महिलाओं के लिए Solo Travel के लिए टॉप 10 देश, भारत की स्थिति हिला देगी दिमाग

हाल ही में जारी एक नई स्टडी में दुनिया के सबसे सुरक्षित देशों की लिस्ट सामने आई है। इस लिस्ट में नॉर्डिक और पश्चिमी यूरोपीय देश टॉप पर हैं। वहीं भारत की रैंक 131वें स्थान पर रही यानी टॉप 100 में जगह नहीं बना पाया।

Women Solo Travel
दुनिया के सबसे सुरक्षित देश
locationभारत
userअसमीना
calendar14 Mar 2026 02:51 PM
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आजकल महिलाएं अकेले यात्रा करना पसंद कर रही हैं लेकिन सबसे बड़ी चिंता हमेशा यही रहती है कि कौन से देश में यात्रा करना सुरक्षित है। हाल ही में जारी एक नई स्टडी में दुनिया के सबसे सुरक्षित देशों की लिस्ट सामने आई है। इस लिस्ट में नॉर्डिक और पश्चिमी यूरोपीय देश टॉप पर हैं। वहीं भारत की रैंक 131वें स्थान पर रही यानी टॉप 100 में जगह नहीं बना पाया।

WPS इंडेक्स 2025-26

द वुमन, पीस एंड सिक्योरिटी (WPS) इंडेक्स 2025-26 के आधार पर दुनिया के 181 देशों की महिलाओं के लिए सुरक्षा के लिहाज से रैंकिंग तैयार की गई है। इस इंडेक्स में देशों का मूल्यांकन तीन मुख्य पैमानों पर किया गया है जिनमें महिलाओं के खिलाफ हिंसा का स्तर, समाज में महिलाओं की सुरक्षा और लैंगिक समानता वाली नीतियां शामिल हैं। इसके आधार पर नॉर्डिक और पश्चिमी यूरोपीय देश महिलाओं के लिए सबसे सुरक्षित माने गए हैं और अकेले यात्रा करने वाली महिलाओं के लिए ये सबसे भरोसेमंद गंतव्य हैं।

महिलाओं के लिए टॉप 5 सुरक्षित देश

(Top 5 Safest Countries for Women)

1. डेनमार्क

डेनमार्क महिलाओं के लिए सबसे सुरक्षित देश है। यहां कानून, सरकारी संस्थान और सामाजिक व्यवस्था महिलाओं की सुरक्षा के लिए बहुत मजबूत हैं। अकेले यात्रा करने वाली महिलाएं यहां निश्चिंत होकर घूम सकती हैं।

2. नॉर्वे

नॉर्वे लैंगिक समानता और सुरक्षा के मामले में हमेशा टॉप पर रहता है। यहां भेदभाव के खिलाफ मजबूत नीतियां और सार्वजनिक सुरक्षा की अच्छी व्यवस्था है।

3. आइसलैंड

आइसलैंड महिलाओं की प्रगतिशील नीतियों और कार्यस्थल पर भागीदारी के लिए जाना जाता है। अपराध के कम मामले और कड़े कानून इसे महिलाओं के लिए सुरक्षित बनाते हैं।

4. स्वीडन

स्वीडन में लैंगिक समानता और पीड़ितों के न्याय पर जोर दिया जाता है। विकसित सार्वजनिक बुनियादी ढांचा और समावेशी संस्कृति इसे अकेले यात्रा करने वाली महिलाओं के लिए बेहतरीन बनाती है।

5. फिनलैंड

फिनलैंड शिक्षा, सामाजिक समानता और सुरक्षा के मामले में शानदार प्रदर्शन करता है। महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी और मजबूत कानूनी सुरक्षा इसे एक स्वागत योग्य और सुरक्षित देश बनाती हैं।

बाकी के सुरक्षित देश

टॉप 10 में लक्जमबर्ग, बेल्जियम, नीदरलैंड्स, ऑस्ट्रिया और न्यूजीलैंड भी शामिल हैं। ये सभी देश महिलाओं के लिए यात्रा और रहने में सुरक्षित माहौल प्रदान करते हैं। भारत इस लिस्ट में 131वें स्थान पर है। इसका मतलब है कि अकेले यात्रा करने वाली महिलाओं के लिए यहां चुनौतियां हैं। हालांकि हाल के वर्षों में सुरक्षा के प्रयास और जागरूकता बढ़ी है लेकिन वैश्विक स्तर पर यह अभी भी शीर्ष 100 में नहीं आया।

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तेजी से बढ़ रहा है दूसरी शादी का ट्रेंड, 36 को छोड़कर सिर्फ 1 गुण खोज रहे लोग

हाल की रिपोर्ट्स बताते हैं कि अब शादी की औसत उम्र बढ़कर 29 साल हो गई है। साथ ही, दूसरी शादी को लेकर भी लोगों की सोच में बड़ा बदलाव आया है। अब जाति या आयु से ज्यादा पार्टनर की समझ और आपसी कम्पैटिबिलिटी को महत्व दिया जाता है।

Marriage Trends
Remarriage Trends in India
locationभारत
userअसमीना
calendar14 Mar 2026 01:34 PM
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भारत में शादी अब केवल परंपरा या समाज का दबाव नहीं रही। आज के युवा पहले अपना करियर और मानसिक तैयारी पूरी करते हैं और उसके बाद शादी के बारे में सोचते हैं। हाल की रिपोर्ट्स बताते हैं कि अब शादी की औसत उम्र बढ़कर 29 साल हो गई है। साथ ही, दूसरी शादी को लेकर भी लोगों की सोच में बड़ा बदलाव आया है। अब जाति या आयु से ज्यादा पार्टनर की समझ और आपसी कम्पैटिबिलिटी को महत्व दिया जाता है।

शादी की औसत उम्र बढ़ी

पहले भारत में शादी जल्दी अक्सर 27 साल की उम्र तक हो जाती थी लेकिन अब युवा शादी के लिए सोच-समझकर कदम उठाते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, आधे से ज्यादा सिंगल्स 29 साल की उम्र में पार्टनर सर्च करना शुरू करते हैं। इसका कारण है करियर, वित्तीय स्थिति और मानसिक रूप से शादी के लिए तैयार होना। अब शादी जल्दबाजी का फैसला नहीं रही बल्कि समझदारी और तैयारी के बाद लिया जाने वाला कदम बन गई है।

दूसरी शादी का ट्रेंड

सिर्फ शादी की उम्र ही नहीं बल्कि दूसरी शादी (रीमैरिज) का ट्रेंड भी बढ़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, 2016 में दूसरी शादी के मामले 11 प्रतिशत थे जो 2025 तक बढ़कर 16 प्रतिशत हो गए हैं। इसका मतलब है कि अब हर छह सफल शादियों में से एक दूसरी शादी है। पहले जहां तलाक या दूसरी शादी को समाज में गलत माना जाता था अब लोग इसे सामान्य और स्वीकार्य समझ रहे हैं।

दूसरी शादी अब शर्म की बात नहीं

पहले दूसरी शादी को लेकर कई सामाजिक मिथक थे। लोग सोचते थे कि शादी टूटने के बाद नए रिश्ते में मुश्किलें होंगी। लेकिन अब तलाकशुदा प्रोफाइल में दिलचस्पी दिखाने वाले लोगों में 15 प्रतिशत ऐसे हैं जिन्होंने कभी शादी नहीं की। यह बताता है कि दूसरी शादी को लेकर पहले जो डर और गलतफहमी थी अब काफी हद तक खत्म हो चुकी है।

शादी में कम्पैटिबिलिटी सबसे जरूरी

पहले शादी में जाति और सामाजिक स्थिति को सबसे ज्यादा अहमियत दी जाती थी लेकिन अब करीब 90 प्रतिशत लोगों का मानना है कि सही स्वभाव और आपसी समझ वाला पार्टनर होना उम्र, जाति या कमाई से ज्यादा जरूरी है। मेट्रो शहरों में यह सोच और भी बढ़ गई है। अब लोग अपनी मैट्रिमोनियल प्रोफाइल खुद बनाते और संभालते हैं पहले यह सिर्फ 67 प्रतिशत था, अब 77 प्रतिशत लोग इसे खुद मैनेज कर रहे हैं। हालांकि अब शादी का प्रोसेस सेल्फ-ड्रिवन है परिवार की भूमिका पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। 69 प्रतिशत लोग मानते हैं कि माता-पिता के बीच में होने से प्रोसेस आसान और सुरक्षित बन जाता है। इसका मतलब है कि परिवार सहयोग देते हैं लेकिन फैसला अब पूरी तरह व्यक्ति का अपना है।

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इन देशों में महिलाओं को मिलती है Period Leave, देखें पूरी लिस्ट

Menstrual Leave: कई जगह कामकाजी महिलाएं पीरियड्स के दौरान दर्द और असुविधा झेलती हैं लेकिन कुछ देशों ने इसके लिए खास कानून बनाए हैं। भारत में सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में पीरियड्स लीव की याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया।

Period Leave
Menstrual Leave
locationभारत
userअसमीना
calendar14 Mar 2026 11:08 AM
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महिलाओं की सेहत और काम के बीच संतुलन बनाए रखना हर देश के लिए चुनौती है। कई जगह कामकाजी महिलाएं पीरियड्स के दौरान दर्द और असुविधा झेलती हैं लेकिन कुछ देशों ने इसके लिए खास कानून बनाए हैं। भारत में सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में पीरियड्स लीव की याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। कोर्ट का कहना है कि ऐसा फैसला महिलाओं के लिए नुकसानदेह हो सकता है। इस आर्टिकल में हम आपको दुनिया के उन देशों के बारे में बताएंगे जहां महिलाओं को पीरियड्स के दौरान छुट्टी मिलती है।

इंडोनेशिया: 2 दिन की पेड लीव

इंडोनेशिया में 1948 से महिलाओं को महीने में 2 दिन की पेड पीरियड लीव का अधिकार है। यह नियम महिलाओं के स्वास्थ्य और कामकाजी क्षमता को ध्यान में रखकर बनाया गया है।

जापान: सेइरी क्युका का प्रावधान

जापान में 1947 से ‘सेइरी क्युका’ (Seiri Kyuka) लागू है। इसका मतलब है मासिक धर्म के दौरान मिलने वाली छुट्टी। हालांकि, कंपनियों पर यह निर्भर करता है कि वे इस दौरान पेड लीव देंगी या नहीं।

ताइवान: आधी सैलरी के साथ 3 दिन की छुट्टी

ताइवान में ‘जेंडर इक्वैलिटी इन एम्प्लॉयमेंट एक्ट’ के तहत महिलाओं को साल में 3 दिन की पीरियड लीव मिलती है। इस दौरान उन्हें आधी सैलरी का भुगतान किया जाता है।

दक्षिण कोरिया: 1 दिन की छुट्टी और बोनस

दक्षिण कोरिया में 2001 से महिलाओं को पीरियड्स के दौरान 1 दिन की छुट्टी मिलती है। अगर कोई महिला यह छुट्टी नहीं लेती तो कंपनियां इसका एक्स्ट्रा पैसा भी देती हैं।

जाम्बिया: मदर्स डे के नाम पर लीव

जाम्बिया में पीरियड्स लीव को ‘मदर्स डे’ कहा जाता है। 2015 में कानून बनने के बाद महिलाएं महीने में 1 दिन की छुट्टी बिना सूचना दिए ले सकती हैं।

वियतनाम: रोजाना ब्रेक या 3 दिन की छुट्टी

वियतनाम में कामकाजी महिलाओं को रोजाना 30 मिनट का ब्रेक या साल में 3 दिन की छुट्टी दी जाती है। इसका मकसद महिलाओं को काम के दौरान आराम और स्वास्थ्य का ध्यान रखना है।

स्पेन: सरकार उठाती है खर्च

स्पेन ने 2023 में पीरियड्स लीव कानून बनाया। महिलाओं को क्रैंप और दर्द जैसी स्थितियों में 3 से 5 दिन तक छुट्टी मिलती है और इस दौरान खर्च सरकार उठाती है।

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