
Social Media[/caption]
करोना काल के बाद से एक बड़ी संख्या मे बच्चें,बड़े और युवक 'फोमो'का शिकार हो रहें है। लॉकडाउन के समय से ऑनलाइन क्लासेज के लिए बच्चों ने मोबाइल और लैपटॉप का ही सहारा लिया।लेकिन अब इसकी जरूरत खत्म होने के बाद भी इसका इस्तेमाल रुका नहीं है। युवा वर्ग सोशल मीडिया पर अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रहा है । लेकिन अपेक्षित लाइक व कमेंट ना मिलने की वजह से कुंठा के शिकार हो रहें है और गहरे अवसाद मे चले जा रहें है ।
बच्चे और युवा वर्ग मोबाइल में ही इतना खोए रहते हैं कि उन्हें अपने आसपास में होने वाले किसी भी घटना से कोई फर्क नहीं पड़ता है। कई बार देखा गया है कि घर में कोई गेस्ट भी आते हैं तो बच्चे उनसे मिलने जुलने की बजाए फोन में लगे रहते हैं।
मनोरोग विभाग का कहना है कि प्रतिदिन ओपीडी मे 2 से 3 बच्चें,किशोर और युवा इलाज को आ रहें है । अभिभावक परेशान है कि बच्चा किताब नही खोलता है और फ़ेसबुक पर लाइक और कमेंट ढूंढता रहता है।
डॉक्टरों का कहना है कि इंसान भीड़ मे अपनी अलग पहचान बनाना चाहता है । उसे जब यह नही मिलता है तो वह Social Media का सहारा लेने लगता है। किंतु जब वहा भी लाइक कमेंट ना मिल पाने की वजह से वह कुंठित हो जाता है ।