Happy Holi Wishes 2026: अपनों को भेजें ये रंगीन गुड मॉर्निंग मैसेज

Happy Holi Wishes in Hindi: होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह प्यार, अपनापन और खुशियों का संदेश भी है। इस होली की सुबह अपने अपनों को गुड मॉर्निंग मैसेज भेजकर उनके दिन को और भी खास बनाएं। आप अपने दोस्तों और परिवार के लिए रंगों से भरे प्यारे संदेश, स्टेटस और शुभकामनाएं चुन सकते हैं।

happy holi wishes in hindi
Happy Holi Wishes 2026
locationभारत
userअसमीना
calendar03 Mar 2026 03:44 PM
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होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं है बल्कि यह रिश्तों को नया रंग देने का मौका भी है। सर्दियों की विदाई और बसंत के स्वागत के साथ यह पर्व खुशियों, उमंग और अपनापन लेकर आता है। 2 मार्च को होलिका दहन के बाद 4 मार्च को रंगवाली होली मनाई जाएगी। ऐसे में होली से एक दिन पहले की सुबह खास बन जाती है। यह सुबह केवल एक नई तारीख की शुरुआत नहीं होती बल्कि मन में उमंग, घर में तैयारियां और दिल में अपनों से मिलने की चाह भी जगाती है।

होली से पहले की सुबह क्यों खास होती है?

होली से एक दिन पहले की सुबह में घरों में हलचल और खुशी का माहौल रहता है। लोग अपने घर को सजाते हैं, रंग और गुलाल तैयार करते हैं और अपने प्रियजनों के लिए संदेश सोचते हैं। यह सुबह अपने आप में एक नई उम्मीद और प्यार भरी शुरुआत लेकर आती है। अगर आप इस खास सुबह अपने अपनों को हैप्पी होली गुड मॉर्निंग संदेश भेजते हैं, तो यह उनके दिन को और भी खुशनुमा बना सकता है।

प्यारे गुड मॉर्निंग होली संदेश

यहां हमने कुछ गुड मॉर्निंग मैसेज और स्टेटस शेयर किए हैं जिन्हें आप अपने प्रियजनों को भेज सकते हैं-

सुबह की किरणें लाईं खुशियों की टोली,

हंसी से महके सबकी होली,

रंगों में घुल जाए प्यार की बोली,

गुड मॉर्निंग हैप्पी होली!


नई सुबह, नए रंग, नई मुस्कान,

होली सिखाए प्रेम और सम्मान,

द्वेष मिटे, दिलों में बस जाए रौशनी,

गुड मॉर्निंग होली की शुभ पहचान।


सूरज की रोशनी, गुलाल की फुहार,

दिल से मिट जाए आज हर दीवार,

प्रेम और सौहार्द का रंग चढ़े ऐसा,

गुड मॉर्निंग होली मुबारक अपार।


सुबह-सुबह रंगों का संदेश आया,

हर चेहरे पर खुशियों का साया,

जले होलिका, जले हर बुराई,

गुड मॉर्निंग होली ने दिल जीता लिया।


रंगों से सजी ये प्यारी सुबह,

लाए जीवन में नई सी महक,

नफरत जले, प्यार खिले,

गुड मॉर्निंग होली की शुभ लहर।

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होली और भांग का क्या है कनेक्शन, क्या यह भारत में है कानूनी रूप से वैध?

होली में भांग का सेवन एक पुरानी परंपरा है। इसका संबंध भगवान शिव और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा है। प्राचीन ग्रंथों में भांग को ‘विजय’ कहा गया है और इसे पांच पवित्र पौधों में से एक माना जाता है। भांग बनाना पारंपरिक कला है जिसमें इसके पत्तों से ठंडाई, बर्फी और पकौड़े बनाए जाते हैं।

Bhang History
होली पर भांग पीने की परंपरा
locationभारत
userअसमीना
calendar03 Mar 2026 01:06 PM
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होली और भांग का रिश्ता भारत में सदियों पुराना है। यह सिर्फ एक नशे का माध्यम नहीं बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है। भांग का जिक्र प्राचीन ग्रंथों में मिलता है और इसे वेदों में ‘विजय’ कहा गया है। इसे धरती के पांच सबसे पवित्र पौधों में से एक माना जाता है। होली के त्योहार में भांग का सेवन भगवान शिव के प्रसाद के रूप में किया जाता है। इस आर्टिकल में जानेंगे कि भांग की उत्पत्ति कैसे हुई, यह कैसे बनाई जाती है, इसका सेवन क्या कानूनी रूप से वैध है और इसे सुरक्षित रूप से कैसे लिया जाए।

भांग का इतिहास और उत्पत्ति

भांग का संबंध भगवान शिव से माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान विष निकला था और भगवान शिव ने उसे पी लिया। विष की गर्मी शांत करने के लिए उन्होंने भांग का सेवन किया तभी से यह शिव का प्रिय बन गया। एक और मान्यता के अनुसार, देवताओं के अमृत की कुछ बूंदें धरती पर गिरीं और वहां से भांग का पौधा उगा।

होली पर भांग पीने की परंपरा

होली वसंत ऋतु का त्योहार है। इस समय मौसम बदलता है और भांग को आयुर्वेद में औषधि माना जाता है। शरीर को ठंडक देती है और पाचन में मदद करती है। मध्यकाल में भांग का सेवन होली के दौरान लोकप्रिय हुआ और धीरे-धीरे यह उत्सव का हिस्सा बन गई। इसे लेने वाले भगवान शिव का प्रसाद मानते हैं और यह मस्ती और उल्लास का प्रतीक बन गई।

भारत में भांग की कानूनी स्थिति

भारत में भांग का कानूनी स्थिति थोड़ी जटिल है। Narcotic Drugs and Psychotropic Substances (NDPS) Act, 1985 के अनुसार गांजा और चरस पर प्रतिबंध है। हालांकि, भांग के पत्तों और बीजों का उपयोग वैध है। उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में भांग की सरकारी दुकानें हैं। व्यावसायिक उत्पादन के लिए सरकार से लाइसेंस लेना आवश्यक है। बिना लाइसेंस भांग की खेती करना अपराध है।

भांग कैसे बनाई जाती है?

भांग बनाने की प्रक्रिया पारंपरिक कला है। भांग के पत्तों को साफ किया जाता है और डंठल और बीज अलग कर दिए जाते हैं। पत्तियों को पानी में भिगोकर सिल-बट्टे पर महीन पेस्ट बनाया जाता है। इसे सूती कपड़े में रखकर छाना जाता है और दूध, मेवे, चीनी और मसालों के साथ मिलाया जाता है। ठंडाई, पकौड़े, बर्फी और पहाड़ी क्षेत्रों में चटनी के रूप में भांग का सेवन किया जाता है।

भांग का सेवन और सावधानियां

भांग का सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए। अधिक मात्रा में लेने से चक्कर, घबराहट और याददाश्त में कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। बच्चों और गर्भवती महिलाओं को भांग से दूर रहना चाहिए। आयुर्वेद के अनुसार भांग दर्द निवारक है और तनाव कम करने में सहायक है लेकिन अतिशय सेवन हानिकारक हो सकता है।

सांस्कृतिक महत्व और सावधानी

भांग का सेवन नशा नहीं बल्कि एक सांस्कृतिक परंपरा और भगवान शिव के प्रति श्रद्धा का प्रतीक है। होली का त्योहार रंगों और मस्ती के साथ संयम का भी है।

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इस होली अलग स्टाइल में ट्राई करें कचौड़ी, रेसिपी के लिए पीछे पड़ जाएंगे पड़ोसी

Kachori Recipe: गरमागरम और कुरकुरी दाल कचौड़ी हर किसी का दिल जीतती है। इस रेसिपी को बनाना आसान है और इसके लिए ज्यादा सामग्री की जरूरत नहीं है। आप इसे बच्चों और बड़े सभी के लिए आसानी से तैयार कर सकते हैं। होली पार्टी में यह व्यंजन गुझिया और अन्य स्नैक्स के साथ परफेक्ट कॉम्बिनेशन देता है।

Kachodi
दाल कचौड़ी रेसिपी
locationभारत
userअसमीना
calendar28 Feb 2026 03:46 PM
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होली का त्योहार सिर्फ रंगों और खुशियों का नहीं बल्कि स्वादिष्ट व्यंजनों का भी प्रतीक है। अगर होली की थाली में दाल कचौड़ी नहीं है तो त्योहार का आनंद अधूरा लगता है। गर्मा-गर्म, खस्ता और मसालेदार दाल कचौड़ी हर उम्र के लोगों को भाती है और मेहमानों का दिल जीत लेती है। इस होली, गुझिया और मालपुआ के साथ, दाल कचौड़ी का खास जगह है। इसे बनाना बेहद आसान है और यह आपके होली के जश्न का स्वाद दोगुना कर देती है।

दाल की कचौड़ी की सामग्री

  • मैदा- 2 कप
  • नमक- स्वादानुसार
  • घी- 1 चम्मच
  • पानी- आवश्यकतानुसार

स्टफिंग के लिए

  • मूंग दाल- 1 कप (भिगोई हुई)
  • बेसन- 2 चम्मच
  • घी- 1 चम्मच
  • सौंफ- ½ चम्मच
  • जीरा- ½ चम्मच
  • हींग- 1 चुटकी
  • हल्दी पाउडर- ½ चम्मच
  • लाल मिर्च पाउडर- ½ चम्मच
  • धनिया पाउडर- 1 चम्मच
  • अमचूर पाउडर- ½ चम्मच
  • गरम मसाला - ½ चम्मच
  • नमक- स्वादानुसार
  • तेल- आवश्यकतानुसार

दाल की कचौड़ी बनाने की विधि

  • सबसे पहले एक बड़े बर्तन में मैदा लें। उसमें स्वादानुसार नमक और थोड़ा घी डालकर अच्छी तरह मिलाएं।
  • अब धीरे-धीरे पानी डालते हुए नरम आटा गूंध लें।
  • आटे को चिकना बनाने के लिए हल्का तेल लगाकर ढक दें और 30 मिनट के लिए अलग रख दें।
  • मूंग दाल को धोकर लगभग 2 घंटे के लिए भिगो दें।
  • दाल फूल जाने के बाद उसका पानी निकालकर मिक्सर में दरदरा पीस लें।
  • अब एक कड़ाही में 1 चम्मच घी डालें और मध्यम आंच पर सौंफ, जीरा और हींग भूनें। इसमें हल्दी, लाल मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर, अमचूर, गरम मसाला और नमक डालकर अच्छी तरह भूनें।
  • इसके बाद बेसन डालकर सुनहरा होने तक पकाएं और फिर मूंग दाल का पेस्ट मिलाकर कुछ मिनट भूनें। स्टफिंग को ठंडा होने के लिए अलग रख दें।
  • गूथे हुए आटे की छोटी-छोटी लोइयां बनाएं। हर लोई को हल्का बेलें या अंगूठे से दबाकर कटोरी जैसा आकार दें।
  • अब दाल की स्टफिंग को लोई में भरें और किनारों को बंद कर गोल आकार दें।
  • कड़ाही में तेल गर्म करें और धीमी आंच पर कचौड़ियों को सुनहरा और कुरकुरा होने तक तलें।
  • तली हुई दाल कचौड़ियों को हरी चटनी या इमली की चटनी के साथ गरमागरम परोसें। होली के त्योहार में यह खास व्यंजन आपके मेहमानों और परिवार का दिल जीत लेगा।

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