हर साल 19 नवंबर को इंटरनेशनल मेन्स को मनाया जाता है लेकिन आज भी पुरुषों की कई ऐसी बातें हैं जिनकी कभी तारीफ नहीं होती। इस आर्टिकल में हम उन 5 अहम बातों के बारे में जानेंगे जिन्हें समझना और सराहना हर किसी के लिए जरूरी है।

हम सब जानते हैं कि हर साल 19 नवंबर को इंटरनेशनल मेन्स डे मनाया जाता है। ये सिर्फ एक दिन नहीं बल्कि याद दिलाने वाला पल है कि सराहना सिर्फ एक ही जेंडर के लिए नहीं होती बल्कि हर इंसान इसकी जरूरत महसूस करता है। समाज में महिलाओं की चुनौतियों, उनके संघर्ष और उनकी उपलब्धियों पर खूब बातें की जाती हैं लेकिन पुरुषों के लिए सिर्फ कभी-कभार ही बात की जाती है।
पुरुष दिन-रात अपनी जिम्मेदारियों को निभाते है, उम्मीदों का बोझ उठाते हैं और कई बार खुद को साबित करने के चक्कर में अपनी फीलिंग्स को अंदर ही दबा लेते हैं। ऐसे में हम सब का ये फर्ज बनता है कि पुरुषों से उनकी फीलिंग्स के बारे में बात की जाए, तारीफ की जाए, उनका संघर्ष समझा जाए ताकि उन्हें भी स्पेशल फील हो सके। चलिए जानते हैं पुरुषों की वो 5 बातें जिन्हें वो अक्सर दबा दिया करते हैं।
यह बात किसी से छुपी नहीं है कि पुरुष हर रोज अपने परिवार के लिए किसी न किसी तरह की लड़ाई लड़ते हैं कभी जॉब का प्रेशर, कभी पैसों की टेंशन तो कभी करियर में उतार-चढ़ाव। इन सबके बावजूद वो बिना शिकायत किए, बिना किसी को अपनी परेशानी बताए घर की जरूरतें पूरी करते रहते हैं। समाज इसे पुरुष का फर्ज कहकर साधारण बना देता है लेकिन सच ये है कि उनकी ये मेहनत एक तारीफ की हकदार जरूर है। एक छोटा सा “तुम सच में बहुत मेहनत करते हो” कह देने ही पुरुषों के लिए काफी होता है।
लोगों को लगता है कि पुरुषों में इमोशंस कम होते हैं या होते ही नहीं है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पुरुष किसी भी चीज को बेहद गहराई से महसूस करते हैं लेकिन कभी बताते या दिखाते नहीं। पुरुषों को बचपन से यही सिखाया जाता है कि, “रोना नहीं है”, “कमजोर मत बनो”, “ज्यादा मत बोलो।” इसी वजह से वो अपनी फीलिंग्स को अंदर ही अंदर दबाते रहते हैं। वो दूसरों की सुनते हैं, उनका दर्द समझते हैं लेकिन खुद की बात कहने में झिझकते हैं।
घर चलाना सिर्फ पैसों तक सीमित नहीं है। इसके साथ मानसिक, भावनात्मक और कई बार सामाजिक जिम्मेदारियां भी जुड़ी होती हैं। पिता हो, पति हो, बेटा हो या भाई पुरुष अक्सर रिश्तों की बड़ी-बड़ी जिम्मेदारियां अपने कंधों पर लेकर चलते हैं। वो परिवार के लिए कितनी चीजें चुपचाप सहते हैं उसका क्रेडिट उन्हें शायद ही कभी मिलता है।
बहुत से पुरुष अपनी केयर जाहिर करने में नहीं बल्कि काम करके दिखाने में विश्वास रखते हैं। जैसे-आपकी पढ़ाई के लिए रात भर जागना, आपका मूड खराब हो तो बिना बोले आपका फेवरेट खाना ले आना, आपके किसी काम के लिए अपनी पूरी कोशिश लगा देना। ये छोटी-छोटी चीजें असली मायने में किसी भी तारीफ से ज्यादा कीमती होती हैं। लेकिन लोग अक्सर इन्हें एक जिम्मेदारी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।
समाज ने एक इमेज बना दी है कि पुरुष हमेशा मजबूत होते हैं उन्हें टूटना नहीं चाहिए। लेकिन अंदर से वो भी उतने ही इंसान हैं जितने हम बाकी लोग। कई बार वो बहुत कुछ सह रहे होते हैं लेकिन बाहर से मुस्कुराते रहते हैं ताकि कोई उन्हें कमजोर न समझे। ये दबाव उन्हें सालों तक चुपचाप अपने अंदर लड़ने पर मजबूर कर देता है और दुख की बात ये है कि इस मजबूती की भी कोई तारीफ नहीं करता।