
Tariff : फिच रेटिंग्स ने वैश्विक व्यापार युद्ध की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए भारत की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान घटा दिया है। यह कदम दुनियाभर में बढ़ते आर्थिक तनाव और नीतिगत अनिश्चितता के चलते उठाया गया है। आइए जानें इस फैसले के पीछे के मुख्य कारण और इसके भारत व वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव।
फिच रेटिंग्स ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत की GDP वृद्धि दर का अनुमान घटाकर 6.4% कर दिया है।
पहले यह अनुमान 6.5% था, जिसे अब 10 आधार अंकों से कम किया गया है।
अमेरिका और चीन जैसे प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के बीच टैरिफ और व्यापार प्रतिबंधों ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रणाली को अस्थिर कर दिया है।
यह भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर भी अप्रत्यक्ष रूप से असर डाल रहा है।
फिच के अनुसार, अमेरिकी व्यापार नीतियों में स्थिरता की कमी के कारण निवेशकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
इससे निजी निवेश और विदेशी निवेश दोनों में गिरावट देखने को मिल रही है।
फिच के ग्लोबल इकोनॉमिक आउटलुक (GEO) के मुताबिक, 2025 में विश्व विकास दर 2% से भी कम रहने की संभावना है।
महामारी को छोड़कर यह 2009 के बाद की सबसे कमजोर वैश्विक वृद्धि दर हो सकती है।
अमेरिका की अर्थव्यवस्था में धीमापन, 2025 तक विकास दर 1.2% पर रहने की उम्मीद।
चीन: इस साल और अगले साल 4% से कम वृद्धि दर का पूर्वानुमान।
यूरो ज़ोन: वृद्धि दर 1% से भी नीचे बनी रह सकती है।
2024-25: अनुमानित वृद्धि दर 6.2%
2025-26: संशोधित दर 6.4%
2026-27: स्थिर दर 6.3% Tariff :