डॉक्टरों के अनुसार ज्यादातर मामलों में पीरियड्स से पहले ब्रेस्ट में दर्द होना एक सामान्य हार्मोनल बदलाव का हिस्सा होता है। मासिक धर्म से पहले शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन के स्तर में बदलाव होता है जिसका असर सीधे ब्रेस्ट टिशू पर पड़ता है।

कई महिलाओं को हर महीने पीरियड्स से पहले ब्रेस्ट में दर्द, भारीपन या संवेदनशीलता महसूस होती है। यह समस्या इतनी आम है कि लगभग हर दूसरी महिला कभी न कभी इसका अनुभव करती है। ऐसे में कई बार मन में डर भी बैठ जाता है कि कहीं यह ब्रेस्ट कैंसर का संकेत तो नहीं है। खासकर तब जब ब्रेस्ट में दर्द के साथ हल्का सूजन या गांठ जैसा महसूस होने लगे तो चिंता और बढ़ जाती है। हालांकि, डॉक्टरों के अनुसार ज्यादातर मामलों में पीरियड्स से पहले ब्रेस्ट में दर्द होना एक सामान्य हार्मोनल बदलाव का हिस्सा होता है। मासिक धर्म से पहले शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन के स्तर में बदलाव होता है जिसका असर सीधे ब्रेस्ट टिशू पर पड़ता है। यही कारण है कि इन दिनों में ब्रेस्ट में भारीपन, दर्द या संवेदनशीलता महसूस हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर हर महीने पीरियड्स से पहले ब्रेस्ट में दर्द होता है और पीरियड शुरू होने के बाद यह दर्द धीरे-धीरे कम हो जाता है तो आमतौर पर इसे ब्रेस्ट कैंसर का संकेत नहीं माना जाता है। इस स्थिति को प्री-मेंस्ट्रुअल सिंड्रोम (PMS) का हिस्सा माना जाता है जो हार्मोनल बदलाव के कारण होता है। कई महिलाओं को इन दिनों में ब्रेस्ट इतना संवेदनशील हो जाता है कि हल्का सा छूने पर भी दर्द महसूस होता है। यह पूरी तरह सामान्य स्थिति होती है और ज्यादातर मामलों में चिंता की बात नहीं होती। हालांकि अगर दर्द लगातार बना रहे या हर महीने बढ़ता जाए तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर होता है।
पीरियड्स से पहले हार्मोनल बदलाव के अलावा भी कई कारण हैं जिनकी वजह से ब्रेस्ट में दर्द महसूस हो सकता है। जैसे गलत फिटिंग की ब्रा पहनना, ज्यादा कैफीन का सेवन, तनाव, हार्मोनल दवाइयां या शरीर में पानी रुकना। इन सभी कारणों से भी ब्रेस्ट में भारीपन और दर्द की समस्या बढ़ सकती है। इसके अलावा कुछ महिलाओं में पीरियड्स से पहले शरीर में सूजन बढ़ जाती है जिसका असर ब्रेस्ट पर भी दिखाई देता है। यही वजह है कि कई महिलाओं को इन दिनों में ब्रेस्ट पहले से ज्यादा भारी महसूस होते हैं।
हालांकि हर दर्द कैंसर का संकेत नहीं होता लेकिन कुछ लक्षण ऐसे होते हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर ब्रेस्ट में दर्द के साथ कोई सख्त गांठ महसूस हो, ब्रेस्ट की त्वचा में बदलाव दिखे, निप्पल से कोई असामान्य डिस्चार्ज हो या ब्रेस्ट के आकार में अचानक बदलाव आए तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है। अगर दर्द पीरियड्स से जुड़ा नहीं है और लगातार बना रहता है, तो भी इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। समय पर जांच करवाने से किसी भी समस्या का सही कारण पता लगाया जा सकता है।
डॉक्टरों का कहना है कि सभी महिलाओं को नियमित रूप से सेल्फ ब्रेस्ट एग्जामिनेशन करना चाहिए। इससे ब्रेस्ट में होने वाले किसी भी बदलाव को समय रहते पहचाना जा सकता है। पीरियड खत्म होने के 4 से 5 दिन बाद ब्रेस्ट की जांच करना सबसे बेहतर समय माना जाता है क्योंकि उस समय ब्रेस्ट कम संवेदनशील होते हैं। नियमित जांच से महिलाओं को अपने शरीर के सामान्य बदलावों को समझने में मदद मिलती है और किसी भी असामान्य लक्षण को जल्दी पहचानना आसान हो जाता है।
पीरियड्स से पहले ब्रेस्ट में दर्द और भारीपन आमतौर पर एक सामान्य समस्या है और ज्यादातर मामलों में यह हार्मोनल बदलाव के कारण होता है। इसलिए हर बार इसे ब्रेस्ट कैंसर से जोड़कर घबराने की जरूरत नहीं है। हालांकि, अपने शरीर में होने वाले बदलावों पर ध्यान देना और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लेना हमेशा सही कदम होता है। जागरूकता और नियमित जांच से आप अपने स्वास्थ्य को बेहतर तरीके से संभाल सकती हैं और अनावश्यक डर से भी बच सकती हैं।