
भारतीय रसोई में मसाले सिर्फ खाने का स्वाद बढ़ाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दादी-नानी के देसी नुस्खों में भी इनका अहम योगदान है। हल्दी, धनिया, काली मिर्च, जीरा या हींग—हर मसाले की अपनी खासियत है। लेकिन अफसोस, आजकल बाजार में मिलने वाले मसालों में मिलावट आम हो गई है, जो स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक असर डाल सकती है। आइए जानते हैं कि कैसे आप अपने मसालों में मिलावट की पहचान कर सकते हैं और अपने खाने को शुद्ध रख सकते हैं। How To identify Pure Spices
काली मिर्च न सिर्फ स्वाद बढ़ाती है बल्कि इम्यूनिटी को भी मजबूत करती है। लेकिन कई बार इसमें पपीते के बीज मिलाए जाते हैं, जो दिखने में काली मिर्च जैसे ही लगते हैं। पहचान का आसान तरीका है—पानी में काली मिर्च डालें। असली काली मिर्च पानी की सतह पर नहीं तैरेगी और तली में बैठ जाएगी, जबकि पपीते के बीज ऊपर तैरते रहेंगे।
पिसी हल्दी में कभी-कभी सिंथेटिक रंग मिलाए जाते हैं। इसका परीक्षण करने के लिए एक गिलास पानी में चम्मच भर हल्दी घोलें। शुद्ध हल्दी पानी में बैठने के बाद हल्का पीला रंग छोड़ती है। अगर हल्दी में रंग मिलाया गया हो, तो पानी का रंग गहरा और असमान दिखेगा।
धनिया पाउडर में मिलावट भी आम है। इसे शुद्ध या मिलावटी पहचानने के लिए हल्दी जैसी विधि अपनाएं। पानी में घोलने के बाद शुद्ध धनिया धीरे-धीरे पानी में बैठ जाता है, जबकि मिलावटी हिस्से ऊपर तैरते रहते हैं। गंदापन या रंग असमान दिखना भी मिलावट का संकेत है।
हींग की खुशबू खाने का स्वाद दोगुना कर देती है और यह पाचन के लिए भी फायदेमंद है। शुद्ध हींग की पहचान के लिए बर्न टेस्ट करें। एक चम्मच हींग लेकर उसे जलाएं—अगर यह पूरी तरह राख में बदल जाए तो शुद्ध है। मिलावटी हींग आसानी से जलती नहीं।
जीरा का इस्तेमाल दाल, सब्जियों और गरम मसालों में किया जाता है। मिलावट वाले जीरे का रंग हथेली पर रगड़ने पर निकल आता है। अगर रंग छोड़ रहा है, तो इसका मतलब है कि इसमें सिंथेटिक कलर मिलाया गया है। How To identify Pure Spices