20 दिन में कानून, 20 महीने में नौकरी, महागठबंधन का चुनावी मेनिफेस्टो लॉन्च
भारत
RP Raghuvanshi
02 Dec 2025 03:38 AM
बिहार विधानसभा चुनाव के लिए महागठबंधन ने अपने चुनावी वादों का पिटारा खोल दिया है। इस बार गठबंधन का घोषणापत्र सिर्फ दस्तावेज नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संदेश बनकर सामने आया है। नाम दिया गया है बिहार का तेजस्वी प्रण। तेजस्वी यादव ने इसे युवाओं, महिलाओं और किसानों की उम्मीदों का रोडमैप बताया, तो सहयोगी दलों ने इसे बदलाव का संकल्प करार दिया। Bihar Elections :
20 दिन में कानून, 20 महीने में नौकरी का वादा
घोषणापत्र का सबसे बड़ा आकर्षण है हर परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का वादा। महागठबंधन ने कहा है कि अगर इंडिया गठबंधन की सरकार बनी, तो सत्ता संभालने के 20 दिनों के भीतर कानून बनाया जाएगा और 20 महीनों के भीतर भर्ती प्रक्रिया पूरी कर दी जाएगी। घोषणापत्र में यह भी जोड़ा गया है कि राज्य की सभी जीविका दीदियों को स्थायी दर्जा दिया जाएगा और उन्हें सरकारी कर्मचारी माना जाएगा। उनका मासिक वेतन 30,000 रुपये तय करने का भी वादा किया गया है।
महिलाओं और बुजुर्गों के लिए योजनाओं की झड़ी
महागठबंधन के घोषणापत्र में महिलाओं और सामाजिक सुरक्षा पर खास फोकस है। माई-बहन मान योजना के तहत 1 दिसंबर से महिलाओं को 2,500 मासिक सहायता दी जाएगी। वृद्धा और विधवा पेंशन 1,500 प्रतिमाह की जाएगी। हर अनुमंडल में महिला कॉलेज खोले जाएंगे, ताकि बेटियों को उच्च शिक्षा का अवसर मिले।
शिक्षा, परीक्षा और रोजगार पर ध्यान
महागठबंधन ने युवाओं के लिए कई राहत घोषणाएं की हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए फॉर्म और परीक्षा शुल्क पूरी तरह समाप्त किया जाएगा। शिक्षकों और स्वास्थ्यकर्मियों की पोस्टिंग गृह जिले से 70 किलोमीटर के दायरे में करने का वादा। पुरानी पेंशन योजना को फिर से लागू करने की घोषणा। इसके साथ ही किसानों और मजदूरों के लिए बड़े एलान करते हुए घोषणापत्र में कहा गया है कि किसानों की फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की गारंटी दी जाएगी। मनरेगा मजदूरी 255 से बढ़ाकर 300 प्रतिदिन की जाएगी। हर नागरिक को 25 लाख रुपये का मुफ़्त स्वास्थ्य बीमा दिया जाएगा, जिसे जन स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत लागू किया जाएगा। Bihar Elections
तेजस्वी प्रण या चुनावी दांव
राजनीतिक हलकों में इस घोषणापत्र को तेजस्वी यादव की रणनीतिक चाल माना जा रहा है।
एक तरफ यह मेनिफेस्टो युवाओं की नाराजगी को साधने की कोशिश करता है, तो दूसरी तरफ महिलाओं और किसानों को भी जोड़ने का प्रयास है। हालांकि विपक्ष ने इन वादों को अवास्तविक और आर्थिक रूप से असंभव बताया है, लेकिन महागठबंधन का मानना है कि यह नौकरी, सम्मान और अधिकार का वादा है, जो बिहार की राजनीति का एजेंडा बदल सकता है।