बिहार को बजट में चुनावी चासनी, बिहार में बनाया जाएगा मखाना बोर्ड
Budget 2025
भारत
चेतना मंच
01 Feb 2025 08:12 PM
Budget 2025 : आज संसद में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लगातार आठवीं बार बजट पेश किया। बिहार में होने वाले चुनाव को ध्यान में रखते हुए संसद में बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री ने बिहार के मखाना किसानों और व्यापारियों के लिए बड़ी घोषणा की है। उन्होंने कहा कि राज्य में मखाना उत्पादन को बढ़ावा देने और किसानों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए एक स्पेशल मखाना बोर्ड बनाया जाएगा। इस बोर्ड के जरिए मखाना किसानों को तकनीकी सहायता और वित्तीय सहायता प्रदान भी की जाएगी, जिससे उनकी आय में बढ़ोतरी हो सके। इस प्रकार बिहार चुनाव को ध्यान में रखते हुए बिहार के इस प्रमुख व्यवसाय को लेकर भी बजट में इसको शामिल किया गया और यहां तक कि मखाना बोर्ड तक बनाने की घोषणा की गई।
बिहार देश में मखाना उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र
बिहार में चुनाव होने वाला है इसलिए सरकार की ओर से इस बजट में मखाना को लेकर फैसला लिया गया है। बिहार देश में मखाना उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र है, लेकिन अब तक इसे संगठित ढांचे में नहीं लाया गया था। बजट में मखाना उद्योग को स्थान देने और उसके बारे में फैसला लेने के सरकार के इस कदम से मखाना उद्योग को बढ़ावा मिलेगा और किसानों को उचित मूल्य मिलने के आसार माने जा रहे हैं। बजट में की गई इस घोषणा से मखाना व्यापार के क्षेत्र में अब नए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
बिहार चुनाव से पहले बड़ा ऐलान
बिहार में होने वाले चुनाव से पहले बिहार के लिए ये एक बड़ी घोषणा मानी जा रही है। भारत का लगभग 90% मखाना उत्पादन अकेले बिहार करता है, जिसमें से 80% अकेले उत्तर बिहार में होता है। इसी वजह से दरभंगा और मधुबनी सहित उत्तर बिहार के कुछ जिलों को मखाना क्षेत्र के रूप में जाना जाता है। मखाना व्यापार को लेकर यहां के युवाओं में भी काफी जोश खरोश है।
बजट में मखाना बोर्ड बनाने की घोषणा
बिहार में मखाना उत्पादन एक बड़े व्यवसाय का रूप ले रही है। यहां देश का 90 प्रतिशत मखाना का उत्पादन किया जाता है। किसानों को उन्नत तकनीकों से प्रशिक्षित करने के लिए विश्व का एकमात्र मखाना अनुसंधान केंद्र भी है। इस केंद्र का उद्देश्य मखाना की गुणवत्ता सुधारना और उत्पादन को बढ़ावा देना है, जिससे किसानों की आय में बढ़ोतरी हो सके। मखाना की बढ़ती मांग को देखते हुए सरकार अब इसके व्यावसायिक उत्पादन को और बढ़ावा देने की योजना बना रही है। अब बजट में मखाना बोर्ड बनाने की घोषणा होने के बाद निश्चय ही इस व्यवसाय के दिन बहुरने वाले हैं।
कैसे होती है मखाने की खेती
मखानों को आमतौर पर तालाबों में उगाया जाता है। मखाना की नर्सरी सर्दियों के दौरान, यानी नवंबर में तैयार की जाती है, और तीन से चार महीने बाद इसे मुख्य खेत यानी तालाब में ट्रांसप्लांट किया जाता है। इसके बीज पानी में डालने के बाद अंकुरित होकर पौधे का रूप ले लेते हैं। मखाना की खेती के लिए चार से पांच फीट पानी की गहराई जरूरी होती है। बिहार में तालाबों की संख्या भी काफी है जो मखाना की खेती के लिए मुफीद होती है, इसलिए यहां इस व्यवसाय के अभी और पनपने के अवसर हैं।