अगर आप भी शराब के आदि हैं तो अब आपको ठहरने की सख्त जरूरत है क्योंकि जिस खतरनाक पदार्थ को आप शौक और मौज से पीते हैं वो आपके लिए जानलेवा साबित हो सकता है। इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि आखिर लोगों को शराब की आदत कैसे लग जाती है और आपकी यह गंदी आदत कैसे लत में तब्दील हो जाती है।

आजकल लोगों के लिए शराब पीना एक आम सा शौक बन चुका है। लोग शराब के इस कदर आदी हो रहे हैं जैसे शराब कोई नशीली पदार्श न होकर सॉफ्ट ड्रिंक हो। हैरानी की बात तो यह है कि बहुत से लोगों ने शराब को तनाव मिटाने, रिलैक्स महसूस करने या दोस्तों के साथ मजा लेने का जरिया बना लिया है, लेकिन हकीकत में शराब न सिर्फ आपके दिमाग की पूरी केमिस्ट्री के साथ खेलती है बल्कि आपके स्वास्थ्य को भी बेहद नुकसान पहुंचाती है। आज हम जानेंगे कि लोगों को शराब की आदत कैसे लग जाती है और यही आदत लत में कैसे बदल जाती है। इसके अलावा आप जानेंगे कि जब आप शराब पीना शुरू करते हैं तो आपका दिमाग किस तरह से खेलना शुरू करता है।
जब भी कोई इंसान शराब, बियर या व्हिस्की पीता है तो उसमें मौजूद एथनॉल पेट से सीधे खून में अब्जॉर्ब हो जाता है और कुछ ही मिनट में खून इसे लेकर दिमाग तक पहुंच जाता है। हमारे दिमाग के अंदर न्यूरॉन नाम की नर्व सेल्स मौजूद होती हैं जो आपस में सिग्नल भेजती है, लेकिन शराब इन सिग्नल्स को धीमा कर देती है। इसी वजह से शराब पीने के बाद बोलने में लड़खड़ाहट, फैसले लेने में दिक्कत, शरीर का असंतुलन और सोचने-समझने की क्षमता कम होने जैसी स्थितियां पैदा होती हैं। जिसे लोग आम भाषा में नशा चढ़ना या सुरूर आना भी कहते हैं।
शराब सिर्फ सिग्नल्स को स्लो नहीं करती बल्कि दिमाग में डोपामीन नाम के हार्मोन को भी बढ़ा देती है जो हमें “फील गुड” वाला एहसास देता है। यही वजह है कि शराब पीने के बाद मूड अच्छा महसूस होता है और दिमाग इसे एक रिवॉर्ड की तरह लेने लगता है। धीरे-धीरे दिमाग सीख जाता है कि ये एहसास अच्छा है और इसे दोबारा पाने के लिए फिर शराब चाहिए। बस यहीं से लोगों की आदत, लत में तब्दील होनी शुरू हो जाती है।
अगर शराब कभी-कभार ली जाए तो दिमाग और शरीर इसे संभाल लेते हैं लेकिन यदि रोजाना शराब पीने की आदत बन जाए तो दिमाग का अपना नेचुरल केमिकल सिस्टम बिगड़ने लगता है। दिमाग अपना डोपामीन खुद बनाना कम कर देता है और उसे खुश होने के लिए शराब जरूरी लगने लगती है। इंसान बिना शराब के कमजोर महसूस करने लगता है और शराब को अपनी जरूरत बना लेता है। जिसके कारण शराब छोड़ना बेहद मुश्किल हो जाता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार हर साल करीब 3 लाख लोगों की मौत शराब से जुड़ी वजहों से होती है। ये मौतें सिर्फ नशे में हादसों की वजह से नहीं बल्कि लिवर डैमेज, हार्ट प्रॉब्लम्स, दिमागी नुकसान और मानसिक विकारों जैसी स्थितियों के कारण भी होती हैं। अब समझने वाली बात ये है कि शराब सिर्फ शरीर को नहीं बल्कि आपके दिमाग की सोचने-समझने की क्षमता, खुद को कंट्रोल करने की शक्ति और प्राकृतिक केमिकल बैलेंस को भी नुकसान पहुंचाती है इसलिए इस खतरनाक पदार्थ से दोस्ती करने से पहले हजारों बार सोचना बेहद जरूरी है।