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Monsoon Gardening Tips: मानसून में पौधों की कटाई करने से पहले यह खबर जरूर पढ़ें। जानिए कब करें प्रूनिंग, कब नहीं और कैसे बचाएं अपने पौधों को फंगस व नुकसान से।

Monsoon Gardening: मानसून का मौसम शुरू होते ही बगीचों और घरों की बालकनी में लगे पौधों की रौनक बढ़ जाती है। बारिश के पानी से पौधों में नई पत्तियां और टहनियां तेजी से निकलने लगती हैं। ऐसे में कई लोग यह सोचकर पौधों की कटाई-छंटाई शुरू कर देते हैं कि इससे पौधे और ज्यादा घने तथा सुंदर बन जाएंगे। लेकिन बारिश के मौसम में बिना सही जानकारी के की गई कटाई कई बार पौधों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। बागवानी से जुड़े जानकारों का मानना है कि मानसून के दौरान पौधों की देखभाल का तरीका बाकी मौसमों से अलग होता है। इस समय सही देखभाल पौधों की ग्रोथ बढ़ा सकती है जबकि छोटी सी गलती उन्हें कमजोर भी बना सकती है।
मानसून के दौरान पौधों में लगातार नई ग्रोथ होती रहती है। इसी वजह से कई लोग पौधों का आकार छोटा करने या उन्हें नया रूप देने के लिए मोटी शाखाएं और मुख्य तने तक काट देते हैं लेकिन यह तरीका सही नहीं माना जाता। बारिश के मौसम में पौधे पहले से ही नमी और बदलते मौसम के अनुसार खुद को ढालने की कोशिश कर रहे होते हैं। ऐसे समय में ज्यादा कटाई करने से पौधों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। कई बार पौधों की बढ़वार धीमी हो जाती है और वे कमजोर पड़ने लगते हैं।
बारिश के दिनों में वातावरण में नमी काफी अधिक रहती है। जब किसी पौधे की शाखा काटी जाती है तो वहां एक खुला हिस्सा बन जाता है। यदि यह हिस्सा लंबे समय तक गीला रहे तो वहां फंगस और अन्य संक्रमण तेजी से पनप सकते हैं। धीरे-धीरे यह संक्रमण शाखाओं से होते हुए पूरे पौधे तक फैल सकता है। कई मामलों में पौधों की जड़ें भी प्रभावित हो जाती हैं जिससे उनका विकास रुक जाता है और पौधा सूखने लगता है।
अगर पौधे की कटाई करना जरूरी हो तो केवल हल्की छंटाई करना बेहतर रहता है। इस दौरान केवल उन पतली टहनियों या नई शाखाओं को हटाना चाहिए जो बहुत ज्यादा बढ़ गई हों या पौधे का आकार बिगाड़ रही हों। मुख्य तना, मोटी शाखाएं या बड़े हिस्से इस मौसम में नहीं काटने चाहिए। हल्की छंटाई से पौधे का संतुलन बना रहता है और उसकी नई बढ़वार पर भी कोई बुरा असर नहीं पड़ता।
यदि कोई पौधा बहुत ज्यादा घना हो गया है तो उसकी केवल सीमित मात्रा में छंटाई करें। हल्की कटाई करने से पौधे के अंदर तक हवा और धूप आसानी से पहुंचती है। इससे नमी लंबे समय तक जमा नहीं रहती और फंगस या कीट लगने की संभावना भी कम हो जाती है। बरसात के मौसम में पौधों के बीच पर्याप्त हवा का आना-जाना उनकी अच्छी सेहत के लिए बेहद जरूरी माना जाता है।
भले ही मानसून में भारी कटाई से बचना चाहिए लेकिन यदि किसी पौधे की कोई शाखा पूरी तरह सूख चुकी है, टूट गई है या उस पर बीमारी के लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो उसे तुरंत अलग कर देना चाहिए। ऐसी शाखाओं को हटाने से संक्रमण बाकी हिस्सों तक नहीं फैलता और पौधा स्वस्थ बना रहता है। कटाई के लिए हमेशा साफ और तेज औजार का इस्तेमाल करना चाहिए ताकि पौधे को कम से कम नुकसान पहुंचे।
यदि किसी पौधे की हार्ड प्रूनिंग यानी गहरी कटाई करनी हो तो उसके लिए मानसून का मौसम सही नहीं माना जाता। बेहतर होगा कि बारिश पूरी तरह खत्म होने और मौसम सूखा होने के बाद ही पौधों की बड़ी छंटाई की जाए। उस समय धूप अच्छी निकलती है, जिससे कटे हुए हिस्से जल्दी सूख जाते हैं। इससे संक्रमण का खतरा भी काफी कम हो जाता है और पौधे नई शाखाएं निकालने के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो जाते हैं।
बारिश का मौसम पौधों की तेजी से बढ़ने का समय होता है लेकिन इसी दौरान सबसे ज्यादा सावधानी बरतने की भी जरूरत होती है। जरूरत से ज्यादा कटाई करने के बजाय हल्की छंटाई, अच्छी हवा, पर्याप्त रोशनी और समय पर सूखी शाखाओं को हटाने जैसी छोटी-छोटी बातें पौधों को लंबे समय तक स्वस्थ और हरा-भरा बनाए रख सकती हैं। यदि सही तरीके से देखभाल की जाए तो मानसून के बाद पौधे पहले से ज्यादा मजबूत, घने और खूबसूरत दिखाई देते हैं। इसलिए बारिश के मौसम में जल्दबाजी में बड़ी कटाई करने से बचें और पौधों की जरूरत के अनुसार ही उनकी देखभाल करें।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। पौधों की देखभाल, कटाई-छंटाई और बागवानी से जुड़े तरीके पौधे की प्रजाति, मौसम और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। किसी भी बड़े बदलाव से पहले संबंधित पौधे की जरूरतों की जानकारी अवश्य लें।
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