थिति में सहायता पहुंचाने के लिए मौजूदा व्यवस्था भी है। आधिकारिक यमुना एक्सप्रेसवे संबंधी जानकारी के अनुसार हर दो किलोमीटर पर Emergency Call Box लगाए गए हैं, जिनके माध्यम से यात्री नियंत्रण केंद्र से संपर्क कर सकते हैं। जेवर टोल प्लाजा सहित एक्सप्रेसवे के विभिन्न हिस्सों में एंबुलेंस तथा ट्रॉमा सेंटर की व्यवस्था भी दर्ज है। आधिकारिक जानकारी में जेवर टोल प्लाजा को किलोमीटर 38 पर दर्शाया गया है तथा विभिन्न स्थानों पर ट्रॉमा सेंटर/प्राथमिक उपचार सुविधाओं का उल्लेख है। ऐसे में यदि भविष्य में इन व्यवस्थाओं को हेलीकॉप्टर एयर एंबुलेंस नेटवर्क से जोड़ दिया जाता है, तो यमुना एक्सप्रेसवे पर दुर्घटना के बाद हाईवे से अस्पताल तक पहुंचने की पूरी आपातकालीन व्यवस्था तथा अधिक मजबूत हो सकती है। Jewar News
सड़क हादसे में घायल व्यक्ति के लिए शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। इसी वजह से प्रस्तावित संजीवनी बूटी मिशन का सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य गोल्डन ऑवर में चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है। सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में भी गंभीर मरीजों तथा दुर्घटना पीड़ितों के लिए आपातकालीन एंबुलेंस सेवाओं का महत्व स्पष्ट रूप से स्वीकार किया गया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अनुसार 108 सेवा मुख्य रूप से गंभीर मरीजों, ट्रॉमा तथा दुर्घटना पीड़ितों के लिए आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था के रूप में काम करती है। Jewar News
यदि यमुना एक्सप्रेसवे पर यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है तो इससे देश के दूसरे एक्सप्रेसवे पर भी ऐसी व्यवस्था विकसित करने का रास्ता खुल सकता है। दरअसल भारत में हेलीकॉप्टर आधारित आपातकालीन चिकित्सा सेवा की अवधारणा पूरी तरह नई नहीं है। नागर विमानन मंत्रालय ने स्वास्थ्य मंत्रालय तथा उत्तराखंड सरकार के सहयोग से HEMS Sanjeevani परियोजना के माध्यम से हेलीकॉप्टर इमरजेंसी मेडिकल सर्विस की दिशा में काम किया है। यमुना एक्सप्रेसवे पर प्रस्तावित ‘संजीवनी बूटी मिशन’ इसी तरह की आपातकालीन चिकित्सा सोच को एक्सप्रेसवे दुर्घटनाओं के संदर्भ में आगे ले जाने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है। Jewar News
जेवर में Jewar Airport (Noida International Airport) के विकास के साथ आने वाले वर्षों में इस पूरे क्षेत्र में यातायात तथा आर्थिक गतिविधियां तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे समय में यमुना एक्सप्रेसवे की सड़क सुरक्षा तथा आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत करना तथा भी महत्वपूर्ण हो जाता है। ‘संजीवनी बूटी मिशन’ अभी प्रस्तावित पायलट प्रोजेक्ट के स्तर पर है, लेकिन यदि इसे सरकारी स्वीकृति, तकनीकी व्यवस्था तथा प्रभावी संचालन प्रणाली के साथ जमीन पर उतारा जाता है तो यह जेवर, गौतमबुद्धनगर तथा पूरे यमुना एक्सप्रेसवे के लिए बेहद महत्वपूर्ण जनहितकारी पहल साबित हो सकती है। Jewar News
यमुना एक्सप्रेसवे पर सड़क सुरक्षा केवल सरकार या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं है। यह हर यात्री की जिम्मेदारी है। हेलमेट पहनना, सीट बेल्ट लगाना, निर्धारित गति सीमा में वाहन चलाना तथा दुर्घटना की स्थिति में तत्काल सहायता उपलब्ध कराना इन सभी उपायों से मिलकर ही सड़क हादसों में होने वाली मौतों को कम किया जा सकता है। अगर ‘संजीवनी बूटी मिशन’ की योजना वास्तव में धरातल पर उतरती है तो यमुना एक्सप्रेसवे पर यह संदेश जाना चाहिए कि दुर्घटना के बाद जिंदगी बचाने के लिए हर सेकंड की कीमत है तथा किसी घायल को समय पर अस्पताल पहुंचाना ही सबसे बड़ी प्राथमिकता है। जेवर क्रांतिकारी की ओर से यह खबर इसलिए प्रमुखता से प्रकाशित की जा रही है क्योंकि यह किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति से ज्यादा आम जनता की जिंदगी तथा सुरक्षा से जुड़ा विषय है। Jewar News
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