7 Stages of Love: “मुझे मोहब्बत हो गई” और “मुझे इश्क हो गया” अक्सर लोग इन शब्दों को एक ही जैसे समझ लेते हैं लेकिन सूफियों की नजर में मोहब्बत और इश्क अलग-अलग पड़ाव हैं।

“मुझे मोहब्बत हो गई” और “मुझे इश्क हो गया” अक्सर लोग इन शब्दों को एक ही जैसे समझ लेते हैं लेकिन सूफियों की नजर में मोहब्बत और इश्क अलग-अलग पड़ाव हैं। मोहब्बत जहां मन और भावना से जुड़ी होती है वहीं इश्क उस मुकाम को कहते हैं जब ‘मैं’ का अस्तित्व मिटकर ‘हम’ बन जाता है। चलिए जानते हैं सूफियों के मुताबिक प्यार से इश्क तक के सात पड़ाव और उनके मायने।
सबसे पहला चरण है दिलकशी। जब आप किसी को देखते हैं और वह आपको अच्छा लगता है। इस अवस्था में केवल शारीरिक या बाहरी आकर्षण होता है। इसमें कोई गहरा भावनात्मक जुड़ाव नहीं होता। इसे लोग अक्सर इन्फैटुएशन (Infatuation) समझ लेते हैं।
दूसरा पड़ाव है उन्स। यहां आप किसी के प्रति धीरे-धीरे आसक्ति महसूस करने लगते हैं। यह वह चरण है जिसे लोग अक्सर मोहब्बत समझ लेते हैं। दिल में हल्का लगाव और खिचाव पैदा होता है लेकिन यह असली इश्क से कोसों दूर होता है।
तीसरा पड़ाव है अकीदत यानी भरोसा। अब आपकी भावनाएं और मजबूत हो जाती हैं। आपको किसी पर यकीन और विश्वास होने लगता है। यह वह समय है जब रिश्ते में स्थिरता और गहराई आने लगती है।
चौथा पड़ाव है मोहब्बत। अब केवल शारीरिक आकर्षण नहीं बल्कि मन भी जुड़ जाता है। आपके दिल की गहराई में किसी का नाम बस जाता है। यह वह स्थिति है जब प्यार पूर्ण रूप से आपके जीवन में प्रवेश कर जाता है।
पांचवा पड़ाव है इबादत जिसे प्यार का पागलपन भी कहा जा सकता है। आप मोहब्बत की दहलीज पार कर चुके हैं और अब आपका प्रेम आध्यात्मिक स्तर पर पहुंच चुका है। यहां प्रेम केवल मिलने या पाने तक सीमित नहीं रहता बल्कि समर्पण और भक्ति का रूप लेता है।
छठा पड़ाव है जुनून। इसे अक्सर “दीवानापन” कहा जाता है। अब प्रेम में नियंत्रण कम हो जाता है और भावनाओं की गहराई बढ़ती है। कुमार विश्वास की तरह यह वह स्टेज है जहां प्यार आपके पूरे अस्तित्व को छू लेता है।
आखिरी पड़ाव है मौत लेकिन यह सचमुच की मौत नहीं है। यह ‘मैं’ के मर जाने और ‘खुदी’ के मिट जाने का प्रतीक है। अब आप अपने प्रेम में पूरी तरह से विलीन हो चुके हैं। यही असली इश्क है जब आप अपने अस्तित्व को प्रेम में खो देते हैं और ‘हम’ बन जाते हैं।
सूफियों के लिए इश्क सिर्फ किसी इंसान से नहीं बल्कि ऊपर वाले से प्रेम करने का माध्यम होता है। उनके लिए पिया भी वही है और मासूक भी वही। जैसे अमीर खुसरो ने कहा, "छाप तिलक सब छीनी रे, मोसे नैना मिलाय के" यह महबूब की तरफ नहीं बल्कि उस ईश्वरीय प्रेम की तरफ इशारा करता है।