
Muslim bride and groom : हल्दी (turmeric) बड़े काम की चीज होती है। दूध में मिलाकर पीओ तो शरीर का बदन दूर कर देते है और चूने में मिलाकर लगाओ तो जख्म भर देती है। हल्दी (turmeric) को मसालों के साथ साथ अन्य वैदिक रीति रिवाजों, पूजा पाठ में प्रयोग किया जाता है। हिंदू धर्म में जब किसी लड़के (Boy) या लड़की (Girl) की शादी (marriage) होती है तो शादी से एक या दो दिन पहले हल्दी (turmeric) लगाई जाती है। इसे हलद बान की रस्म बोला जाता है, जो प्रत्येक परिवार में अदा की जाती है, लेकिन क्या आपको पता है कि मुसलमानों में भी दूल्हा दूल्हन ( bride -groom) को हल्दी (turmeric) लगाई जाती है और क्यों लगाई जाती है।
हिंदुओं में शादी से पहले दूल्हा-दुल्हन को हल्दी लगाई जाती है और इसके लिए बाकायदा रस्म होती है। ऐसा करने के पीछे धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों ही कारण हैं। दरअसल, विश्व के पालनहार भगवान विष्णु को हल्दी बहुत प्रिय है। उनकी पूजा में हल्दी का अनिवार्य तौर पर उपयोग होता है इसलिए हल्दी को बेहद शुभ माना है। इसके अलावा सुखद वैवाहिक जीवन के लिए गुरु ग्रह का शुभ होना जरूरी है और हल्दी का संबंध गुरु से है। मान्यता है कि दूल्हा-दुल्हन का हल्दी लगाने से नव दंपत्ति का आगामी जीवन शुभ और सुखद होगा।
वैज्ञानिक नजरिए से बात करें तो हल्दी एंटी बायोटिक होती है और कई तरह के इंफेक्शन से बचाव करती है। यह चेहरे की खूबसूरती भी निखारती है। इसलिए दूल्हा-दुल्हन को शादी से पहले हल्दी का उबटन लगाया जाता है।
अब आपको बता दें कि मुस्लिम समुदाय में भी शादी से पहले दूल्हा दुल्हन को हल्दी लगाई जाती है। इसके लिए बाकायदा रस्म होती है। मुसलमानों में इस रस्म को मायो कहते हैं। इसमें दुल्हन को पीले रंग के कपड़े और फूलों के गहनें पहनाए जाते हैं। फिर उसे हल्दी और मेहंदी लगाई जाती है। इसी तरह दूल्हे की भी ये रस्में होती हैं। मुसलमानों में मायो की रस्म शादी से 2-3 दिन पहले की जाती है।