
Malmas Sawan 2023 : सावन महीना इस बार बेहद खास संयोग के साथ आया है। इस बार श्रावण का महीन मलमास या कहें अधिक मास भी होगा जिसके चलते इस दिन में 1 माह का इजाफा होगा। इस सावन में होने वाला मलमास कई मायनों में अपना असर दिखाएगा, यह आने वाले समय में होने वाली घटनाओं के लिए भी असरदायक होगा। सावन में अधिक मास का समय इससे पहले 2004 में रहा था, यह समय विश्व में घटने वाली एक विशेष दुर्घटना का साक्ष्य बना था। जो साल के अंत की सबसे बड़ी घटना रही और इस 2023 में घटित होने वाली घटनाएं अभी भी दिमाग में अभी तक ताजा हैं।
शास्त्रों के अनुसार सावन माह में अधिक मास का होना- "दुर्भिक्षं श्रावणे युग्मे पृथ्वी नाश: प्रजाक्षय:" जैसे कथनों से प्रकट किया गया है। इस समय पांच बुधवार, पांच बृहस्पतिवार एवं पांच मंगलवार का समय होना, मंगल, सूर्य, बुध, शुक्र का युति योग, शनि की सप्तम दृष्टि तथा बृहस्पति राहु के साथ शनि की दृष्टि से व्यथित है। इन सभी का प्रभाव भूगोल पर अपना असर डालेगा।
आइये जानते हैं इस बार पड़ने वाले श्रावण मलमास के विषय में विस्तार से और जाते हैं इसके द्वारा पड़ने वाले प्रभाव...
जब सावन में अधिक महीना होता है तो ज्योतिष शास्त्र अनुसार वर्षा से संबंधित बदलाव दिखाई देते हैं असमान्य वर्षा दिखाई दे सकती है। सार्वजनिक धन की हानि हो सकती है। आने वाले समय में जब सूर्य, बुध, मंगल और शुक्र का गोचर एक साथ युति में होगा तो स्थिति अचानक से होने वाले मौसम के बदलावों और देश दुनिया के राजनीतिक कारणों पर अपना असर डालने वाली होगी।
देशों पर नीतियों का बदलाव और उपद्रव भी इस समय के दोरान देखने को मिलेंगे। किसी नेता एवं किसी प्रसिद्ध व्यक्ति से संबंधित दुखद समाचार भी सुनने को मिल सकते हैं। देश के कुछ हिस्सों में उत्तर प्रदेश, असम और बंगाल को इस अवधि के दौरान मौसम का असर दिखाई देगा। मणिपुर राज्य की कुंडली में तुला लग्न उदय हो रहा है और यहां सुख स्थान पर सूर्य-राहु की युति जातीय वैमनस्य और समुदायों के मध्य का द्वंद दिखाती ही है। इसी प्रकार आने वाले गोचर का असर इसे प्रभावित करेगा।
वास्तव में वैदिक पंचांग को सौर मास और चंद्रमा के आधार पर गिना जाता है। एक चंद्रमा 354 दिन है, जबकि एक सौरामास 365 दिन है। इस तरह, इन दोनों के बीच 11 दिनों का अंतर है। इसलिए इस अंतर को सही करने के लिए 3 साल में मलमास की परिकल्पना की गई है।
इस समय को श्री विष्णु जी के रुप में पूजा जाता है। शादी-सगाई जैसे कई कार्यों को मालमास में रोक दिया जाता है। इसके अलावा, नया व्यवसाय भी शुरू नहीं किया गया है। इस महीने में, नए कार्यों का आरंभ, घर में प्रवेश इत्यादि कार्य न करने का विधान रहा है। सावन इस बार 59 दिनों का होगा। सावन का पहला महीना जो मलमास होगा, इसलिए सभी धार्मिक और शुभ काम दूसरे सावन के महीने में किए जाएंगे यानी शुद्ध सावन महीने में यह कार्य संपन्न होंगे।