
आज पूरे देश में भाई दूज का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। यह त्योहार भाई-बहन के अटूट प्यार, सम्मान और विश्वास का प्रतीक है। इस खास दिन बहनें अपने भाई के माथे पर तिलक करती हैं और उनकी लंबी उम्र, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करती हैं। उत्तर भारत में भाई दूज का महत्व रक्षाबंधन से कम नहीं माना जाता। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिनके पास सगी बहन या भाई नहीं हैं, वे इस प्यार भरे त्योहार को कैसे मनाते हैं? क्या वे भी इसे उतनी ही धूमधाम और भावना के साथ मना सकते हैं? आइए जानते हैं उन परंपराओं और तरीकों के बारे में, जो भाई दूज को हर किसी के लिए खास और यादगार बनाते हैं। Bhai Dooj 2025
भाई दूज केवल सगे भाई-बहन तक सीमित नहीं है। ऐसे में जिन बहनों के पास अपना भाई नहीं है, वे इस दिन अपने पिता, चाचा, कजिन, मित्र या किसी अन्य पुरुष रिश्तेदार का तिलक कर सकती हैं। यदि नजदीकी रिश्तेदार उपलब्ध न हों, तो पड़ोस के किसी व्यक्ति को भाई मानकर भी तिलक किया जा सकता है।
यदि आपके पास सगी बहन नहीं है, तो आप चाचा, मामा या अन्य पुरुष रिश्तेदारों की बेटियों से तिलक करवा सकते हैं। इसके अतिरिक्त, पिता की बहन यानी बुआ से भी तिलक करवा सकते हैं। यदि ये विकल्प भी संभव न हों, तो रिश्तेदारी या पड़ोस में किसी महिला को बहन मानकर तिलक करवाना भी परंपरा का हिस्सा बन सकता है।
भाई दूज के दिन भाई को तिलक करने से पहले बहन एक थाली सजाएं, जिसमें दीपक, रोली, अक्षत, फूल, सुपारी, नारियल, कलावा, सिक्का और मिठाई रखी जाए। तिलक से पूर्व भगवान गणेश की पूजा करना शुभ माना जाता है। इसके बाद भाई का मुख उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा की ओर करके बैठाया जाता है और हाथ में नारियल, फूल और सिक्का दिया जाता है।
तिलक की प्रक्रिया इस प्रकार होती है:
सबसे पहले बहन भाई की कलाई पर कलावा बांधती हैं।
उसके माथे पर रोली और अक्षत से तिलक करती हैं।
फिर फूलों की माला पहनाकर मिठाई खिलाती हैं।
अंत में आरती उतारकर भाई की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करती हैं।
भाई भी प्रेम और स्नेह के साथ बहन को उपहार देकर आशीर्वाद और सम्मान व्यक्त करता है। Bhai Dooj 2025