"मैंने नहीं बंद किया फ्यूल": अहमदाबाद विमान हादसे से पहले का चौंकाने वाला खुलासा
Ahmedabad Plane Crash
भारत
RP Raghuvanshi
12 Jul 2025 01:13 PM
भारत
RP Raghuvanshi
12 Jul 2025 01:13 PM
Ahmedabad Plane Crash : 12 जून को अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 के भयावह हादसे की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सामने आ चुकी है। विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) की इस 15-पृष्ठीय रिपोर्ट में वो अंतिम क्षण दर्ज हैं जब पायलटों के बीच फ्यूल सप्लाई को लेकर असमंजस था। जो इस हादसे की प्रमुख वजह बनकर सामने आ रहा है।
"क्या तुमने फ्यूल कटआफ किया?" - "नहीं, मैंने नहीं किया"
रिपोर्ट में दर्ज कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग के मुताबिक, टेकआफ के ठीक बाद एक पायलट ने दूसरे से पूछा—"क्या तुमने फ्यूल कटआफ किया?" जवाब मिला, "नहीं, मैंने नहीं किया।" यही संवाद अब पूरे विमान हादसे की जांच का केंद्र बन गया है। टेकआफ के चंद सेकंड के भीतर ही दोनों इंजनों के फ्यूल स्विच रन से 'कटआफ' स्थिति में चले गए थे।
टेकआफ के बाद ही दोनों इंजन बंद, पायलटों की हालत संभालने की कोशिश
AI-171 के दोनों इंजनों की फ्यूल सप्लाई अचानक बंद हो गई थी। आंकड़ों से पता चलता है कि पायलटों ने स्थिति को सुधारने की कोशिश की और फ्यूल स्विच को दोबारा 'कटआफ' से 'रन' पर सेट किया। लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। फ्लाइट ने महज एक मिनट हवा में बिताया और फिर क्रैश हो गई।
स्पीड 180 नॉट्स, और फिर दोनों इंजन ठप
जब विमान हवा में था, उसकी रफ्तार लगभग 180 नॉट्स थी। उसी क्षण, महज एक सेकंड के अंतराल में दोनों इंजनों का फ्यूल सप्लाई स्विच आफ हो गया। इसका नतीजा यह हुआ कि दोनों इंजनों ने शक्ति खो दी और फ्लाइट तेजी से नीचे गिरने लगी। विमान ने 1:38 बजे रात उड़ान भरी और 1:39 बजे आपातकालीन मेडे अलर्ट जारी किया गया। ATC ने जब कॉल साइन की पुष्टि के लिए संपर्क किया, तो कोई उत्तर नहीं मिला। इसके कुछ ही क्षणों में एयर ट्रैफिक कंट्रोलर ने विमान को एयरपोर्ट की सीमा से बाहर क्रैश होते देखा।
विनाशकारी टक्कर और भारी जनहानि
बोइंग 787 ड्रीमलाइनर ने बी. जे. मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल परिसर में सीधी टक्कर मारी। हादसे में विमान में सवार 242 में से 241 लोगों की जान चली गई, जबकि हॉस्टल में रह रहे 30 छात्रों की भी मौत हो गई। यह भारत के नागरिक उड्डयन इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक बन गई।
कौन थे विमान के पायलट?
विमान को उड़ा रहे कैप्टन सुमीत सभरवाल, एक अनुभवी लाइन ट्रेनिंग कैप्टन थे जिनके पास 8,200 घंटे की उड़ान का अनुभव था। उनके साथ को-पायलट के रूप में फर्स्ट आॅफिसर क्लाइव कुंदर थे, जिन्होंने 1,100 घंटे उड़ान का अनुभव प्राप्त किया था। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों पायलट मेडिकल रूप से पूरी तरह फिट थे।
RAT की तैनाती और टेक्निकल संकेत
जांच में यह भी सामने आया है कि टेकआफ के तुरंत बाद विमान की रैम एयर टर्बाइन (RAT) तैनात हो गई थी। RAT का सक्रिय होना इस ओर इशारा करता है कि दोनों इंजनों की विफलता के कारण विमान की सभी प्राथमिक पावर सिस्टम्स इलेक्ट्रिकल और हाइड्रोलिक फेल हो चुके थे।
पूर्व में भी हुई थी ऐसी चूक, पर बचा लिया गया था विमान
रिपोर्ट में संदर्भित किया गया है कि 1980 के दशक में एक डेल्टा एयरलाइंस पायलट ने गलती से बोइंग 767 के इंजन का फ्यूल सप्लाई बंद कर दिया था, लेकिन ऊंचाई में होने के चलते वह इंजन को दोबारा शुरू करने में सफल रहा। इस बार वैसा नहीं हो सका। AAIB की रिपोर्ट फिलहाल प्रारंभिक निष्कर्षों पर आधारित है। लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि एक छोटी सी चूक या तकनीकी विफलता ने 270 से अधिक जिंदगियों को लील लिया। अब सवाल यह है कि क्या यह मानवीय भूल थी, या फिर किसी तकनीकी खामी की भयावह परिणति? जांच की अगली रिपोर्टें इस पर और प्रकाश डालेंगी।