
माता-पिता होना जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य भी है और सबसे कठिन परीक्षा भी। हर मां-बाप का सपना होता है कि उनका बच्चा आत्मनिर्भर, सफल और खुशहाल इंसान बने। लेकिन अक्सर इसी सपने को पूरा करने की जल्दबाज़ी में वे बच्चों पर अनजाने दबाव डाल बैठते हैं। प्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर और दृष्टि आईएएस( Drishti IAS) के संस्थापक विकास दिव्यकीर्ति मानते हैं कि पेरेंटिंग का मतलब केवल बच्चों को पढ़ाई या करियर में आगे बढ़ाना नहीं, बल्कि उन्हें इंसान के तौर पर बेहतर और मजबूत बनाना है। उनके अनुभवों और विचारों से जुड़ी कई सीख सोशल मीडिया पर खूब वायरल होती हैं। आइए जानते हैं उनकी पांच ऐसी अहम बातें, जिन्हें हर माता-पिता को अपनी परवरिश में अपनाना चाहिए। Parenting Tips
हर मां-बाप की पहली ख्वाहिश होती है कि उनका बच्चा पढ़ाई और करियर में अव्वल निकले, समाज में काबिल कहलाए। लेकिन इसी चाहत के चलते कई बार वे अनजाने में बच्चों पर बोझ डाल देते हैं, जो उनकी मानसिक सेहत के लिए हानिकारक साबित होता है। विकास दिव्यकीर्ति का साफ कहना है कि पेरेंटिंग का मकसद बच्चों को किसी अंधी दौड़ में झोंकना नहीं होना चाहिए, बल्कि उन्हें अपनी गति और रुचि के अनुसार आगे बढ़ने देना ही असली परवरिश है। Parenting Tips
अकसर देखा जाता है कि माता-पिता मुकाबले की होड़ में बच्चों को आंकड़ों और अंकों के तराज़ू पर तौलने लगते हैं। किसी और के बच्चे के अच्छे नंबर देखकर वे अपने बच्चे पर गुस्सा निकालते हैं और उसकी तुलना करने लगते हैं। नतीजा यह होता है कि बच्चे का आत्मविश्वास धीरे-धीरे टूटने लगता है। विकास दिव्यकीर्ति का सुझाव है कि बच्चों के परिणाम जैसे भी हों, उन्हें सकारात्मक ढंग से स्वीकारें और खुले मन से उनकी मेहनत की सराहना करें। यही रवैया बच्चों में आत्मबल जगाता है और उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
डॉ. विकास दिव्यकीर्ति का मानना है कि बच्चों को शुरुआत से ही यह सिखाना चाहिए कि वे हर किसी से मधुर और सम्मानजनक तरीके से बात करें—चाहे सामने वाला उम्र में छोटा हो या बड़ा। इसी से उन्हें विनम्रता का असली अर्थ समझ में आता है। दरअसल, विनम्रता ही वह गुण है जो इंसान को जीवन में प्यार, सम्मान और रिश्तों की गहराई दिलाता है और उसकी शख्सियत को और मजबूती प्रदान करता है।
विकास दिव्यकीर्ति का कहना है कि बच्चों की गलतियों पर उन्हें डांटने के बजाय यह सिखाना जरूरी है कि गलती मान लेना कमजोरी नहीं, बल्कि एक सच्चे और ईमानदार इंसान की पहचान है। हर गलती अपने भीतर एक सबक छिपाए होती है, इसलिए बच्चों को समझाएं कि गलतियों से डरने के बजाय उन्हें स्वीकार कर उससे सीखना ही असली परिपक्वता है। Parenting Tips
विकास दिव्यकीर्ति का मानना है कि बच्चों को डर से भागना नहीं, बल्कि डटकर उसका सामना करना सिखाना चाहिए। जिंदगी में असफलता हर किसी के हिस्से आती है, लेकिन असली जीत उसी की होती है जो हार को सबक में बदलकर आगे बढ़े। जब बच्चा किसी काम में नाकाम हो जाए, तो उसे डांटने या डरा देने के बजाय प्रोत्साहित करें कि वह और मेहनत करे और दोबारा कोशिश करे। यही आदत उसे जीवनभर मजबूत और आत्मविश्वासी बनाएगी। Parenting Tips