बच्चे को प्ले स्कूल कब भेजना चाहिए यह हर पेरेंट के लिए अहम सवाल होता है। सही उम्र में स्कूल भेजने से बच्चा इमोशनली और मेंटली ज्यादा मजबूत होता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार तीन साल की उम्र प्ले स्कूल के लिए सबसे बेहतर मानी जाती है।

बच्चों का पहली बार स्कूल जाना किसी भी पेरेंट के लिए एक बड़ा और भावनात्मक अनुभव होता है। हर पेरेंट यही चाहता है कि उनका बच्चा सुरक्षित और खुशहाल माहौल में सीख पाए। इसी दौरान अक्सर पेरेंट्स एक छोटी लेकिन बहुत जरूरी चीज भूल जाते हैं बच्चे की उम्र। प्ले स्कूल में सही उम्र पर एडमिशन दिलाना बहुत महत्वपूर्ण है। समय से पहले भेजने पर बच्चा आपसे दूर होकर परेशान हो सकता है जबकि सही उम्र में भेजने से वह धीरे-धीरे स्कूल की आदतें सीखकर सहज महसूस करता है।
एक एक्सपर्ट के अनुसार, तीन साल की उम्र बच्चे के लिए प्ले स्कूल जाने की सबसे उपयुक्त होती है। इस उम्र तक बच्चे की भाषा और कम्युनिकेशन स्किल काफी विकसित हो जाती हैं। वह टीचर की बात समझ सकता है और अपनी बात भी स्पष्ट रूप से बता सकता है। इससे स्कूल में एडजस्ट होना आसान हो जाता है। साथ ही, तीन साल की उम्र तक बच्चों में सेपरेशन एंग्जाइटी कम हो जाती है। उनका इमोशनल और साइकोलॉजिकल डेवलपमेंट ऐसा होता है कि वे अन्य बच्चों के साथ सहजता से मिंगल कर सकते हैं।
कई पेरेंट्स यह सोचते हैं कि अगर उन्होंने अपने बच्चे को ढाई साल या तीन साल तक नहीं भेजा तो वे लेट हो गए। डॉक्टर अरोड़ा बताती हैं कि यह अब काफी कॉमन है। अक्सर पेरेंट्स FOMO (Fear of Missing Out) के कारण परेशान हो जाते हैं लेकिन वास्तव में बच्चे की सही उम्र और तैयारियों का ध्यान रखना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
1. भाषा और संवाद क्षमता: इस उम्र तक बच्चे अपनी बात टीचर को समझा सकते हैं और टीचर भी उन्हें समझ पाते हैं।
2. सकारात्मक ऊर्जा का सही इस्तेमाल: बच्चे इस उम्र में बहुत ऊर्जा से भरे होते हैं। स्कूल उन्हें सीखने और एक्टिव रहने का सही प्लेटफॉर्म देता है।
3. टॉयलेट ट्रेनिंग पूरी: अधिकतर बच्चे इस उम्र तक टॉयलेट ट्रेनिंग सीख चुके होते हैं जिससे यूटीआई और कब्ज जैसी समस्याओं का खतरा कम होता है।
4. सहजता और स्वतंत्रता: बच्चे धीरे-धीरे अपने पेरेंट्स से अलग होकर आत्मनिर्भर होना सीखते हैं।
अगर बच्चा न्यूक्लियर फैमिली में बड़ा हो रहा है या अधिक स्क्रीन टाइम में बिजी हो गया है तो पेरेंट्स बिना किसी गिल्ट के उसे तीन साल से पहले भी प्ले स्कूल भेज सकते हैं। ध्यान रखें कि बच्चे का सुरक्षित और सकारात्मक माहौल सबसे ज्यादा मायने रखता है।