World Homeopathy Day - वर्ल्ड होम्योपैथी डे का क्या है इतिहास एवं महत्व
भारत
चेतना मंच
10 Apr 2023 01:34 PM
World Homeopathy Day -चिकित्सा के क्षेत्र में होम्योपैथी का बहुत अधिक महत्व है। यही कारण है कि हर साल 10 अप्रैल को वर्ल्ड होम्योपैथी डे के रूप में मनाया जाता है। यह दिन इसलिए मनाया जाता है ताकि लोगों को होम्योपैथी को लेकर जागरूक किया जा सके और होम्योपैथी में और अधिक सुधार किया जा सके। होम्योपैथी चिकित्सा के मामले में भले ही आज एलोपैथी से काफी पिछड़ गया है लेकिन लोगों का विश्वास आज भी इस पर बना हुआ है। आगे भविष्य में इसको और ज्यादा चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा, इसीलिए इसकी चुनौतियों आउट रणनीति को समझना हम सभी के लिए काफी महत्वपूर्ण है। तो आज 10 अप्रैल है, यानी वर्ल्ड होम्योपैथी डे, इस मौके पर आइये जानते हैं इसके इतिहास के बारे में।
History of World Homeopathy Day :वर्ल्ड होम्योपैथी डे का इतिहास-
एक व्यक्ति थे जिनका नाम था सैमुएल हैनिमैन, इन्हें ही होम्योपैथी का संस्थापक माना जाता है। हैनिमैन एक फ्रांसीसी चिकित्सक, वैज्ञानिक होने के साथ- साथ बहुत बड़े विद्वान भी थे। उन्होंने चिकित्सा में 15 वर्ष योगदान देने के दौरान एक खोज की थी। जीविकोपार्जन के लिए संघर्ष करते हुए उन्होंने बताया था कि किसी भी बीमारी को ठीक करने के लिए ज़रूरी है कि बीमारी के लक्षणों को उतपन्न करने वाले तत्वों को मरीज को दिया जाए। जैसे कि अगर किसी मरीज को बहुत तेज़ बुखार है तो उसे एक ऐसी दवा दी जानी चाहिए जिससे उसका बुखार और भड़के। उनकी सफलता के बाद होम्योपैथी को पहली बार 19वीं शताब्दी में प्रमुखता मिली। हालांकि 5वीं शताब्दी में 'चिकित्सा के जनक' हिप्पोक्रेट्स ने अपनी दवा की पेटी में होम्योपैथी के उपचार को पेश किया था। जब हिप्पोक्रेट्स ने इसे पेश किया उसके बाद ये कहीं विलुप्त हो गया और फिर हैनिमैन ने इसको 19वीं शताब्दी में फिर से जिंदा किया। उन्हीं के जन्मदिन के अवसर पर हर साल होम्योपैथी डे (World Homeopathy Day) को मनाया जाता है।
वर्ल्ड होम्योपैथी डे का महत्व-
इस दिन का बहुत अधिक महत्व है क्योंकि इसी दिन हर साल लोगों को होम्योपैथी के प्रति जागरूक किया जाता है और होम्योपैथी की पहुंच में सुधार करने की ओर थोड़ा ध्यान केंद्रित किया जाता है। होम्योपैथी एक ऐसी चिकित्सा प्रणाली है जिसका ऐसा मानना है कि मानव का जो शरीर है वो खुद को ठीक कर सकता है।