होली में भांग का सेवन एक पुरानी परंपरा है। इसका संबंध भगवान शिव और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा है। प्राचीन ग्रंथों में भांग को ‘विजय’ कहा गया है और इसे पांच पवित्र पौधों में से एक माना जाता है। भांग बनाना पारंपरिक कला है जिसमें इसके पत्तों से ठंडाई, बर्फी और पकौड़े बनाए जाते हैं।

होली और भांग का रिश्ता भारत में सदियों पुराना है। यह सिर्फ एक नशे का माध्यम नहीं बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है। भांग का जिक्र प्राचीन ग्रंथों में मिलता है और इसे वेदों में ‘विजय’ कहा गया है। इसे धरती के पांच सबसे पवित्र पौधों में से एक माना जाता है। होली के त्योहार में भांग का सेवन भगवान शिव के प्रसाद के रूप में किया जाता है। इस आर्टिकल में जानेंगे कि भांग की उत्पत्ति कैसे हुई, यह कैसे बनाई जाती है, इसका सेवन क्या कानूनी रूप से वैध है और इसे सुरक्षित रूप से कैसे लिया जाए।
भांग का संबंध भगवान शिव से माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान विष निकला था और भगवान शिव ने उसे पी लिया। विष की गर्मी शांत करने के लिए उन्होंने भांग का सेवन किया तभी से यह शिव का प्रिय बन गया। एक और मान्यता के अनुसार, देवताओं के अमृत की कुछ बूंदें धरती पर गिरीं और वहां से भांग का पौधा उगा।
होली वसंत ऋतु का त्योहार है। इस समय मौसम बदलता है और भांग को आयुर्वेद में औषधि माना जाता है। शरीर को ठंडक देती है और पाचन में मदद करती है। मध्यकाल में भांग का सेवन होली के दौरान लोकप्रिय हुआ और धीरे-धीरे यह उत्सव का हिस्सा बन गई। इसे लेने वाले भगवान शिव का प्रसाद मानते हैं और यह मस्ती और उल्लास का प्रतीक बन गई।
भारत में भांग का कानूनी स्थिति थोड़ी जटिल है। Narcotic Drugs and Psychotropic Substances (NDPS) Act, 1985 के अनुसार गांजा और चरस पर प्रतिबंध है। हालांकि, भांग के पत्तों और बीजों का उपयोग वैध है। उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में भांग की सरकारी दुकानें हैं। व्यावसायिक उत्पादन के लिए सरकार से लाइसेंस लेना आवश्यक है। बिना लाइसेंस भांग की खेती करना अपराध है।
भांग बनाने की प्रक्रिया पारंपरिक कला है। भांग के पत्तों को साफ किया जाता है और डंठल और बीज अलग कर दिए जाते हैं। पत्तियों को पानी में भिगोकर सिल-बट्टे पर महीन पेस्ट बनाया जाता है। इसे सूती कपड़े में रखकर छाना जाता है और दूध, मेवे, चीनी और मसालों के साथ मिलाया जाता है। ठंडाई, पकौड़े, बर्फी और पहाड़ी क्षेत्रों में चटनी के रूप में भांग का सेवन किया जाता है।
भांग का सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए। अधिक मात्रा में लेने से चक्कर, घबराहट और याददाश्त में कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। बच्चों और गर्भवती महिलाओं को भांग से दूर रहना चाहिए। आयुर्वेद के अनुसार भांग दर्द निवारक है और तनाव कम करने में सहायक है लेकिन अतिशय सेवन हानिकारक हो सकता है।
भांग का सेवन नशा नहीं बल्कि एक सांस्कृतिक परंपरा और भगवान शिव के प्रति श्रद्धा का प्रतीक है। होली का त्योहार रंगों और मस्ती के साथ संयम का भी है।