
tulsi das bhakti[/caption]
Tulsidas Jayanti 2023 Date: कहा जाता है कि विवाह के बाद एक बार तुलसीदास जी का अपनी पत्नी के प्रति बहुत अधिक प्रेम था। वह उनके बिना नहीं रह पाते थे और एक बार जब उनकी पत्नी अपने मायके चली जाती हैं तो वह अपनी पत्नी के वियोग में व्याकुल होने लगते हैं और उनसे मिलने की इच्छा से पत्नी के पीछे-पीछे चल पड़ते हैं। अपने पति की यह हरकत देख कर रत्नावली कहती हैं कि “ अस्थि चर्म में देय यह , ता सो ऐसी प्रीति. नेकु जो होती राम से, तो काहे भव - भीत ?”
हड्डी माँस के इस शरीर से इतना प्रेम करते हो अगर राम से इतना प्रेम करो तो जीवन तो ये जीवन सुधर जाता. पत्नी की बातें सुनकर तुलसीदास जी का विवेक जागृत होता है और फिर उनके मन में राम भक्ति की ऎसी लौ लगती है कि वह उनके परम भक्तों में स्थान पाते हैं।
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