
कभी-कभी थाली में वही पुरानी दाल ऊबाऊ लगने लगती है, लेकिन जरा सोचिए अगर उस थाली में गढ़वाल की मशहूर चौंसा दाल परोसी जाए तो? उत्तराखंड की यह पारंपरिक दाल सिर्फ भोजन नहीं, बल्कि एक ऐसा स्वाद है जो सीधे पहाड़ों की खुशबू और मिट्टी का एहसास आपके ज़ायके में घोल देता है। स्थानीय लोग इसे इतने चाव से खाते हैं कि मानो हर बाइट में संस्कृति बसती हो। और यकीन मानिए, जब एक बार आपने चौंसा दाल का जायका चख लिया, तो पनीर की सबसे रिच सब्ज़ी भी आपके सामने फीकी लगने लगेगी। Chaunsa Daal Recipe
चौंसा दाल की सबसे बड़ी खूबी यही है कि यह स्वाद में लाजवाब होने के साथ-साथ सेहत का खजाना भी है। यह दाल हल्की, पौष्टिक और बेहद जल्दी पचने वाली होती है, इसलिए इसे रोजाना के खाने में शामिल करना एकदम फायदेमंद माना जाता है। गढ़वाल और कुमाऊं की रसोई में इसका अपना अलग ही मुकाम है। खासकर ठंडी पहाड़ी हवाओं के बीच जब चौंसा दाल चावल के साथ परोसी जाती है, तो यह शरीर को ऊर्जा और आत्मा को सुकून दोनों देती है।
चौंसा दाल – 1 कप (रातभर भिगोई हुई)
प्याज – 1 (बारीक कटा)
लहसुन – 6-7 कलियां
अदरक – 1 इंच टुकड़ा
टमाटर – 1 (बारीक कटा)
घी – 2-3 बड़े चम्मच
जीरा – 1 चम्मच
हल्दी पाउडर – आधा चम्मच
धनिया पाउडर – 1 चम्मच
लाल मिर्च पाउडर – आधा चम्मच
गरम मसाला – आधा चम्मच
नमक – स्वादानुसार
पानी – 2-3 कप
हरी धनिया – सजावट के लिए
पहला चरण: भीगी हुई चौंसा दाल को धोकर प्रेशर कुकर में डालें। इसमें स्वादानुसार नमक और 2 कप पानी मिलाकर 4-5 सीटी आने तक पकाएं। ध्यान रहे, दाल को पूरी तरह गलाना नहीं है, इसे हल्का दानेदार ही रखना बेहतर है।
दूसरा चरण: एक पैन में घी गरम करें। इसमें जीरा डालें और चटकने पर अदरक-लहसुन भूनें। अब इसमें बारीक कटा प्याज डालकर सुनहरा होने तक भूनें। टमाटर डालें और नरम होने तक पकाएं। इसके बाद हल्दी, धनिया और लाल मिर्च पाउडर डालकर अच्छे से मसाले को भून लें।
तीसरा चरण: अब इसमें उबली हुई दाल और उसका पानी डालकर अच्छी तरह मिलाएं। अगर दाल गाढ़ी लगे तो थोड़ा गरम पानी डाल सकते हैं। धीमी आंच पर पकने दें ताकि मसाले पूरी तरह दाल में समा जाएं। आखिर में गरम मसाला और हरी धनिया डालकर दाल को उतार लें। Chaunsa Daal Recipe