
कभी बादशाहों की दावतों की शान रही फिरनी आज भी भारतीय मिठाईयों की दुनिया में अपना एक अलग मकाम रखती है। मलाईदार टेक्सचर, केसर की खुशबू और नट्स का करारा स्वाद इन तीनों का संगम इसे हर मौके के लिए परफेक्ट डेजर्ट बना देता है। जम्मू-कश्मीर की यह पारंपरिक केसरी फिरनी न सिर्फ स्वाद में शाही है बल्कि इसका इतिहास भी उतना ही दिलचस्प है। कहा जाता है कि फिरनी की शुरुआत फारस (ईरान) में हुई थी और मुगल काल में यह भारत आई। मुगल रसोइयों ने इसमें देसी रंग भरे, जिसमें दूध, चावल, केसर और इलायची का संगम हुआ। धीरे-धीरे यह मिठाई कश्मीर, पंजाब और उत्तर भारत के कई हिस्सों की पहचान बन गई। खासतौर पर कश्मीरी फिरनी में केसर और इलायची का जो मेल है, उसे इसकी आत्मा कहा जा सकता है। Phirni Recipe
हालांकि फिरनी और खीर दोनों चावल व दूध से बनती हैं, लेकिन फिरनी का स्वाद खीर से काफी अलग होता है। फर्क ये कि फिरनी को हमेशा ठंडा परोसा जाता है, और अगर इसे मिट्टी के बर्तन में जमाया जाए तो इसका स्वाद दोगुना बढ़ जाता है। Phirni Recipe
चावल – आधा कप (लगभग 100 ग्राम)
फुल क्रीम दूध – 1 लीटर
चीनी – ¾ कप (करीब 75 ग्राम)
केसर – 15 से 16 धागे
हरी इलायची – 3 से 4 (कूटी हुई)
पिस्ता और काजू – 10 से 12-12 (बारीक कटे हुए)
इच्छानुसार बादाम या अखरोट भी मिला सकते हैं
सबसे पहले चावल को अच्छे से धोकर आधे घंटे के लिए पानी में भिगो दें। इस बीच केसर को हल्के गुनगुने दूध में भिगोकर रख दें ताकि उसका रंग और खुशबू दूध में घुल जाए। अब भीगे हुए चावलों को मिक्सर में दरदरा पीस लें और सारे नट्स काटकर तैयार रखें।
एक भारी तले वाले पैन में दूध उबालें।
दूध में उबाल आते ही पिसे हुए चावल डालें और लगातार चलाते रहें ताकि तली में चिपके नहीं।
धीमी आंच पर इसे तब तक पकाएं जब तक मिश्रण गाढ़ा न हो जाए।
अब इसमें केसर वाला दूध और चीनी डालकर अच्छी तरह मिलाएं।
आखिर में इलायची पाउडर और कटे हुए नट्स मिलाकर गैस बंद कर दें। Phirni Recipe
फिरनी को मिट्टी के कुल्हड़ों या छोटे बर्तनों में डालें और कम से कम 2-3 घंटे के लिए फ्रिज में ठंडा करें। सर्व करने से पहले ऊपर से पिस्ता या केसर से गार्निश करें। अगर आप कुछ नया ट्राई करना चाहें तो बादाम फिरनी, गुलाब फिरनी, या अखरोट फिरनी जैसी वैरिएंट्स भी बना सकते हैं। हर एक में एक अलग स्वाद और खुशबू मिलेगी। Phirni Recipe