बिहार ने दिया था देश को पहला नेशनल हाईवे, जो जोड़ता है कई देशों को
भारत
RP Raghuvanshi
02 Dec 2025 02:31 AM
भारत का पहला नेशनल हाईवे माने जाने वाली ग्रैंड ट्रंक रोड (जीटी रोड) की कहानी बिहार से गहराई से जुड़ी है। यूनेस्को के अनुसार, यह सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरे एशिया की सबसे प्राचीन और लंबी सड़कों में से एक है। यह ऐतिहासिक मार्ग बिहार की धरती से होकर गुजरता है। आज की राजधानी पटना, जो कभी पाटलिपुत्र के नाम से प्रसिद्ध था, इस सड़क का एक प्रमुख केंद्र रहा है। दिलचस्प बात यह है कि यह सड़क मौर्य काल में ही अस्तित्व में आ गई थी, जब इसे उत्तरापथ के नाम से जाना जाता था। First National Highway :
शेरशाह सूरी ने दी नई पहचान
16वीं शताब्दी में सूर साम्राज्य के शेरशाह सूरी ने इस मार्ग को एक नया रूप दिया। उन्होंने इसे शाह राह-ए-आजम या सड़क-ए-आजम के नाम से विकसित किया, जो काबुल (अफगानिस्तान) से लेकर सोनारगांव (बांग्लादेश) तक फैला था। यह सड़क व्यापार, प्रशासन और सेना की आवाजाही के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण थी।
मुगलों ने बनाए कोस मीनार
मुगलों ने इस सड़क के किनारे कोस मीनारें बनवाईं यानी हर कोस (लगभग 3 किलोमीटर) पर एक मीनार, जिससे यात्रियों को दूरी का अंदाजा मिल सके। आज भी कई जगह ये मीनारें इस सड़क के गौरवशाली इतिहास की गवाही देती हैं। आधुनिक समय में ग्रैंड ट्रंक रोड की पहुंच चार देशों तक फैली है। जिनमें हैं बांग्लादेश, भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान। यह हावड़ा (पश्चिम बंगाल) से शुरू होकर चटगांव (बांग्लादेश), पटना (बिहार), दिल्ली, लाहौर (पाकिस्तान) होते हुए काबुल (अफगानिस्तान) तक जाती है। यह मार्ग सिर्फ व्यापार का साधन नहीं रहा, बल्कि इसने भारतीय उपमहाद्वीप की सांस्कृतिक एकता को भी जोड़ा। मौर्य काल से लेकर ब्रिटिश शासन और आजाद भारत तक यह सड़क भारत की प्राचीनता और प्रगति दोनों की प्रतीक रही है।