प्रतिदिन साढ़े सात घंटे सोने से दिमाग रहता है ठीक, कम नींद से घटती है सोचने और समझने की क्षमता
भारत
चेतना मंच
29 Nov 2025 03:11 PM
नींद (Sleep) का हमारे जीवन में काफी महत्व है। जिसकी मदद से हम स्वस्थय रह सकते हैं। हमें आवश्यकता अनुसार नींद लेना चाहिए लेकिन हम जरुरत से अधिक सो रहे हैं तो वो भी ठीक नहीं है। जरुरत से कम और ज्यादा भी सोना ठीक नहीं है। ऐसा करने से हमारे सोचने और समझने की क्षमता कम हो जाती है। इसका दावा वाशिंगटन यूनिवर्सिटि के शोधकर्ताओं ने अपनी रिसर्च में दावा किया है। शोधकर्ता और न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. ब्रेंडेन लूसी का मानना है कि अधूरी नींद या ठीक से नींद न आने पर सीधा दिमाग पर प्रभाव पड़ता है।
शोधकर्ताओं (Researchers) का मानना है कि अगर आप 8 घंटे की नींद ले रहे हैं और 30 मिनट पहले अलार्म सेट कर देते हैं तो साढ़े सात घंटे की नींद से ब्रेन पर साकारात्मक (Positive) असर पड़ता है। अल्जाइमर्स डिजीज यानी चीजों को भूलने की बीमारी के खतरो कम करना शुरु कर देती है।
नींद से होता है अलजाइमर्स का सीधा संबंध
इससे पहले हुई रिसर्च में पाया गया था कि आधी-अधूरी नींद से अल्जाइमर्स बीमारी का कनेक्शन बनता है। याद्दाश्त (Memory) घटने, भ्रम सा महसूस होने और नई चीजों को देरी से समझना अल्जाइमर्स के लक्षण होते हैं। इनसे बचना है तो कम से कम साढ़े सात घंटे की नींद जरुर पूरी करनी चाहिए।
4-7-8 तकनीक भी अनिद्रा दूर करती है
रात को नींद नहीं आ रही है तो सांस लेने की 4-7-8 तकनीक अपना चाहिए। इसको एरिजोना यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक (Scientist) डॉ. एंड्रयू वेल द्वारा तैयार किया गया है। यह तकनीक प्राणायाम पर आधारित होती है। इस तकनीक को लम्बे समय तक अपनाया जाता है तो जल्दी नींद आना शुरु हो जाती है।