World Earth Day 2023- विश्व पृथ्वी दिवस 2023 की थीम है ये, जानें इस दिन का इतिहास और महत्व
भारत
चेतना मंच
22 Apr 2023 02:08 PM
World Earth Day 2023- एक फ़िल्म का डायलॉग काफी पॉपुलर हुआ करता था, ‘ये धरती मेरी मां है’ जिसे अभिनेता सुनील शेट्टी ने बोला था। ये भले ही एक डायलॉग है, लेकिन हकीकत तो यही है। धरती पर ही हमें जन्म मिलता है, इसी धरती से ही हमें भोजन, कपड़े आदि मिलते हैं। और ब्रह्मांड में पृथ्वी ही एकमात्र ऐसा ग्रह है, जहां पर जीवित रहने के लिए सभी आवश्यक चीजें जैसे हवा, पानी, भोजन इत्यादि मौजूद है। ऐसे में अगर पृथ्वी को जननी अर्थात मां कह कर संबोधित किया जाए तो यह कोई बड़ी बात नहीं है। इसीलिए इसके महत्व को लेकर लोगों में जागरूकता लाने के लिए हर साल 22 अप्रैल को ‘विश्व पृथ्वी दिवस’ मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने के पीछे उद्देश्य ही यही होता है कि लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक किया जाए और साथ ही उन्हें इसका संरक्षण करने के लिए प्रेरित भी किया जाए। आइये जानते हैं कि इस साल यानी 2023 में विश्व पृथ्वी दिवस (World Earth Day 2023) की थीम क्या रहेगी और इसका क्या महत्व है।
पृथ्वी दिवस 2023 की थीम क्या है?
इस बार पृथ्वी दिवस (World Earth Day 2023 Theme) की जो थीम रखी गयी है, वो ‘इन्वेस्ट इन आवर प्लेनेट’ (Invest in our planet) है। इस थीम से ही पता चल रहा है कि ये पृथ्वी के पर्यावरण के संरक्षण के लिए कितना जागरूक करने वाली है।
पृथ्वी दिवस को मनाने का इतिहास क्या है?
अगर बात करें कि इसको पहली बार कब मनाया गया था, तो सबसे पहले पृथ्वी दिवस को 1970 में मनाया गया था। इस दिवस को मनाने की शुरुआत अमेरिका में हुई थी। अमेरिका के सीनेट गेलोर्ड नेल्सन के आह्वान के बाद ही इसकी शुरुआत हुई थी। उस समय करीब 20 मिलियन लोग पर्यावरण की गिरावट के लिए सड़कों पर उतर आए थे। इसको मनाने से कई पर्यावरणीय मुद्दों को बढ़ावा मिला जैसे कि 1969 में हुई सांता बार्बरा में हुआ तेल रिसाव, स्मॉग और प्रदूषित नदियां।
World Earth Day 2023-
इसके बाद संयुक्त राष्ट्र ने 2009 में 22 अप्रैल को ‘अंतर्राष्ट्रीय मातृ पृथ्वी दिवस’ के रूप में मनाने का एलान किया। इसको वैश्विक स्तर पर एक गैर लाभकारी संस्था द्वारा समायोजित किया जाता है जिसका नाम EARTHDAY.ORG है। इसको इससे पहले अर्थ डे के रूप में जाना जाता था।
पृथ्वी दिवस का क्या महत्व है?
इसका उद्देश्य है ‘ विश्व में सबसे बड़े पर्यावरण आंदोलन का निर्माण करना, जिससे लोगों और पृथ्वी में एक परिवर्तनकारी बदलाव आए’। इस दिन का अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बहुत अधिक महत्व है इसीलिए जलवायु परिवर्तन के संकट से निपटने के लिए 2016 में संयुक्त राष्ट्र के द्वारा ऐतिहासिक पेरिस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे।