समय ने सबको है देखा,
देता कर्मों का लेखा जोखा,
राजकुमार को बेल पर झूलते देखा,
समय ने सबको है देखा ।।
मंच से समाज को गाली देते देखा,
न्यायालय ने प्रमाण भी देखा,
राजकुमार को कारावास मिलते देखा,
समय ने सबको है देखा ।।
अर्श से फर्श पर आते देखा,
कागज के शेर को देखा,
राजकुमार को संसद से बर्खास्त होते देखा,
समय ने सबको है देखा ।।
अर्पित मिश्रा
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