
Nagpanchami 2023 : हिंदू धर्म मे भगवान शिव के साथ नाग का विशेष महत्व है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार माना जाता है कि नाग भोलेनाथ का आभूषण है। इसलिए भगवान शिव के साथ-साथ नाग की भी पूजा की जाती है। भारत में नागों के कई प्रसिद्ध मंदिर भी है। इन्हीं मंदिरों में से एक उज्जैन में स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर है।
यह मंदिर उज्जैन के महाकाल मंदिर की तीसरी मंजिल पर बना हुआ है। इस नाग मंदिर की खासियत यह है कि यह सिर्फ साल मे एक बार नागपंचमी के दिन दर्शन के लिये खोला जाता है। कहा जाता है कि नागराज तक्षक स्वयं इस मंदिर मे मौजूद है इसलिए खास नागपंचमी के दिन इस मंदिर मे पूजा अर्चना की जाती है।
सावन मास की शुक्लपक्ष की पंचमी तिथि को नागपंचमी का त्यौहार मनाया जाता है। इस बार तिथि के अनुसार नागपंचमी का त्योहार 21 अगस्त 2023 को मनाया जायेगा। इस दिन सभी महिलाएं नाग देवता का पूजन करती है। शास्त्रों में नौ प्रकार के नाग का जिक्र किया गया है। ज्योतिष के अनुसार अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में कालसर्प दोष या राहु दोष है तो इसकी शांति के लिए नाग पंचमी की तिथि बहुत खास मानी गई है। माना जाता है कि जो लोग नाग पंचमी के दिन नाग देवता के साथ ही भगवान शिव की पूजा और रुद्राभिषेक करते हैं, उनके जीवन से कालसर्प दोष खत्म हो जाता है। साथ ही राहु और केतु की अशुभता भी दूर होती है। पूरे भारतवर्ष से लोग यहां नागदेवता और भोलेनाथ की पूजा अर्चना करने आते हैं।
यहा स्थापित मूर्ति काफी पुरानी और अद्भुत है। नागचंद्रेश्वर मंदिर में 11वीं शताब्दी की प्रतिमा मौजूद है, जिसको लेकर दावा किया जाता है कि ऐसी प्रतिमा दुनिया में और कहीं नहीं है। इसमें फन फैलाये नाग के आसान पर भगवान शिव और देवी पार्वती अपने परे परिवार के साथ विराजमान है। इस प्रतिमा को नेपाल से यहां लाया गया था। कहा जाता है कि इस तरह की प्रतिमा उज्जैन के अलावा और कहीं नहीं है।
Read Also - Noida News : महोगनी का पेड़ आपको कर देगा मालामाल, इसको उगा लिया तो बन जाएँगे करोड़पतिपौराणिक मान्यताओं के मुताबिक भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए सर्पराज तक्षक ने घोर तपस्या की थी। सर्पराज की तपस्या से भगवान शंकर खुश हुए और फिर उन्होंने सर्पों के राजा तक्षक नाग को वरदान के रूप में अमरत्व का वरदान दिया। उसके बाद से ही तक्षक राजा ने प्रभु के सानिध्य में ही वास करना शुरू कर दिया। उनकी इच्छा थी कि उनके एकांत में कोई विघ्न ना डालें इसलिए तब से यह परंपरा चली आ रही है कि नागपंचमी के दिन ही इस मंदिर के द्वार खुलते हैं।
भरतीय परंपरा के अनुसार भगवान नागचन्द्रेश्वर की त्रिकाल पूजा की जाती है। त्रिकाल पूजा का अर्थ होता है तीन बार अलग-अलग समय पर पूजा करना। पहली पूजा मध्यरात्रि में महानिर्वाणी होती है, दूसरी पूजा नागपंचमी के दिन दोपहर में 12 बजे शासन द्वारा की जाती है और तीसरी पूजा नागपंचमी की शाम को 8 बजे भगवान महाकाल की पूजा के बाद मंदिर समिति करती है। इसके बाद रात 12 बजे वापस से एक साल के लिए बंद हो जाते है। लगभग दो लाख से ज्यादा भक्त एक ही दिन में नागदेव के दर्शन करते हैं। Nagpanchami 2023