
आयुष्मान भारत योजना, जिसे भारत सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए शुरू किया है, का उद्देश्य मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है। इसके तहत, प्रत्येक परिवार को सालाना 5 लाख रुपये तक का मुफ्त स्वास्थ्य बीमा मिलता है। हालांकि, हाल ही में सामने आया है कि कुछ अस्पतालों ने फर्जी तरीके से मरीजों को भर्ती किए बिना ही इलाज के नाम पर सरकारी फंड प्राप्त कर लिया। इससे योजना के उद्देश्य का उल्लंघन हुआ है। अब तक की जांच में यह सामने आया है कि 212 अस्पतालों, इंश्योरेंस कंपनियों और दवा कंपनियों ने धोखाधड़ी की।
(ED) की टीम ने इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच शुरू की है। आरोप है कि बिना इलाज किए गए मरीजों के नाम पर सरकार से भुगतान लिया गया, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ। इस घोटाले में 40 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान बकाया है। इसके अलावा, कई ठिकानों पर छापेमारी की गई है, और फर्जीवाड़े से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है। ईडी के अधिकारियों ने अभी तक इस मामले में आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन जांच तेजी से आगे बढ़ रही है।
झारखंड के साथ-साथ यूपी, पश्चिम बंगाल, और दिल्ली में भी इस मामले में ईडी (ED) की छापेमारी हो रही है। इसके अलावा, तमिलनाडु, केरल, और कर्नाटक में भी मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों में कार्रवाई की गई है। कर्नाटक में 90 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में छापेमारी की गई है, जबकि तमिलनाडु और केरल में गोकुलम गोपालन नामक चिट फंड कंपनी से जुड़े ठिकानों पर कार्रवाई की गई।
इस घोटाले की जांच से यह स्पष्ट हो रहा है कि आयुष्मान भारत योजना का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया गया है। अब ईडी (ED) और अन्य जांच एजेंसियां मामले की गहराई से जांच कर रही हैं।ED :