ऑटो एक्सपो से सड़क तक: AC वाली ई-रिक्शा का पेटेंट हुआ, जानें खासियत

कंपनी ने 2023 के ऑटो एक्सपो में अपनी 'Muse' इलेक्ट्रिक रिक्शा को प्रदर्शित किया था। इसका मुख्य उद्देश्य तीन पहिया वाहनों की उपयोगिता और किफायती कीमत को बनाए रखते हुए यात्रियों के सफर का अनुभव बेहतर बनाना है।

Omega Seiki
AC वाली ई-रिक्शा की लॉन्च उम्मीद (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar23 Feb 2026 01:25 PM
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Electric Rickshaw : भारतीय बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। अब ई-रिक्शा की दुनिया में भी बड़ा बदलाव देखने को मिलने वाला है। ओमेगा सेकी ने एक ऐसी इलेक्ट्रिक रिक्शा को पेटेंट कराया है, जो साधारण ऑटो-रिक्शा से कहीं बेहतर फीचर्स देने वाली है। इसमें एसी (AC), सनरूफ और टचस्क्रीन जैसे मॉडर्न फीचर्स दिए जाएंगे, जो अक्सर कारों में ही देखने को मिलते हैं।

2023 ऑटो एक्सपो में किया था प्रदर्शन

कंपनी ने 2023 के ऑटो एक्सपो में अपनी 'Muse' इलेक्ट्रिक रिक्शा को प्रदर्शित किया था। इसका मुख्य उद्देश्य तीन पहिया वाहनों की उपयोगिता और किफायती कीमत को बनाए रखते हुए यात्रियों के सफर का अनुभव बेहतर बनाना है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पेटेंट फाइल होने के बाद संकेत हैं कि कंपनी जल्द ही इसे बाजार में उतार सकती है।

शानदार डिजाइन और बेहतर दृश्यता

साधारण रिक्शा की तुलना में इस 4-डोर इलेक्ट्रिक रिक्शा का डिजाइन काफी आधुनिक है। इसमें आगे की विंडशील्ड थोड़ी झुकी हुई है और शीशा काफी बड़ा है, जिससे ड्राइवर और यात्रियों को पर्याप्त खुलापन महसूस होता है। इसमें गोल LED हेडलैंप और हैलोजन टर्न सिग्नल दिए गए हैं।

इसकी सबसे खास बात इसका रियर-व्यू मिरर है, जो छत पर लगा है। यह फीचर आमतौर पर लग्जरी बसों में देखा जाता है। यह मिरर ड्राइवर को सड़क पर ट्रैफिक का चौड़ा नजारा दिखाने में मदद करता है, खासकर तब जब ड्राइवर फुल-बॉडी दरवाजों के कारण बाहर गर्दन निकालकर देख न सके।

प्रीमियम इंटीरियर और फीचर्स

अंदर की बात करें तो इस रिक्शा में साधारण सीटों के बजाय क्विल्टेड डिजाइन वाली कुशन सीटें दी गई हैं। पीछे की बेंच सीट पर तीन यात्री आराम से बैठ सकते हैं। इसमें टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम और वायरलेस चार्जर जैसे प्रीमियम फीचर्स दिए गए हैं। यात्रियों के लिए छत पर AC वेंट्स और एक फिक्स्ड ग्लास रूफ (सनरूफ) दिया गया है, जिससे सर्दी और बारिश के मौसम में सफर का आनंद लिया जा सकता है।

बैटरी और रेंज

ओमेगा सेकी के इस रिक्शा में 8 kWh की NMC बैटरी लगी है। कंपनी के अनुसार, इसकी IDC सर्टिफाइड रेंज 150 किमी है, जबकि वास्तविक स्थितियों में यह लगभग 100 किमी तक चल सकती है। इसकी टॉप स्पीड 50 किमी/घंटा है और इसे पूरी तरह चार्ज होने में करीब 4 घंटे लगते हैं। इसकी लोडिंग क्षमता 950 किलोग्राम और ग्रेडेबिलिटी 30% है। Electric Rickshaw

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जाने प्राचीन मिस्र में अजीबोगरीब टैक्स, जिसकी वजह से बने विश्व के सात अजूबे

प्राचीन मिस्र में टैक्स की दरें नील नदी की बाढ़ पर निर्भर करती थीं। 'निलोमीटर' नामक एक डिवाइस से नदी के पानी का स्तर मापा जाता था। अगर बाढ़ अच्छी आती थी, तो माना जाता था कि फसल अच्छी होगी और टैक्स बढ़ा दिए जाते थे।

Sweat Tax
प्राचीन मिस्र में लगता था 'पसीने पर टैक्स' (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar23 Feb 2026 12:17 PM
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Sweat Tax: प्राचीन मिस्र की सभ्यता कई रहस्यों को अपने आप में समाए हुए है, लेकिन हाल ही में सामने आई एक जानकारी ने सबको हैरान कर दिया है। क्या आप जानते हैं कि प्राचीन मिस्र में 'पसीने पर टैक्स' (Sweat Tax) लगाया जाता था? यह सुनने में भले ही अजीब लगे, लेकिन इतिहासकारों के मुताबिक इसके पीछे की असलियत काफी प्रैक्टिकल और दिलचस्प है।

क्या है 'पसीने का टैक्स'?

दरअसल, जिसे लोग पसीने पर टैक्स कहते हैं, वह असल में जरूरी शारीरिक मेहनत का एक सिस्टम था, जिसे 'कोर्वी' (Corvée) कहा जाता था। उस समय सिक्कों और कागज की करेंसी का प्रचलन नहीं के बराबर था। ऐसे में टैक्स अक्सर पैसे के बजाय अनाज, जानवरों या मेहनत के रूप में वसूला जाता था। अगर कोई व्यक्ति राज्य को फसल या अनाज के रूप में टैक्स नहीं दे सकता था, तो उसे इसके बदले अपना समय और श्रम देना पड़ता था।

पिरामिडों का निर्माण और मजदूरों का सच

प्राचीन मिस्र की अर्थव्यवस्था खेती पर आधारित थी, लेकिन हर किसान के पास हमेशा टैक्स के रूप में अनाज नहीं होता था। ऐसे में राज्य को सरकारी प्रोजेक्ट्स पर काम करने के लिए काबिल आदमियों की जरूरत होती थी। इसी 'कोर्वी सिस्टम' के तहत नागरिक खुदाई, पत्थर तराशने और सामान ढोने जैसे कामों में अपनी मेहनत का भुगतान करते थे।

इतिहासकारों का मानना है कि मिस्र के बड़े आर्किटेक्चर, जैसे कि पिरामिड, मंदिर और नहरें, इसी श्रम प्रणाली पर निर्भर थे। अक्सर यह माना जाता है कि पिरामिड गुलामों ने बनाए थे, लेकिन आधुनिक शोध बताते हैं कि कई मजदूर गुलाम नहीं, बल्कि टैक्स अदा करने वाले मौसमी कामगार थे, जो अपना कर्तव्य निभाने के लिए यह काम करते थे।

नील नदी से था टैक्स का गहरा संबंध

यह भी जानकारी दी गई है कि प्राचीन मिस्र में टैक्स की दरें नील नदी की बाढ़ पर निर्भर करती थीं। 'निलोमीटर' नामक एक डिवाइस से नदी के पानी का स्तर मापा जाता था। अगर बाढ़ अच्छी आती थी, तो माना जाता था कि फसल अच्छी होगी और टैक्स बढ़ा दिए जाते थे। वहीं, कम बाढ़ की स्थिति में फसल को देखते हुए टैक्स में छूट या एडजस्टमेंट किया जाता था। यह प्रणाली मिस्र की आर्थिक व्यवस्था को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाती थी। Sweat Tax

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आम की फसल में मिठास और पैदावार बढ़ाने के लिए फरवरी-मार्च में अपनाएं ये खास उपाय

फरवरी-मार्च में मधुआ कीट, गुझिया कीट और हॉपर जैसे कीट फसल को भारी नुकसान पहुंचाते हैं। ये कीट फूलों और छोटे फलों को झाड़ देते हैं। इसलिए किसानों को फरवरी में ही पहला और दूसरा स्प्रे कर लेना चाहिए।

mango crop
आम के बाग में इस समय करें ये काम (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar23 Feb 2026 11:12 AM
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Mango Bumper Crop : फलों का राजा आम की बंपर पैदावार के लिए फरवरी और मार्च का महीना अहम माना जाता है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इस दौरान पेड़ों पर बौर (फूल) आते हैं और फल बनने की शुरुआत होती है। ऐसे में अगर किसान सही समय पर थोड़ी सी भी लापरवाही करते हैं, तो फूल झड़ने लगते हैं, जिससे फल की पैदावार सीधे तौर पर प्रभावित होती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इन दो महीनों में सही देखभाल और उपाय अपनाने से न केवल फल की गुणवत्ता सुधरती है, बल्कि पैदावार में दोगुना इजाफा भी हो सकता है।

सिंचाई का सही प्रबंधन है सबसे जरूरी

किसानों को सलाह दी गई है कि फरवरी में जब पेड़ों पर बौर निकल रहे हों, तो पानी की मात्रा कम कर देनी चाहिए या फिर सिंचाई बंद कर देनी चाहिए। इस दौरान ज्यादा पानी देने से फूलों की जगह नई पत्तियां निकल आती हैं, जिससे फल कम लगते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, जब फूल झड़कर मटर के दाने के बराबर छोटे फल बन जाएं, तभी हल्की सिंचाई शुरू करनी चाहिए। मार्च में फल बढ़ने के समय नियमित पानी दें, लेकिन ज्यादा मात्रा में नहीं। इसके लिए ड्रिप सिंचाई को सबसे बेहतर विकल्प बताया गया है।

पोषक तत्वों का छिड़काव, मिठास बढ़ाने का राज

पेड़ों को मजबूत बनाने और फलों की मिठास बढ़ाने के लिए संतुलित खाद का होना जरूरी है। किसानों को गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट के साथ ही बोरॉन, जिंक और मैग्नीशियम जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिड़काव करना चाहिए। विशेष रूप से पोटैशियम युक्त उर्वरक (जैसे एनपीके 13:00:45 या पोटैशियम नाइट्रेट) का 3 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करने से फल बेहतर लगते हैं। इस विधि से एक मंजर से 8 से 10 आम तक लग सकते हैं।

कीटों से बचाव के लिए सतर्क रहें

फरवरी-मार्च में मधुआ कीट, गुझिया कीट और हॉपर जैसे कीट फसल को भारी नुकसान पहुंचाते हैं। ये कीट फूलों और छोटे फलों को झाड़ देते हैं। इसलिए किसानों को फरवरी में ही पहला और दूसरा स्प्रे कर लेना चाहिए। कीटों की भारी मात्रा होने पर विशेषज्ञ की सलाह से रासायनिक दवा का उपयोग करें। इसके अलावा, पेड़ के नीचे मल्चिंग (सूखी घास या प्लास्टिक शीट) करने से खरपतवार कम होते हैं और नमी बनी रहती है।

हल्की छंटाई से मिलेगी धूप और हवा

विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि अगर जरूरी हो तो इस दौरान हल्की छंटाई की जा सकती है। पेड़ की पुरानी, सूखी या बीमार टहनियों को हटा देने से पेड़ में धूप और हवा का सही संचार होता है, जिससे फल अच्छे लगते हैं। हालांकि, इस मौसम में भारी छंटाई से बचना चाहिए क्योंकि पेड़ फूलों के दौर में होता है। Mango Bumper Crop

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