लंबे समय तक भूख हड़ताल के बाद जूस या नारियल पानी ही क्यों दिया जाता है? क्या इसके पीछे सिर्फ परंपरा है या फिर कोई वैज्ञानिक कारण भी है?

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 26 दिनों तक चले अपने अनशन को खत्म कर दिया। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने उन्हें जूस पिलाकर उनका अनशन तुड़वाया। इसके बाद एक सवाल लोगों के मन में फिर से चर्चा का विषय बन गया कि आखिर लंबे समय तक भूख हड़ताल के बाद जूस या नारियल पानी ही क्यों दिया जाता है? क्या इसके पीछे सिर्फ परंपरा है या फिर कोई वैज्ञानिक कारण भी है? दरअसल इसके पीछे मेडिकल साइंस की एक बेहद अहम वजह छिपी हुई है।
हमारा शरीर रोज मिलने वाले भोजन से ऊर्जा प्राप्त करता है। भोजन न मिलने पर शरीर पहले ग्लूकोज का इस्तेमाल करता है। जब ग्लूकोज खत्म होने लगता है तो शरीर अपनी जरूरत पूरी करने के लिए जमा फैट और धीरे-धीरे मांसपेशियों को ऊर्जा में बदलना शुरू कर देता है। इस दौरान शरीर में ब्लड शुगर का स्तर कम होने लगता है। साथ ही सोडियम, पोटैशियम और फॉस्फेट जैसे जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स भी घट जाते हैं। यही कारण है कि लंबे समय तक भूखे रहने के बाद शरीर कमजोर महसूस करता है और उसे सामान्य स्थिति में लौटने के लिए समय चाहिए होता है।
लंबे समय तक भोजन न मिलने के कारण पाचन तंत्र की गति भी धीमी पड़ जाती है। ऐसे में अगर अचानक रोटी, चावल या दूसरी भारी चीजें खा ली जाएं तो शरीर उन्हें आसानी से पचा नहीं पाता। इसलिए डॉक्टर सबसे पहले जूस, नारियल पानी या ORS जैसे तरल पदार्थ लेने की सलाह देते हैं। इन पेय पदार्थों में प्राकृतिक शुगर, पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स मौजूद होते हैं। ये शरीर को धीरे-धीरे ऊर्जा देना शुरू करते हैं और ब्लड शुगर को सुरक्षित तरीके से सामान्य स्तर पर लाने में मदद करते हैं। यही कारण है कि अस्पतालों में भी लंबे अनशन या लंबे उपवास के बाद लिक्विड डाइट से ही शुरुआत कराई जाती है।
नारियल पानी शरीर में पानी की कमी पूरी करने के साथ-साथ पोटैशियम जैसे जरूरी मिनरल भी देता है। वहीं फलों के जूस से शरीर को आसानी से पचने वाला ग्लूकोज मिलता है जिससे ऊर्जा धीरे-धीरे वापस आने लगती है। यही वजह है कि अस्पतालों में भी लंबे समय तक भूखे रहने वाले मरीजों को पहले तरल पदार्थ दिए जाते हैं। जब डॉक्टरों को लगता है कि शरीर सामान्य तरीके से भोजन पचा सकता है तभी धीरे-धीरे हल्का और फिर सामान्य खाना शुरू कराया जाता है।
लंबे समय तक भूखे रहने के बाद अचानक ज्यादा खाना खाने से रीफीडिंग सिंड्रोम नाम की गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है। इसमें शरीर अचानक मिलने वाले पोषक तत्वों को संभाल नहीं पाता और इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन तेजी से बिगड़ सकता है। इस स्थिति का असर दिल, दिमाग और शरीर के दूसरे महत्वपूर्ण अंगों पर भी पड़ सकता है। इसलिए डॉक्टर हमेशा भोजन की शुरुआत धीरे-धीरे करने की सलाह देते हैं।
अगर सही सावधानी नहीं बरती जाए तो शरीर में कई तरह की परेशानियां शुरू हो सकती हैं। ब्लड प्रेशर में बदलाव, दिल की धड़कन का असामान्य होना, शरीर में सूजन, सांस लेने में दिक्कत, कमजोरी और गंभीर मामलों में हार्ट से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं। इसी कारण लंबे समय तक भूखे रहने वाले व्यक्ति को मेडिकल निगरानी में ही सामान्य भोजन की ओर वापस लाया जाता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे अनशन के बाद सबसे पहले शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी पूरी करनी चाहिए। इसके लिए नारियल पानी, फलों का ताजा जूस या ORS जैसे पेय सबसे अच्छे विकल्प माने जाते हैं। इसके बाद हल्का तरल भोजन फिर नरम खाना और आखिर में सामान्य भोजन शुरू किया जाता है। यह प्रक्रिया शरीर को बिना किसी अतिरिक्त दबाव के सामान्य स्थिति में लौटने में मदद करती है।
अगर किसी व्यक्ति ने कई दिनों तक भोजन नहीं किया है तो उसे अपनी मर्जी से सीधे सामान्य खाना शुरू नहीं करना चाहिए। हर व्यक्ति की शारीरिक स्थिति अलग होती है इसलिए भोजन की शुरुआत डॉक्टर की सलाह के अनुसार करना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। यही कारण है कि चाहे भूख हड़ताल हो, धार्मिक उपवास हो या किसी बीमारी की वजह से लंबे समय तक भोजन न किया गया हो, शुरुआत हमेशा हल्के तरल पदार्थों से ही की जाती है। इससे शरीर को धीरे-धीरे ऊर्जा मिलती है और किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का खतरा काफी कम हो जाता है।
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