
Madhushravani Vrat 2023 Date इस साल मधुश्रावणी पर्व का आरंभ 7 जुलाई से होगा और इसकी समाप्ति 19 अगस्त 2023 को होगी। सावन माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी से इस व्रत का आरंभ होता है और श्रावण शुक्ल तृतीया पर इसका समापन होता है।
सावन की लोक पर्व परंपराओं में मधुश्रावणी व्रत का विशेष महत्व रहा है। यह पर्व भारत के मिथिलांचल क्षेत्र का विशेष पर्व रहा है। मधुश्रावणी पर्व वैवाहिक सुख की प्राप्ति के लिए किया जाने वाला व्रत है। इस पर्व के दौरान विवाहित महिलाएं इस व्रत को करती हैं। इस समय के दौरान ही जिसमें नवविवाहित महिलाएं अपने मायके में आकर मनाती हैं। इस व्रत में महिलाएं अपने जीवनसाथी की लम्बी उम्र की कमना करती हैं। इस व्रत में भगवान शिव के साथ देवी गौरी का पूजन होता है। मधुश्रावणी व्रत लोकगीतों से भरा हुआ है। इस समय पर विवाहित स्त्रियां मंगल गीत गाती हैं और पर्व को आनंद के साथ मनाती हैं।
मधुश्रावणी व्रत का आरंभ सावन के कृष्ण पक्ष की पंचमी से आरंभ होता है। इस वर्ष इस व्रत का आरंभ 7 जुलाई से होगा और समाप्ति 19 अगस्त 2023 के दिन होगी। इस वर्ष अधिक मास होने के कारण इसकी अवधि में वृद्धि होगी, जिसके अनुसार यह डेढ़ माह का होगा। यह पर्व 7 से 17 जुलाई तक होगा और फिर 17 से 19 अगस्त तक दो भाग में विभाजित दिखाई देगा, क्योंकि 18 जुलाई से 16 अगस्त तक की अवधि श्रावण अधिक मास की होगी।
मधुश्रावणी व्रत का पूजन पंचमी से आरंभ हो जाता है, इस पर्व को यह व्रत नवविवाहित महिलाएं रखती हैं, और इस व्रत के समय के दौरान बिना नमक का भोजन करने का विधान रहा है। इस व्रत में मीठा भोजन तथा फलाहार का उपयोग किया जाता है। व्रत के दौरान मिट्टी और गाय के गोबर से बना विषहरा बनाती हैं और भगवान शिव के साथ देवी पार्वती का पूजन करती हैं। इस समय पर कथा एवं लोकगीतों को गाया जाता है। महिलाएं श्रृंगार करके धूमधाम के साथ इस उत्सव को मनाती हैं।
इस व्रत को करने से पत्नी की उम्र लंबी होती है। साथ ही वैवाहिक जीवन की परेशानियां दूर हो जाती हैं। वैवाहिक जीवन से नकारात्मकता दूर हो जाती है। पति-पत्नी के बीच आपसी प्रेम बढ़ता है। इस व्रत को करने से स्त्री वैधव्य के दोष से मुक्त हो जाती है। यह व्रत सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला और मोक्ष प्रदान करने वाला माना जाता है। वैवाहिक सुख की कामना करने वाली स्त्रियों के लिए यह पर्व आस्था एवं विश्वास का प्रतिक है जो आज भी अपने पुरातन रुप की भांति सभी के भीतर समाहित है।