Irregular Periods: पीरियड्स का पैटर्न शरीर में होने वाले कुछ बदलावों का संकेत भी दे सकता है। इर्रेगुलर पीरियड्स के पीछे तनाव से लेकर वजन में बदलाव, हार्मोनल असंतुलन और कुछ स्वास्थ्य समस्याएं तक कई कारण हो सकते हैं।

पीरियड्स का हर महीने बिल्कुल एक ही तारीख पर आना जरूरी नहीं है। कुछ दिनों का आगे-पीछे होना कई बार सामान्य हो सकता है लेकिन अगर पीरियड्स लगातार अनियमित हो रहे हैं, दो पीरियड्स के बीच का अंतर काफी बदल गया है या ब्लीडिंग के तरीके में अचानक बदलाव आया है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। पीरियड्स का पैटर्न शरीर में होने वाले कुछ बदलावों का संकेत भी दे सकता है। इर्रेगुलर पीरियड्स के पीछे तनाव से लेकर वजन में बदलाव, हार्मोनल असंतुलन और कुछ स्वास्थ्य समस्याएं तक कई कारण हो सकते हैं। इसलिए हर बार इसे गंभीर बीमारी मानना सही नहीं है लेकिन बार-बार होने वाले बदलाव की वजह समझना जरूरी है।
पीरियड्स का चक्र हार्मोन से काफी प्रभावित होता है। ज्यादा तनाव, नींद पूरी न होना, वजन का तेजी से बढ़ना या कम होना और बहुत ज्यादा एक्सरसाइज करने जैसी स्थितियां पीरियड्स के समय को प्रभावित कर सकती हैं। किशोरावस्था में जब पीरियड्स की शुरुआत होती है तब कुछ समय तक चक्र अनियमित रह सकता है। इसी तरह मेनोपॉज के करीब पहुंचने पर भी पीरियड्स के पैटर्न में बदलाव आना आम है। इसके अलावा प्रेग्नेंसी में पीरियड्स रुक सकते हैं। PCOS में भी हार्मोनल बदलाव के कारण पीरियड्स देर से आने या लंबे अंतराल के बाद आने की समस्या हो सकती है। थायरॉइड से जुड़ी गड़बड़ी और गर्भाशय में फाइब्रॉइड जैसी समस्याएं भी पीरियड्स और ब्लीडिंग के पैटर्न को प्रभावित कर सकती हैं।
अगर कभी-कभार पीरियड्स कुछ दिन आगे-पीछे हो जाएं तो हर स्थिति में चिंता करने की जरूरत नहीं होती लेकिन अगर यह समस्या बार-बार हो रही है तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। खास तौर पर अगर तीन महीने तक पीरियड्स नहीं आए हैं और प्रेग्नेंसी नहीं है तो इसकी वजह जानने के लिए मेडिकल जांच जरूरी हो सकती है। इसी तरह बहुत ज्यादा ब्लीडिंग, लंबे समय तक ब्लीडिंग, पीरियड्स के बीच बार-बार स्पॉटिंग या पहले नियमित रहने वाले पीरियड्स का अचानक अनियमित हो जाना भी जांच की वजह हो सकता है। अगर इसके साथ तेज पेट दर्द, चक्कर, बहुत ज्यादा कमजोरी या सांस लेने में परेशानी जैसी समस्या हो तो जल्द चिकित्सा सलाह लेनी चाहिए।
पीरियड्स के पैटर्न को बेहतर समझने के लिए हर महीने इसकी तारीख और ब्लीडिंग से जुड़ी जानकारी नोट करना उपयोगी हो सकता है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलती है कि बदलाव कभी-कभार हो रहा है या लगातार। संतुलित भोजन लेना, पर्याप्त नींद लेना और तनाव को नियंत्रित रखने की कोशिश करना भी जरूरी है। बहुत तेजी से वजन कम करने या बढ़ाने से बचें और अपनी क्षमता के अनुसार शारीरिक गतिविधि करें। लंबे समय तक खाना छोड़ने या जरूरत से ज्यादा एक्सरसाइज करने से भी बचना चाहिए। अगर PCOS, थायरॉइड या कोई अन्य स्वास्थ्य समस्या पहले से है तो उसका उचित इलाज और डॉक्टर की सलाह के अनुसार फॉलो-अप जरूरी है।
पीरियड्स देर से आने पर कई महिलाएं बिना डॉक्टर की सलाह के हार्मोनल दवाएं या दूसरी दवाएं लेना शुरू कर देती हैं। ऐसा करने से बचना चाहिए। अनियमित पीरियड्स का इलाज उसकी वजह पर निर्भर करता है इसलिए पहले कारण समझना जरूरी है।
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