लौकी-भात से क्यों होती है छठ पूजा की शुरुआत? जानिए धार्मिक महत्व
भारत
चेतना मंच
24 Oct 2025 03:45 PM
दीपावली के बाद छठ पूजा का पर्व अपने पूरे उल्लास और भक्ति के साथ शुरू होता है। चार दिनों तक चलने वाला यह महापर्व सूर्य देव और छठी मैया की उपासना का प्रतीक है। छठ पूजा का पहला दिन ‘नहाय-खाय’ कहलाता है जिसमें श्रद्धालु पवित्र स्नान कर सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में यह पर्व केवल पूजा का दिन नहीं, बल्कि परिवार और समुदाय की भक्ति, सादगी और परंपरा का उत्सव है। इस दिन खासतौर पर लौकी की सब्जी और चावल यानी लौकी-भात बनाया जाता है। छठ पूजा की सुबह घर-आंगन में दीयों की रौशनी, पारंपरिक गीतों की गूंज और घी की खुशबू पूरे माहौल को पवित्र बना देती है। Lauki Bhaat
नहाय-खाय में लौकी-भात खाने की धार्मिक मान्यता
छठ पूजा में शुद्धता और सादगी को सबसे अधिक महत्व दिया जाता है। नहाय-खाय के दिन लौकी-भात खाने के पीछे धार्मिक और आयुर्वेदिक दोनों ही कारण हैं।
शुद्धता का प्रतीक: लौकी और चावल सात्विक और हल्के भोजन माने जाते हैं। यह शरीर को डिटॉक्स करता है और व्रत की शुरुआत को पवित्र बनाता है।
पाचन के लिए लाभकारी: पूजा से पहले हल्का भोजन लेना जरूरी होता है। लौकी में पानी और फाइबर भरपूर मात्रा में होता है, जो पेट को साफ रखता है।
ऊर्जा का स्रोत: दिनभर के उपवास और पूजा में ऊर्जा बनाए रखने के लिए चावल शरीर को आवश्यक ग्लूकोज प्रदान करता है।
आस्था और परंपरा: यह भोजन सिर्फ पेट भरने के लिए नहीं बल्कि छठी मैया के प्रति भक्ति और सादगी का प्रतीक है।
लौकी को छीलकर छोटे टुकड़ों में काट लें।
एक भगौने में घी गर्म करें और उसमें जीरा डालें।
लौकी के टुकड़े डालकर 2 मिनट तक हल्का भूनें।
अब धोए हुए चावल डालें और हल्का मिलाएं।
2 कप पानी और सेंधा नमक डालकर धीमी आंच पर पकने दें।
जब चावल और लौकी नरम हो जाएं, गैस बंद कर दें।
छठ पूजा की सुबह का दृश्य बेहद मनोहारी होता है। सूरज की पहली किरण के साथ घर-आंगन दीयों की रौशनी से जगमगा उठता है। मिट्टी के दीयों की लौ अंधकार पर प्रकाश की विजय और मन की शुद्धता का प्रतीक बन जाती है। नहाय-खाय से लेकर संध्या अर्घ्य तक महिलाएं पारंपरिक गीत गाती हैं जिसमें परिवार के कल्याण और भक्ति की भावना झलकती है। साथ ही रसोई से आती घी, ठेकुआ और रसियाव की खुशबू पूरे वातावरण को दिव्य बना देती है। हर व्यंजन बिना लहसुन-प्याज के तैयार किया जाता है ताकि सात्विकता और पवित्रता बनी रहे। इस पावन माहौल में हर घर में सूर्य देव और छठी मैया के प्रति अटूट विश्वास और भक्ति की लहर दौड़ जाती है। Lauki Bhaat