
Amla Navami 2025: भारतवर्ष में अग्नि, जल ,पेड़, पौधे, जीव- जन्तु सभी पूज्यनीय हैं। भारत की यही संस्कृति आध्यात्मिक विविधता इस देश को महान बनाती हैं। कण-कण की पूजा हमारी अनमोल संस्कृति का अभिन्न अंग हैं। कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को आने वाली आंवला नवमी (Amla Navami ), जिसे अक्षय नवमी भी कहा जाता है, इस वर्ष अत्यंत शुभ संयोग लेकर आ रही है। भक्ति, प्रकृति और स्वास्थ्य का संगम लेकर आने वाला आंवला नवमी पर्व इस बार विशेष ज्योतिषीय संयोग में मनाया जाएगा। इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा कर भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। मान्यता है कि इस दिन किया गया स्नान, दान और पूजन अक्षय फल प्रदान करता हैं। मान्यता है कि आंवला नवमी के दिन आंवले के वृक्ष की आराधना करने से दीर्घायु, समृद्धि, संतान सुख और अखंड सौभाग्य प्राप्त होता है। यही कारण है कि यह पर्व आध्यात्मिक आस्था के साथ-साथ प्रकृति संरक्षण का संदेश भी देता है।
हिंदू पंचांग के अनुसार, आंवला नवमी (Amla Navami 2025) में शुक्रवार, 31 अक्टूबर को मनाई जाएगी। नवमी तिथि प्रारंभ 30 अक्टूबर 2025, गुरुवार को रात 10:42 बजे से लेकर नवमी तिथि समाप्त 31 अक्टूबर 2025, शुक्रवार को रात 8:15 बजे तक इस अवधि में सुबह का समय पूजा के लिए सबसे शुभ माना गया है। विशेष रूप से सुबह 7:00 बजे से 10:30 बजे तक पूजा-अर्चना करने का उत्तम मुहूर्त रहेगा।
शास्त्रों के अनुसार, आंवला नवमी (Amla Navami ) के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की संयुक्त पूजा का विधान है। ऐसा कहा जाता है कि जब देवी लक्ष्मी ने भगवान विष्णु से पूछा कि कौन-सा वृक्ष सबसे पवित्र है, तब भगवान ने कहा आंवला वृक्ष में मेरा स्वयं का वास है। इसी कारण इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा कर उसके नीचे भोजन करने से संतान सुख, धन-समृद्धि और दीर्घायु प्राप्त होती है। यह दिन सत्ययुग के आरंभ का प्रतीक भी माना गया है, इसलिए इसे अक्षय (अविनाशी) नवमी कहा जाता है।
इस दिन प्रात स्नान कर साफ वस्त्र धारण करें। फिर किसी मंदिर या घर के आंगन में लगे आंवले के वृक्ष के पास जाकर पूजन करें। आंवले के पेड़ पर जल, दूध और गंगाजल चढ़ाएं। पेड़ के चारों ओर सात बार परिक्रमा करें। दीपक जलाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का ध्यान करें। उसके बाद परिवार सहित पेड़ के नीचे बैठकर भोजन करें, इसे अत्यंत शुभ माना गया है। बता दें कि व्रती को इस दिन ब्राह्मणों को भोजन कराना और वस्त्र या अन्नदान करना चाहिए।
आंवला नवमी (Amla Navami ) को वृक्ष पूजा का पर्व भी कहा जाता है। यह भारतीय परंपरा में प्रकृति और धर्म के संगम का प्रतीक है। आंवला, जिसे अमृतफल कहा गया है, आयुर्वेद में औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है। इसीलिए इस दिन उसकी पूजा कर मनुष्य स्वास्थ्य, सौभाग्य और अक्षय पुण्य की प्राप्ति की कामना करता है।ग्रामीण इलाकों में इस दिन महिलाएँ विशेष रूप से व्रत रखती हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करती हैं। आंवला नवमी 2025 न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों की दृष्टि से भी इसका बड़ा महत्व है। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि प्रकृति की पूजा ही सच्चा धर्म है। Amla Navami 2025: