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Best Sunscreen for Tanning: सनस्क्रीन में लिखा SPF (Sun Protection Factor) त्वचा को सूरज की UVB किरणों से बचाने का काम करता है। UVB किरणें स्किन पर सनबर्न और जलन जैसी समस्याएं पैदा कर सकती हैं। यही वजह है कि SPF नंबर जितना ज्यादा होता है सनस्क्रीन को उतना बेहतर माना जाता है।

गर्मियों में घर से बाहर निकलते समय लोग सबसे पहले सनस्क्रीन लगाना जरूरी समझते हैं। तेज धूप, टैनिंग और स्किन डैमेज से बचने के लिए यह एक जरूरी स्किन केयर प्रोडक्ट माना जाता है। आमतौर पर लोग सनस्क्रीन खरीदते समय सिर्फ SPF नंबर देखते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि यही सबसे जरूरी चीज है लेकिन अब बाजार में मिलने वाली कई सनस्क्रीन पर PA+, PA++ और PA+++ भी लिखा होता है, जिसे ज्यादातर लोग समझ नहीं पाते। असल में यह भी स्किन प्रोटेक्शन से जुड़ी एक बेहद जरूरी जानकारी होती है। अगर आप सिर्फ SPF देखकर सनस्क्रीन खरीद रहे हैं तो हो सकता है कि आपकी त्वचा को पूरी सुरक्षा न मिल रही हो।
सनस्क्रीन में लिखा SPF (Sun Protection Factor) त्वचा को सूरज की UVB किरणों से बचाने का काम करता है। UVB किरणें स्किन पर सनबर्न और जलन जैसी समस्याएं पैदा कर सकती हैं। यही वजह है कि SPF नंबर जितना ज्यादा होता है सनस्क्रीन को उतना बेहतर माना जाता है। वहीं दूसरी तरफ PA रेटिंग का संबंध UVA किरणों से होता है। UVA किरणें त्वचा की गहराई तक पहुंच सकती हैं और धीरे-धीरे स्किन को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इससे टैनिंग, झुर्रियां और समय से पहले एजिंग जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। इसलिए अब स्किन एक्सपर्ट्स सनस्क्रीन चुनते समय SPF के साथ PA रेटिंग देखने की भी सलाह देते हैं।
सनस्क्रीन पर लिखा PA+++ यह बताता है कि वह आपकी त्वचा को UVA किरणों से कितनी अच्छी सुरक्षा दे सकता है। PA+++ को हाई प्रोटेक्शन माना जाता है। इसका मतलब है कि यह सनस्क्रीन त्वचा को धूप के गहरे असर से बचाने में ज्यादा मदद कर सकती है। तेज धूप में लंबे समय तक रहने वाले लोगों के लिए ऐसी सनस्क्रीन ज्यादा फायदेमंद मानी जाती है। खासतौर पर गर्मियों में या बाहर ज्यादा समय बिताने वालों के लिए PA+++ वाली सनस्क्रीन बेहतर विकल्प हो सकती है।
सनस्क्रीन में PA+ का मतलब हल्के स्तर की सुरक्षा से होता है। यह उन लोगों के लिए सही माना जाता है जो ज्यादा देर धूप में नहीं रहते या ज्यादातर समय घर और ऑफिस के अंदर बिताते हैं। वहीं PA++ मीडियम लेवल की सुरक्षा देता है। रोजाना बाहर आने-जाने वाले लोगों के लिए इसे बेहतर माना जाता है। यह त्वचा को टैनिंग और हल्के सन डैमेज से बचाने में मदद कर सकता है।
आजकल बढ़ती गर्मी और तेज धूप के कारण त्वचा पर असर पहले से ज्यादा देखने को मिल रहा है। ऐसे में सिर्फ SPF देखकर सनस्क्रीन चुनना काफी नहीं माना जाता। UVA किरणें धीरे-धीरे स्किन को नुकसान पहुंचाती हैं इसलिए PA रेटिंग पर ध्यान देना भी जरूरी हो गया है। अगर आप लंबे समय तक बाहर रहते हैं या तेज धूप में काम करते हैं, तो PA+++ वाली सनस्क्रीन आपकी त्वचा को बेहतर सुरक्षा देने में मदद कर सकती है। यही वजह है कि अब लोग SPF के साथ-साथ PA रेटिंग को भी समझने लगे हैं।
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