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Self Confidence Tips: कई लोगों के मन में बार-बार यही सवाल चलता रहता है कि अगर मैंने कुछ गलत बोल दिया तो लोग क्या सोचेंगे? कहीं सब हंसने न लगें या बॉस क्या सोचेंगे? इसी वजह से लोग अपने सवाल को कई बार मन में दोहराते रहते हैं।

Communication Skills in Hindi: क्या आपने कभी ऐसा महसूस किया है कि ऑफिस में आपका काम तो हमेशा अच्छा होता है लेकिन जैसे ही मीटिंग में कुछ बोलने या सवाल पूछने की बारी आती है आप चुप हो जाते हैं? मन में कई बातें होती हैं लेकिन डर लगता है कि कहीं लोग क्या सोचेंगे, कहीं सवाल गलत न हो जाए या कहीं सबके सामने शर्मिंदा न होना पड़े। अगर आपका जवाब 'हां' है तो आप अकेले नहीं हैं। बहुत से लोग, खासकर महिलाएं इस परेशानी का सामना करती हैं। अच्छी बात यह है कि यह कोई कमजोरी नहीं है और थोड़ी-सी प्रैक्टिस से इसे आसानी से बदला जा सकता है। आइए जानते हैं कि आखिर ऐसा क्यों होता है और अपने अंदर कॉन्फिडेंस कैसे बढ़ाया जा सकता है।
ऑफिस में चुप रहने की सबसे बड़ी वजह होती है दूसरों की राय का डर। कई लोगों के मन में बार-बार यही सवाल चलता रहता है कि अगर मैंने कुछ गलत बोल दिया तो लोग क्या सोचेंगे? कहीं सब हंसने न लगें या बॉस क्या सोचेंगे? इसी वजह से लोग अपने सवाल को कई बार मन में दोहराते रहते हैं। वे चाहते हैं कि जो भी बोलें वह बिल्कुल परफेक्ट हो लेकिन परफेक्शन के चक्कर में अक्सर वे कुछ बोल ही नहीं पाते और मौका निकल जाता है।
अगर आप हर मीटिंग में सिर्फ सुनते हैं और कभी अपनी राय नहीं रखते तो धीरे-धीरे आपके सीनियर्स को लग सकता है कि आपको काम में ज्यादा रुचि नहीं है। कई बार ऐसा भी होता है कि जो सवाल आपके मन में होता है वही सवाल कुछ देर बाद कोई दूसरा पूछ देता है और उसकी तारीफ होने लगती है। ऐसे समय पर सबसे ज्यादा दुख इस बात का होता है कि आप भी वही बात कहना चाहते थे लेकिन हिम्मत नहीं जुटा पाए। यही आदत धीरे-धीरे आत्मविश्वास को कम कर देती है और भविष्य में बड़े अवसर भी हाथ से निकल सकते हैं।
अगर आपको मीटिंग में बोलने से डर लगता है तो बिना तैयारी के जाने की बजाय पहले उसका विषय समझ लें। कोशिश करें कि मीटिंग किस बारे में है उससे जुड़ी थोड़ी जानकारी पहले ही पढ़ लें। जब आपको विषय की अच्छी समझ होगी तो सवाल पूछना और अपनी बात रखना दोनों आसान हो जाएंगे। तैयारी होने से दिमाग में घबराहट भी कम होती है और आत्मविश्वास अपने आप बढ़ने लगता है।
अगर शुरुआत में लंबी बात करना मुश्किल लगता है तो खुद पर दबाव मत डालिए। शुरुआत सिर्फ एक छोटे सवाल या किसी बात पर अपनी सहमति जताने से करें। हर मीटिंग में थोड़ा-थोड़ा बोलने की आदत डालें। कुछ समय बाद आपको महसूस होगा कि अब पहले जैसी घबराहट नहीं हो रही है। आत्मविश्वास एक दिन में नहीं आता लेकिन नियमित अभ्यास से जरूर बढ़ता है।
जब भी आपको लगे कि दिल तेजी से धड़क रहा है या घबराहट बढ़ रही है तो बोलने से पहले तीन से चार बार गहरी सांस लें। इससे शरीर शांत होता है और दिमाग बेहतर तरीके से सोच पाता है। कई लोग इस आसान तकनीक का इस्तेमाल इंटरव्यू, प्रेजेंटेशन और ऑफिस मीटिंग में भी करते हैं।
अगर आपको लोगों के सामने बोलने में झिझक होती है तो रोज कुछ मिनट आईने के सामने खड़े होकर बोलने की प्रैक्टिस करें। आप किसी भी विषय पर बात कर सकते हैं या मीटिंग में पूछे जाने वाले सवालों का अभ्यास कर सकते हैं। धीरे-धीरे आपकी आवाज, बॉडी लैंग्वेज और बोलने का तरीका बेहतर होने लगेगा। यही अभ्यास असली मीटिंग में भी आपका आत्मविश्वास बढ़ाएगा।
जब आप अपनी बात रख रहे हों तो उन लोगों की तरफ देखें जो आपकी बात ध्यान से सुन रहे हैं या आपकी बात से सहमत दिखाई दे रहे हैं। इससे आपको मानसिक सहारा मिलता है और घबराहट कम महसूस होती है। बार-बार नीचे देखने या इधर-उधर देखने से आपका आत्मविश्वास कमजोर दिखाई दे सकता है।
सबसे बड़ी गलती यही होती है कि लोग सोचते हैं कि उन्हें हमेशा बिल्कुल सही बोलना चाहिए। लेकिन सच्चाई यह है कि ऑफिस में कोई भी इंसान हमेशा परफेक्ट नहीं होता। बड़े-बड़े अधिकारी भी कई बार गलती करते हैं। अगर आपकी बात में कोई छोटी गलती हो भी जाए, तो उसे स्वीकार करें और आगे बढ़ जाएं। लोग आपकी गलती से ज्यादा आपके आत्मविश्वास को याद रखते हैं।
हर व्यक्ति का स्वभाव अलग होता है। कुछ लोग शुरू से ही खुलकर बोलते हैं जबकि कुछ लोगों को समय लगता है। इसलिए खुद की तुलना किसी और से करने की बजाय रोज थोड़ा-थोड़ा बेहतर बनने की कोशिश करें। यही छोटी-छोटी कोशिशें आगे चलकर आपके व्यक्तित्व में बड़ा बदलाव ला सकती हैं।
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